राजस्थानी भाषा : उत्पत्ति, लिपि व विकास

वापस

राजस्थानी एक प्राचीन, समृद्ध और स्वतंत्र भाषा है, जिसका लिखित साहित्य एक हज़ार वर्ष से भी पुराना है। करोड़ों लोग इसे बोलते हैं और इसकी अपनी व्याकरण, शब्दकोश व विशाल साहित्य है। इसके साहित्यिक रूप डिंगल और पिंगल कहलाते हैं। राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। बोलियों की विस्तृत जानकारी के लिए राजस्थान की बोलियां पेज देखें।

📖
778 ई.
कुवलयमाला में "मरु भाषा"
✍️
डिंगल
चारणों की शैली
🔤
मुड़िया
महाजनी लिपि
🏛️
25 अगस्त 2003
आठवीं अनुसूची हेतु संकल्प
📑 विषय सूची 12 टॉपिक

राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति

उत्पत्ति के संबंध में विद्वानों के मत

विद्वानमत
जॉर्ज ग्रियर्सनराजस्थानी की उत्पत्ति नागर अपभ्रंश से; राजस्थानी को पांच वर्गों में बांटा
सुनीति कुमार चटर्जीराजस्थानी की उत्पत्ति सौराष्ट्री/शौरसेनी अपभ्रंश से
एल.पी. टैसीटोरीइतालवी विद्वान; प्राचीन राजस्थानी को "पुरानी पश्चिमी राजस्थानी" नाम दिया; बीकानेर में कार्य किया
के.एम. मुंशीराजस्थानी व गुजराती की साझी प्राचीन भाषा को "मरु-गुर्जर" कहा

👤 लुइजी पियो टैसीटोरी (एल.पी. टैसीटोरी): इटली के उडीने नगर के निवासी; बीकानेर में रहकर राजस्थानी भाषा, चारण साहित्य व पुरातत्व पर कार्य किया; 1919 में बीकानेर में निधन — यहां उनकी समाधि है। उन्होंने कालीबंगा स्थल की ओर भी सबसे पहले ध्यान दिलाया था।

राजस्थानी भाषा का विकास काल

काललगभग समयविशेषता
प्राचीन काल11वीं-14वीं सदीअपभ्रंश मिश्रित भाषा; जैन मुनियों के रास-फागु ग्रंथ; मरु-गुर्जरी
मध्य काल15वीं-18वीं सदीडिंगल साहित्य का स्वर्णकाल — वीर काव्य, ख्यात, वात, वचनिका, वेलि
आधुनिक काल19वीं सदी सेगद्य, कहानी, उपन्यास, नाटक व पत्रकारिता का विकास

लिपि

🔤 देवनागरी

राजस्थानी की वर्तमान मान्य लिपि; साहित्य व शिक्षा में इसी का प्रयोग।

📒 मुड़िया (महाजनी)

व्यापारियों (महाजनों) की मात्रा-रहित लिपि; बही-खातों में प्रयोग; अक्षरों को घुमाकर (मोड़कर) लिखने के कारण "मुड़िया"। इसका प्रचलन राजा टोडरमल से जोड़ा जाता है। PYQ

📜 प्राचीन लिपियां

राजस्थान के प्राचीन अभिलेखों में ब्राह्मी व उससे विकसित कुटिल लिपि का प्रयोग मिलता है।

डिंगल एवं पिंगल

आधारडिंगलपिंगल
आधार बोलीमारवाड़ी (पश्चिमी राजस्थानी)ब्रज भाषा + राजस्थानी (पूर्वी)
प्रमुख रचनाकारचारणभाट
प्रमुख रसवीर रसश्रृंगार व भक्ति रस
उदाहरणवेलि क्रिसन रुकमणी री (पृथ्वीराज राठौड़), वंश भास्कर (सूर्यमल्ल मिश्रण)पृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई)
💡 याद रखें: डिंगल — चारण — वीर रस — पश्चिमी; पिंगल — भाट — श्रृंगार — पूर्वी। डिंगल को "राजस्थानी का साहित्यिक रूप" कहा जाता है।

राजस्थानी भाषा की प्रमुख विशेषताएं

राजस्थानी भाषा के प्रमुख विद्वान व रचनाकार

📚 सीताराम लालस

विशाल "राजस्थानी सबद कोस" (शब्दकोश) के रचयिता; पद्मश्री से सम्मानित।

🌾 कन्हैयालाल सेठिया

प्रसिद्ध गीत "धरती धोरां री" व कविता "पातळ अर पीथळ" के रचयिता।

📖 विजयदान देथा

"बिज्जी"; लोककथाओं का संग्रह "बातां री फुलवारी"; बोरूंदा (जोधपुर) में रूपायन संस्थान।

⚔️ सूर्यमल्ल मिश्रण

बूंदी के राजकवि; "वंश भास्कर" व "वीर सतसई"; राजस्थानी के प्रमुख डिंगल कवि।

📜 अगरचंद नाहटा

बीकानेर; हस्तलिखित ग्रंथों के संग्रहकर्ता — अभय जैन ग्रंथालय।

🎭 कोमल कोठारी

लोक संगीत व लोक कलाओं के अध्येता; रूपायन संस्थान के सह-संस्थापक।

मान्यता व आठवीं अनुसूची की मांग

🏛️

आठवीं अनुसूची में राजस्थानी

लंबे समय से चल रही मांग

अति महत्वपूर्ण
  • संविधान की आठवीं अनुसूची में वर्तमान में 22 भाषाएं हैं; राजस्थानी अभी इसमें शामिल नहीं है।
  • राजस्थान विधानसभा ने 25 अगस्त 2003 को राजस्थानी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र को भेजा। PYQ
  • केंद्रीय साहित्य अकादमी राजस्थानी को एक स्वतंत्र साहित्यिक भाषा के रूप में मान्यता देती है और प्रतिवर्ष राजस्थानी साहित्य के लिए पुरस्कार देती है।
  • राजस्थान के विश्वविद्यालयों व माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में राजस्थानी एक वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है।

भाषा से संबंधित संस्थान

राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमीबीकानेर (1983)
राजस्थान साहित्य अकादमीउदयपुर (1958)
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठानजोधपुर
राजस्थानी शोध संस्थानचौपासनी (जोधपुर)
राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमीजयपुर
राजस्थान ब्रजभाषा अकादमीजयपुर

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) "मरु भाषा" — कुवलयमाला (उद्योतन सूरि); "मारवाड़ी" — आईन-ए-अकबरी; "राजस्थानी" शब्द — ग्रियर्सन। (2) "पुरानी पश्चिमी राजस्थानी" नाम — टैसीटोरी ने दिया। (3) डिंगल — चारण, पिंगल — भाट (उलटा न करें)। (4) राजस्थानी भाषा अकादमी — बीकानेर, साहित्य अकादमी — उदयपुर।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. राजस्थानी की उत्पत्ति — शौरसेनी अपभ्रंश के गुर्जरी रूप से।
  2. राजस्थानी-गुजराती की साझी प्राचीन भाषा — मरु-गुर्जरी।
  3. "मरु भाषा" का उल्लेख — कुवलयमाला (उद्योतन सूरि, 778 ई., जालोर)।
  4. "मारवाड़ी" का उल्लेख — आईन-ए-अकबरी (अबुल फज़ल)।
  5. "राजस्थानी" शब्द का प्रथम प्रयोग — जॉर्ज ग्रियर्सन (लिंग्विस्टिक सर्वे ऑफ इंडिया)।
  6. ग्रियर्सन के अनुसार उत्पत्ति — नागर अपभ्रंश।
  7. "पुरानी पश्चिमी राजस्थानी" — एल.पी. टैसीटोरी; समाधि — बीकानेर।
  8. राजस्थानी की लिपि — देवनागरी; व्यापारिक लिपि — मुड़िया (महाजनी)।
  9. डिंगल — चारण, वीर रस, मारवाड़ी आधार।
  10. पिंगल — भाट, ब्रज मिश्रित; उदाहरण — पृथ्वीराज रासो।
  11. "राजस्थानी सबद कोस" — सीताराम लालस।
  12. "धरती धोरां री" — कन्हैयालाल सेठिया।
  13. "बातां री फुलवारी" — विजयदान देथा।
  14. आठवीं अनुसूची हेतु विधानसभा संकल्प — 25 अगस्त 2003।
  15. राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी — बीकानेर (1983)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति किस अपभ्रंश से मानी जाती है?

2 "मरु भाषा" का उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?

3 "कुवलयमाला" की रचना कहां हुई?

4 भाषा के लिए "राजस्थानी" शब्द का प्रथम प्रयोग किसने किया?

5 "मारवाड़ी" भाषा का उल्लेख किस ग्रंथ में मिलता है?

6 "पुरानी पश्चिमी राजस्थानी" नाम किस विद्वान ने दिया?

7 इतालवी विद्वान टैसीटोरी की समाधि कहां है?

8 मात्रा-रहित महाजनी लिपि का नाम क्या है?

9 डिंगल शैली के प्रमुख रचनाकार कौन थे?

10 पिंगल शैली का उदाहरण कौन-सा ग्रंथ है?

11 डिंगल किस बोली का साहित्यिक रूप है?

12 "राजस्थानी सबद कोस" के रचयिता कौन हैं?

13 "धरती धोरां री" गीत के रचयिता कौन हैं?

14 राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी कहां स्थित है?

15 राजस्थानी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का विधानसभा संकल्प कब पारित हुआ?

स्कोर: 0 / 15
वापस