भरतपुर-धौलपुर का जाट राजवंश
17वीं सदी के अंत में औरंगजेब की नीतियों के विरुद्ध मथुरा-आगरा क्षेत्र के जाट किसानों ने विद्रोह किया। इसी संघर्ष से भरतपुर का शक्तिशाली जाट राज्य उभरा, जिसे महाराजा सूरजमल ने चरम पर पहुंचाया। भरतपुर का लोहागढ़ दुर्ग अपनी अजेयता के लिए प्रसिद्ध है।
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जाट विद्रोह — राज्य की नींव
| नेता | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|
| गोकुला | 1669 में औरंगजेब के विरुद्ध जाट किसानों का विद्रोह; तिलपत के युद्ध में पराजित होकर बंदी बने और मृत्युदंड |
| राजाराम | 1688 में सिकंदरा में अकबर के मकबरे को लूटा |
| चूड़ामन | थून में दुर्ग बनाकर जाट शक्ति को संगठित किया; 1721 में आत्महत्या |
भरतपुर राज्य
बदनसिंह (1722-1756)
भरतपुर जाट राज्य के वास्तविक संस्थापक
- जयपुर के सवाई जयसिंह द्वितीय ने बदनसिंह को "ब्रजराज" की उपाधि दी और उन्हें मान्यता दिलाई।
- डीग को राजधानी बनाया और डीग के महलों का निर्माण आरंभ किया; कुम्हेर व वैर के दुर्ग बनवाए।
- वृद्धावस्था में अपने योग्य पुत्र सूरजमल को शासन का भार सौंप दिया।
महाराजा सूरजमल (1756-1763)
जाटों का प्लेटो (अफलातून) · जाट जाति का सबसे प्रतापी शासक
- 1733 में भरतपुर नगर व मिट्टी की दोहरी दीवारों वाला लोहागढ़ दुर्ग बनवाया; डीग में गोपाल भवन व अन्य जल महल।
- बगरू युद्ध (1748) में जयपुर के ईश्वरीसिंह की सहायता की।
- पानीपत के तीसरे युद्ध (1761) के बाद पराजित होकर लौटते मराठों को शरण व सहायता दी।
- 1761 में आगरा पर अधिकार किया; राज्य का विस्तार आगरा, मथुरा, अलीगढ़ तक हुआ।
- बुद्धिमत्ता व कूटनीति के कारण उन्हें "जाटों का प्लेटो (अफलातून)" कहा जाता है।
- 25 दिसंबर 1763 को हिंडन नदी के पास नजीबुद्दौला की सेना से युद्ध में मारे गए।
| शासक | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|
| जवाहरसिंह | पिता की मृत्यु का बदला लेने हेतु दिल्ली पर आक्रमण; दिल्ली के लाल किले से अष्टधातु के दरवाज़े भरतपुर लाए (जो मूलतः चित्तौड़ के थे); जयपुर से मांवडा-मंढोली युद्ध (1767) |
| रणजीतसिंह | 1805 में अंग्रेज़ सेनापति लॉर्ड लेक ने लोहागढ़ का कई बार घेरा डाला, पर दुर्ग जीत नहीं सका; बाद में अंग्रेज़ों से संधि |
| बलवंतसिंह | 1826 में अंग्रेज़ों ने भरतपुर पर अधिकार कर बलवंतसिंह को गद्दी पर बैठाया |
| किशनसिंह | हिंदी को राजभाषा बनाया; प्रशासनिक सुधार |
| बृजेंद्रसिंह | 1948 में मत्स्य संघ में भरतपुर का विलय |
धौलपुर के जाट शासक
- धौलपुर पर राणा उपाधि वाले जाट (बमरौलिया) शासकों का शासन रहा; 1805 में अंग्रेज़ों ने धौलपुर राज्य को मान्यता दी।
- अंतिम शासक महाराज राणा उदयभानसिंह — मत्स्य संघ (1948) के राजप्रमुख बने।
- धौलपुर में प्रसिद्ध मचकुंड तीर्थ ("तीर्थों का भांजा") और लाल पत्थर की खानें हैं।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) भरतपुर के वास्तविक संस्थापक — बदनसिंह; लोहागढ़ व भरतपुर नगर — सूरजमल (1733)। (2) “जाटों का प्लेटो” — सूरजमल। (3) लोहागढ़ का असफल घेरा — लॉर्ड लेक (1805); मत्स्य संघ के राजप्रमुख — उदयभानसिंह (धौलपुर)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- जाट विद्रोह का आरंभ — गोकुला (1669), तिलपत युद्ध।
- अकबर के मकबरे (सिकंदरा) की लूट — राजाराम (1688)।
- थून दुर्ग — चूड़ामन।
- "ब्रजराज" उपाधि — बदनसिंह (सवाई जयसिंह द्वारा)।
- भरतपुर व लोहागढ़ — सूरजमल (1733)।
- "जाटों का प्लेटो" — सूरजमल; मृत्यु — 1763, हिंडन नदी।
- पानीपत (1761) के बाद मराठों को शरण — सूरजमल।
- अष्टधातु के दरवाज़े लाए — जवाहरसिंह; मांवडा-मंढोली — 1767।
- लोहागढ़ का असफल घेरा — लॉर्ड लेक (1805)।
- मत्स्य संघ के राजप्रमुख — उदयभानसिंह (धौलपुर)।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 1669 में औरंगजेब के विरुद्ध जाट विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
2 सिकंदरा में अकबर के मकबरे को किसने लूटा?
3 बदनसिंह को "ब्रजराज" की उपाधि किसने दी?
4 लोहागढ़ दुर्ग का निर्माण किसने करवाया?
5 "जाटों का प्लेटो" किसे कहा जाता है?
6 पानीपत के तीसरे युद्ध के बाद मराठों को शरण किसने दी?
7 सूरजमल की मृत्यु किसकी सेना से युद्ध में हुई?
8 मांवडा-मंढोली युद्ध (1767) किनके बीच हुआ?
9 लॉर्ड लेक ने लोहागढ़ का घेरा कब डाला?
10 मत्स्य संघ के राजप्रमुख कौन बने?