राजस्थान के प्रमुख मंदिर
राजस्थान के मंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला के अद्भुत उदाहरण हैं। 8वीं से 12वीं सदी के बीच यहां गुर्जर-प्रतिहार और सोलंकी शासकों के संरक्षण में भव्य मंदिर बने, जबकि जैन श्रेष्ठियों ने रणकपुर और दिलवाड़ा जैसे विश्वप्रसिद्ध मंदिर बनवाए।
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मंदिर स्थापत्य शैलियां
- राजस्थान के अधिकांश मंदिर नागर शैली के हैं, जिनमें शिखर ऊपर की ओर पतला होता जाता है।
- महामारू (गुर्जर-प्रतिहार) शैली: 8वीं-10वीं सदी; ओसियां, आभानेरी, किराडू (प्रारंभिक), बाड़ोली के मंदिर।
- मारु-गुर्जर (सोलंकी) शैली: 11वीं-13वीं सदी; बारीक नक्काशी; दिलवाड़ा, किराडू का सोमेश्वर मंदिर।
- पंचायतन शैली: मुख्य मंदिर के चारों कोनों पर चार छोटे मंदिर — ओसियां का हरिहर मंदिर।
प्राचीन व मध्यकालीन मंदिर
किराडू मंदिर
राजस्थान का खजुराहो · बाड़मेर
- बाड़मेर के हाथमा गांव के पास 11वीं-12वीं सदी के मंदिर समूह (पांच मंदिर शेष)।
- सबसे प्रसिद्ध सोमेश्वर (शिव) मंदिर — सोलंकी शैली; कामुक मूर्तियों के कारण "राजस्थान का खजुराहो"।
- लोक मान्यता है कि किराडू में रात रुकने वाला पत्थर बन जाता है।
ओसियां के मंदिर
राजस्थान का भुवनेश्वर · जोधपुर
- 8वीं-11वीं सदी के प्रतिहारकालीन मंदिर समूह; प्राचीन नाम "उपकेशपट्टन"। वत्सराज प्रतिहार के समय निर्माण आरंभ।
- प्रमुख मंदिर — सच्चियाय माता मंदिर, हरिहर मंदिर (पंचायतन शैली), सूर्य मंदिर, महावीर जैन मंदिर (वत्सराज के समय)।
- मंदिरों की संख्या व वैभव के कारण इसे "राजस्थान का भुवनेश्वर" कहा जाता है।
🌟 हर्षत माता (आभानेरी)
दौसा; 8वीं-9वीं सदी, गुर्जर-प्रतिहार शैली। पास में प्रसिद्ध चांद बावड़ी। आभानेरी का प्राचीन नाम "आभानगरी"।
🔱 एकलिंगजी (कैलाशपुरी)
उदयपुर; बप्पा रावल द्वारा निर्मित; मेवाड़ के महाराणा स्वयं को एकलिंगजी का दीवान मानते थे। चतुर्मुखी शिवलिंग। पास का लकुलीश मंदिर (971 ई.) पाशुपत संप्रदाय का।
💑 सास-बहू मंदिर (नागदा)
उदयपुर के नागदा में; वास्तव में "सहस्त्रबाहु" (विष्णु) मंदिर, 10वीं-11वीं सदी।
🪷 अंबिका माता (जगत)
उदयपुर; 961 ई. का मंदिर; "मेवाड़ का खजुराहो"।
🏞️ बाड़ोली के मंदिर
रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) के पास 9वीं-10वीं सदी के मंदिर समूह; घटेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख।
🗿 भंडदेवरा (रामगढ़)
बारां; 10वीं सदी का शिव मंदिर; "हाड़ौती का खजुराहो"।
☀️ सूर्य मंदिर (झालरापाटन)
झालावाड़; 10वीं सदी का पद्मनाभ मंदिर; झालरापाटन को "घंटियों का शहर" कहा जाता है।
🔱 हर्षनाथ (सीकर)
हर्ष पर्वत पर 10वीं सदी का शिव मंदिर; जीण माता के भाई हर्ष से संबंधित; यहां से हर्षनाथ शिलालेख (973 ई.) मिला।
🕉️ कंसुआ शिव मंदिर
कोटा; यहां 738 ई. का शिलालेख मिला; चतुर्मुखी शिवलिंग।
प्रमुख जैन मंदिर
रणकपुर जैन मंदिर
स्तंभों का अजायबघर · पाली
- इसके 1444 स्तंभों में से कोई भी दो स्तंभ एक जैसे नहीं हैं, इसलिए इसे "स्तंभों का अजायबघर" कहते हैं।
- चार दिशाओं में मुख वाली आदिनाथ की प्रतिमा के कारण इसे "चौमुखा मंदिर" भी कहा जाता है।
दिलवाड़ा जैन मंदिर
माउंट आबू (सिरोही) · संगमरमर की बारीक नक्काशी
- विमलवसही — गुजरात के सोलंकी शासक भीमदेव प्रथम के मंत्री विमलशाह ने बनवाया; प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित।
- लूणवसही — मंत्री बंधुओं वस्तुपाल व तेजपाल ने बनवाया; 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ को समर्पित। यहां "देवरानी-जेठानी के आले" प्रसिद्ध हैं।
- दिलवाड़ा में कुल 5 मंदिर हैं; संगमरमर पर अत्यंत बारीक नक्काशी के लिए विश्वविख्यात।
🧈 भांडाशाह मंदिर (बीकानेर)
सुमतिनाथ जैन मंदिर; मान्यता है कि नींव में पानी के स्थान पर घी का प्रयोग हुआ।
🙏 ऋषभदेव (केसरियाजी)
धुलेव (उदयपुर); प्रतिमा पर केसर चढ़ाई जाती है; आदिवासी इन्हें "कालाजी" कहते हैं।
⭐ श्री महावीरजी (करौली)
चांदनपुर गांव; महावीर जयंती (चैत्र शुक्ल त्रयोदशी) पर विशाल मेला व रथयात्रा।
🏔️ चांदखेड़ी (झालावाड़)
खानपुर कस्बे में भूगर्भ में स्थित आदिनाथ जैन मंदिर।
आस्था के प्रमुख केंद्र
| मंदिर | स्थान (जिला) | विशेषता |
|---|---|---|
| ब्रह्मा मंदिर | पुष्कर (अजमेर) | देश का प्रमुख ब्रह्मा मंदिर; कार्तिक पूर्णिमा मेला |
| सावित्री माता | रत्नागिरी पहाड़ी, पुष्कर | ब्रह्मा की पत्नी; रोप-वे |
| श्रीनाथजी | नाथद्वारा (राजसमंद) | वल्लभ संप्रदाय; 1672 में स्थापना; पिछवाई |
| द्वारकाधीश | कांकरोली (राजसमंद) | वल्लभ संप्रदाय |
| चारभुजा नाथ | गढ़बोर (राजसमंद) | मेवाड़ के चार धामों में एक |
| सांवलिया सेठ | मंडफिया (चित्तौड़गढ़) | श्रीकृष्ण; व्यापारी इन्हें व्यापार में भागीदार मानते हैं |
| सालासर बालाजी | सालासर (चूरू) | दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान; संत मोहनदास; चैत्र व आश्विन पूर्णिमा मेला |
| मेहंदीपुर बालाजी | दौसा | भूत-प्रेत बाधा निवारण की मान्यता |
| खाटू श्याम जी | खाटू (सीकर) | बर्बरीक का शीश; फाल्गुन शुक्ल एकादशी मेला; "हारे का सहारा" |
| गोविंद देव जी | जयपुर | गौड़ीय संप्रदाय; सवाई जयसिंह वृंदावन से लाए |
| गलता जी | जयपुर | रामानंदी पीठ; कुंड; "मंकी वैली" |
| बिड़ला मंदिर | जयपुर | लक्ष्मी-नारायण; सफेद संगमरमर |
| मचकुंड | धौलपुर | "तीर्थों का भांजा"; ऋषि पंचमी मेला |
| अचलेश्वर महादेव | अचलगढ़ (सिरोही) | शिव के पैर के अंगूठे की पूजा |
| कपिल मुनि | कोलायत (बीकानेर) | कार्तिक पूर्णिमा मेला |
मंदिरों के उपनाम
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) रणकपुर जैन मंदिर — 1444 स्तंभ, धरणकशाह, शिल्पी देपाक। (2) “राजस्थान का खजुराहो” — किराडू; “राजस्थान का भुवनेश्वर” — ओसियां। (3) बाड़ौली के मंदिर — रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- "राजस्थान का खजुराहो" — किराडू (बाड़मेर), सोमेश्वर मंदिर।
- "राजस्थान का भुवनेश्वर" — ओसियां; प्राचीन नाम उपकेशपट्टन।
- रणकपुर — धरणकशाह ने बनवाया, शिल्पी देपाक, 1444 स्तंभ।
- विमलवसही (1031) — विमलशाह; लूणवसही (1230) — वस्तुपाल-तेजपाल।
- "देवरानी-जेठानी के आले" — लूणवसही, दिलवाड़ा।
- सास-बहू मंदिर वास्तव में — सहस्त्रबाहु मंदिर (नागदा)।
- दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान — सालासर (चूरू)।
- बर्बरीक का शीश — खाटू श्याम (सीकर)।
- "तीर्थों का भांजा" — मचकुंड (धौलपुर)।
- नींव में घी — भांडाशाह जैन मंदिर (बीकानेर)।
- "हाड़ौती का खजुराहो" — भंडदेवरा (बारां)।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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1 "राजस्थान का खजुराहो" किस मंदिर को कहा जाता है?
2 रणकपुर जैन मंदिर में कितने स्तंभ हैं?
3 रणकपुर मंदिर का शिल्पी कौन था?
4 दिलवाड़ा का विमलवसही मंदिर किसे समर्पित है?
5 "राजस्थान का भुवनेश्वर" किसे कहा जाता है?
6 दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान जी का मंदिर कहां है?
7 "तीर्थों का भांजा" किसे कहा जाता है?
8 हर्षत माता का मंदिर किस स्थान पर है?
9 भंडदेवरा मंदिर किस जिले में है?
10 खाटू श्याम जी को किसका रूप माना जाता है?