राजस्थान की जलवायु
राजस्थान की जलवायु मुख्यतः उष्ण कटिबंधीय शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क मानसूनी है। अरावली पर्वतमाला के मानसूनी पवनों के समानांतर होने, समुद्र से दूरी और मरुस्थल की उपस्थिति के कारण राज्य के पश्चिमी भाग में वर्षा बहुत कम तथा तापांतर अधिक रहता है, जबकि दक्षिण-पूर्वी भाग अपेक्षाकृत आर्द्र है।
📑 विषय सूची 10 टॉपिक
जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
- अक्षांशीय स्थिति — कर्क रेखा राज्य के दक्षिण से गुजरती है; अधिकांश भाग उपोष्ण कटिबंध में।
- अरावली की दिशा — दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व; अरब सागरीय मानसून के समानांतर, अतः पवनें बिना रुके आगे निकल जाती हैं।
- समुद्र से दूरी — महाद्वीपीय (विषम) जलवायु; दैनिक व वार्षिक तापांतर अधिक।
- समुद्रतल से ऊंचाई — माउंट आबू जैसे ऊंचे स्थान ठंडे; हिल स्टेशन।
- मरुस्थल व रेत — रेत जल्दी गर्म व जल्दी ठंडी होती है।
कोपेन का जलवायु वर्गीकरण
| प्रकार | नाम | क्षेत्र |
|---|---|---|
| Aw | उष्ण कटिबंधीय आर्द्र (सवाना) | बांसवाड़ा, डूंगरपुर का दक्षिणी भाग |
| BWhw | उष्ण शुष्क मरुस्थलीय | जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर का पश्चिमी भाग, श्रीगंगानगर का पश्चिमी भाग |
| BShw | अर्द्ध-शुष्क (स्टेपी) | मरुस्थल का पूर्वी भाग — चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, जोधपुर, जालोर, पाली आदि |
| Cwg | उप-आर्द्र (शीतकाल शुष्क) | अरावली के पूर्व का अधिकांश भाग — जयपुर, अलवर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर आदि |
🧠 कोपेन संकेत — A = उष्ण आर्द्र, B = शुष्क, C = समशीतोष्ण; W = मरुस्थल, S = स्टेपी, w = शीतकाल शुष्क, h = उष्ण, g = गंगा प्रकार (ग्रीष्म में अधिकतम तापमान वर्षा से पहले)।
राजस्थान की ऋतुएं
ग्रीष्म ऋतु (मार्च से मध्य जून)
लू, आंधियां और भभूल्या
- मई-जून सबसे गर्म महीने; पश्चिमी राजस्थान में तापमान 45-50°C तक।
- राज्य का अब तक का सर्वाधिक तापमान — फलोदी, 51°C (19 मई 2016)।
- लू — दोपहर में चलने वाली गर्म-शुष्क पवनें; भभूल्या — गर्म हवा के कारण बनने वाले वायु के बवंडर (चक्रवात)।
- सर्वाधिक धूल भरी आंधियां — श्रीगंगानगर क्षेत्र; अधिक तापमान से बना निम्न वायुदाब मानसून को आकर्षित करता है।
वर्षा ऋतु (मध्य जून से सितंबर)
दक्षिण-पश्चिमी मानसून
- मानसून सामान्यतः दक्षिण-पूर्व (बांसवाड़ा-झालावाड़) से प्रवेश करता है; राज्य की अधिकांश वर्षा बंगाल की खाड़ी की शाखा से होती है।
- अरब सागर की शाखा अरावली के समानांतर निकल जाने के कारण पश्चिमी राजस्थान को कम वर्षा देती है।
- वर्षा का वितरण दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर घटता जाता है।
- सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान — माउंट आबू; सर्वाधिक वर्षा वाला जिला — झालावाड़; न्यूनतम — जैसलमेर।
🍂 मानसून प्रत्यावर्तन (अक्टूबर-नवंबर)
मानसून लौटता है; आकाश साफ, दिन गर्म व रातें ठंडी।
❄️ शीत ऋतु (दिसंबर-फरवरी)
जनवरी सबसे ठंडा महीना; चूरू, श्रीगंगानगर, माउंट आबू में तापमान शून्य के पास या नीचे; पाला व शीतलहर।
🌦️ मावठ
शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ (भूमध्य सागर से) के कारण होने वाली वर्षा; रबी फसलों (गेहूं, चना) के लिए "गोल्डन ड्रॉप्स"।
🌡️ तापांतर
सर्वाधिक दैनिक व वार्षिक तापांतर — मरुस्थलीय जिले (चूरू, जैसलमेर, बाड़मेर)।
वर्षा के आधार पर जलवायु प्रदेश
| जलवायु प्रदेश | वार्षिक वर्षा | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|---|
| शुष्क | 0-20 सेमी | जैसलमेर, पश्चिमी बाड़मेर, पश्चिमी बीकानेर |
| अर्द्ध-शुष्क | 20-40 सेमी | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, जोधपुर, नागौर, पूर्वी बाड़मेर |
| उप-आर्द्र | 40-60 सेमी | सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, अजमेर, पाली, जालोर, टोंक |
| आर्द्र | 60-80 सेमी | अलवर, भरतपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा, भीलवाड़ा, उदयपुर |
| अति आर्द्र | 80 सेमी से अधिक | झालावाड़, बारां, बांसवाड़ा, माउंट आबू क्षेत्र |
📝 50 सेमी समवर्षा रेखा राज्य को लगभग दो बराबर भागों में बांटती है और लगभग अरावली के साथ-साथ चलती है; 25 सेमी समवर्षा रेखा शुष्क व अर्द्ध-शुष्क मरुस्थल को अलग करती है।
मानसून की शाखाएं व वर्षा की प्रकृति
| शाखा | प्रवेश दिशा | प्रभाव |
|---|---|---|
| बंगाल की खाड़ी की शाखा | पूर्व / दक्षिण-पूर्व से | राज्य में सर्वाधिक वर्षा; पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में; इन पवनों को स्थानीय भाषा में "पुरवाई" कहते हैं |
| अरब सागर की शाखा | दक्षिण-पश्चिम से | अरावली के समानांतर होने से पश्चिमी राजस्थान में बहुत कम वर्षा; दक्षिणी अरावली (आबू) से टकराकर वहां अधिक वर्षा |
- राज्य की कुल वर्षा का अधिकांश भाग जुलाई-अगस्त में प्राप्त होता है।
- वर्षा अनिश्चित व अनियमित है; पश्चिमी राजस्थान में वर्षा की परिवर्तनशीलता सर्वाधिक है, इसलिए वहां अकाल अधिक पड़ते हैं।
- अधिकतम वर्षा के कारण माउंट आबू व झालावाड़ क्षेत्र में घने वन; न्यूनतम वर्षा के कारण जैसलमेर में मरुस्थलीय वनस्पति।
जलवायु संबंधी प्रमुख रिकॉर्ड व तथ्य
🔥 सर्वाधिक तापमान
फलोदी — 51°C (19 मई 2016), राज्य व देश का अब तक का सर्वाधिक दर्ज तापमान।
❄️ सबसे ठंडा स्थान
माउंट आबू — ऊंचाई के कारण; मैदानी भाग में चूरू व श्रीगंगानगर में शीत अधिक।
🌡️ विषम तापांतर
चूरू — गर्मियों में अत्यधिक गर्मी व सर्दियों में शून्य से नीचे तापमान।
🌧️ सर्वाधिक वर्षा वाला जिला
झालावाड़ (हाड़ौती); इसके बाद बांसवाड़ा।
🏜️ न्यूनतम वर्षा
जैसलमेर — राज्य का सबसे शुष्क जिला।
📏 50 सेमी समवर्षा रेखा
राज्य को लगभग दो बराबर भागों में बांटती है; लगभग अरावली के साथ।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान — माउंट आबू; सर्वाधिक वर्षा वाला जिला — झालावाड़। (2) शीतकालीन वर्षा मावठ — पश्चिमी विक्षोभ से (मानसून से नहीं)। (3) कोपेन — पश्चिमी मरुस्थल BWhw; बांसवाड़ा-डूंगरपुर Aw।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- औसत वार्षिक वर्षा — लगभग 57-58 सेमी।
- सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान — माउंट आबू; जिला — झालावाड़; न्यूनतम — जैसलमेर।
- सर्वाधिक तापमान — फलोदी, 51°C (19 मई 2016)।
- शीतकालीन वर्षा — मावठ (पश्चिमी विक्षोभ); "गोल्डन ड्रॉप्स"।
- वायु के बवंडर — भभूल्या; गर्म पवनें — लू।
- बांसवाड़ा-डूंगरपुर की कोपेन जलवायु — Aw; पश्चिमी मरुस्थल — BWhw।
- पूर्वी व दक्षिण-पूर्वी राजस्थान — Cwg; मरुस्थल का पूर्वी भाग — BShw।
- सर्वाधिक वर्षा देने वाली शाखा — बंगाल की खाड़ी; पवन — "पुरवाई"।
- अरावली अरब सागरीय मानसून के — समानांतर।
- शुष्क व अर्द्ध-शुष्क मरुस्थल को अलग करने वाली रेखा — 25 सेमी समवर्षा रेखा।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान कौन-सा है?
2 राजस्थान का अब तक का सर्वाधिक तापमान 51°C कहां दर्ज किया गया?
3 शीतकाल में पश्चिमी विक्षोभ से होने वाली वर्षा क्या कहलाती है?
4 कोपेन के अनुसार बांसवाड़ा-डूंगरपुर का जलवायु प्रकार क्या है?
5 राजस्थान की अधिकांश वर्षा मानसून की किस शाखा से होती है?
6 गर्म हवाओं से बनने वाले वायु के बवंडर क्या कहलाते हैं?
7 राजस्थान का सबसे कम वर्षा वाला जिला कौन-सा है?
8 अरब सागर की मानसूनी शाखा से पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा का मुख्य कारण क्या है?
9 राज्य को लगभग दो बराबर भागों में बांटने वाली समवर्षा रेखा कौन-सी है?
10 कोपेन के वर्गीकरण में "BWhw" किस प्रकार की जलवायु है?