राजस्थान के प्रमुख मंदिर

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राजस्थान के मंदिर स्थापत्य और मूर्तिकला के अद्भुत उदाहरण हैं। 8वीं से 12वीं सदी के बीच यहां गुर्जर-प्रतिहार और सोलंकी शासकों के संरक्षण में भव्य मंदिर बने, जबकि जैन श्रेष्ठियों ने रणकपुर और दिलवाड़ा जैसे विश्वप्रसिद्ध मंदिर बनवाए।

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किराडू
राजस्थान का खजुराहो
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1444
रणकपुर मंदिर के स्तंभ
🪷
पुष्कर
ब्रह्मा मंदिर
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ओसियां
राजस्थान का भुवनेश्वर
📑 विषय सूची 11 टॉपिक

मंदिर स्थापत्य शैलियां

गर्भगृहमूल प्रतिमा का स्थान
मंडपश्रद्धालुओं के बैठने का स्थान
शिखरगर्भगृह के ऊपर का भाग
तोरणअलंकृत प्रवेश द्वार
जगतीमंदिर का ऊंचा चबूतरा
अंतरालगर्भगृह व मंडप के बीच का भाग

प्राचीन व मध्यकालीन मंदिर

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किराडू मंदिर

राजस्थान का खजुराहो · बाड़मेर

अति महत्वपूर्ण
  • बाड़मेर के हाथमा गांव के पास 11वीं-12वीं सदी के मंदिर समूह (पांच मंदिर शेष)।
  • सबसे प्रसिद्ध सोमेश्वर (शिव) मंदिर — सोलंकी शैली; कामुक मूर्तियों के कारण "राजस्थान का खजुराहो"।
  • लोक मान्यता है कि किराडू में रात रुकने वाला पत्थर बन जाता है।
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ओसियां के मंदिर

राजस्थान का भुवनेश्वर · जोधपुर

अति महत्वपूर्ण
  • 8वीं-11वीं सदी के प्रतिहारकालीन मंदिर समूह; प्राचीन नाम "उपकेशपट्टन"। वत्सराज प्रतिहार के समय निर्माण आरंभ।
  • प्रमुख मंदिर — सच्चियाय माता मंदिर, हरिहर मंदिर (पंचायतन शैली), सूर्य मंदिर, महावीर जैन मंदिर (वत्सराज के समय)।
  • मंदिरों की संख्या व वैभव के कारण इसे "राजस्थान का भुवनेश्वर" कहा जाता है।

🌟 हर्षत माता (आभानेरी)

दौसा; 8वीं-9वीं सदी, गुर्जर-प्रतिहार शैली। पास में प्रसिद्ध चांद बावड़ी। आभानेरी का प्राचीन नाम "आभानगरी"।

🔱 एकलिंगजी (कैलाशपुरी)

उदयपुर; बप्पा रावल द्वारा निर्मित; मेवाड़ के महाराणा स्वयं को एकलिंगजी का दीवान मानते थे। चतुर्मुखी शिवलिंग। पास का लकुलीश मंदिर (971 ई.) पाशुपत संप्रदाय का।

💑 सास-बहू मंदिर (नागदा)

उदयपुर के नागदा में; वास्तव में "सहस्त्रबाहु" (विष्णु) मंदिर, 10वीं-11वीं सदी।

🪷 अंबिका माता (जगत)

उदयपुर; 961 ई. का मंदिर; "मेवाड़ का खजुराहो"।

🏞️ बाड़ोली के मंदिर

रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) के पास 9वीं-10वीं सदी के मंदिर समूह; घटेश्वर महादेव मंदिर प्रमुख।

🗿 भंडदेवरा (रामगढ़)

बारां; 10वीं सदी का शिव मंदिर; "हाड़ौती का खजुराहो"।

☀️ सूर्य मंदिर (झालरापाटन)

झालावाड़; 10वीं सदी का पद्मनाभ मंदिर; झालरापाटन को "घंटियों का शहर" कहा जाता है।

🔱 हर्षनाथ (सीकर)

हर्ष पर्वत पर 10वीं सदी का शिव मंदिर; जीण माता के भाई हर्ष से संबंधित; यहां से हर्षनाथ शिलालेख (973 ई.) मिला।

🕉️ कंसुआ शिव मंदिर

कोटा; यहां 738 ई. का शिलालेख मिला; चतुर्मुखी शिवलिंग।

प्रमुख जैन मंदिर

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रणकपुर जैन मंदिर

स्तंभों का अजायबघर · पाली

अति महत्वपूर्ण
स्थानरणकपुर (पाली), मघाई नदी के किनारे
निर्माताधरणकशाह (धरणशाह)
शिल्पीदेपाक (देपा)
निर्माण1439 ई., महाराणा कुंभा के काल में
समर्पितआदिनाथ (चौमुखा मंदिर)
स्तंभ1444
  • इसके 1444 स्तंभों में से कोई भी दो स्तंभ एक जैसे नहीं हैं, इसलिए इसे "स्तंभों का अजायबघर" कहते हैं।
  • चार दिशाओं में मुख वाली आदिनाथ की प्रतिमा के कारण इसे "चौमुखा मंदिर" भी कहा जाता है।
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दिलवाड़ा जैन मंदिर

माउंट आबू (सिरोही) · संगमरमर की बारीक नक्काशी

अति महत्वपूर्ण
विमलवसही (1031 ई.)विमलशाह — आदिनाथ
लूणवसही (1230 ई.)वस्तुपाल-तेजपाल — नेमिनाथ
  • विमलवसही — गुजरात के सोलंकी शासक भीमदेव प्रथम के मंत्री विमलशाह ने बनवाया; प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ को समर्पित।
  • लूणवसही — मंत्री बंधुओं वस्तुपाल व तेजपाल ने बनवाया; 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ को समर्पित। यहां "देवरानी-जेठानी के आले" प्रसिद्ध हैं।
  • दिलवाड़ा में कुल 5 मंदिर हैं; संगमरमर पर अत्यंत बारीक नक्काशी के लिए विश्वविख्यात।

🧈 भांडाशाह मंदिर (बीकानेर)

सुमतिनाथ जैन मंदिर; मान्यता है कि नींव में पानी के स्थान पर घी का प्रयोग हुआ।

🙏 ऋषभदेव (केसरियाजी)

धुलेव (उदयपुर); प्रतिमा पर केसर चढ़ाई जाती है; आदिवासी इन्हें "कालाजी" कहते हैं।

⭐ श्री महावीरजी (करौली)

चांदनपुर गांव; महावीर जयंती (चैत्र शुक्ल त्रयोदशी) पर विशाल मेला व रथयात्रा।

🏔️ चांदखेड़ी (झालावाड़)

खानपुर कस्बे में भूगर्भ में स्थित आदिनाथ जैन मंदिर।

आस्था के प्रमुख केंद्र

मंदिरस्थान (जिला)विशेषता
ब्रह्मा मंदिरपुष्कर (अजमेर)देश का प्रमुख ब्रह्मा मंदिर; कार्तिक पूर्णिमा मेला
सावित्री मातारत्नागिरी पहाड़ी, पुष्करब्रह्मा की पत्नी; रोप-वे
श्रीनाथजीनाथद्वारा (राजसमंद)वल्लभ संप्रदाय; 1672 में स्थापना; पिछवाई
द्वारकाधीशकांकरोली (राजसमंद)वल्लभ संप्रदाय
चारभुजा नाथगढ़बोर (राजसमंद)मेवाड़ के चार धामों में एक
सांवलिया सेठमंडफिया (चित्तौड़गढ़)श्रीकृष्ण; व्यापारी इन्हें व्यापार में भागीदार मानते हैं
सालासर बालाजीसालासर (चूरू)दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान; संत मोहनदास; चैत्र व आश्विन पूर्णिमा मेला
मेहंदीपुर बालाजीदौसाभूत-प्रेत बाधा निवारण की मान्यता
खाटू श्याम जीखाटू (सीकर)बर्बरीक का शीश; फाल्गुन शुक्ल एकादशी मेला; "हारे का सहारा"
गोविंद देव जीजयपुरगौड़ीय संप्रदाय; सवाई जयसिंह वृंदावन से लाए
गलता जीजयपुररामानंदी पीठ; कुंड; "मंकी वैली"
बिड़ला मंदिरजयपुरलक्ष्मी-नारायण; सफेद संगमरमर
मचकुंडधौलपुर"तीर्थों का भांजा"; ऋषि पंचमी मेला
अचलेश्वर महादेवअचलगढ़ (सिरोही)शिव के पैर के अंगूठे की पूजा
कपिल मुनिकोलायत (बीकानेर)कार्तिक पूर्णिमा मेला

मंदिरों के उपनाम

राजस्थान का खजुराहोकिराडू (बाड़मेर)
मेवाड़ का खजुराहोजगत का अंबिका मंदिर (उदयपुर)
हाड़ौती का खजुराहोभंडदेवरा (बारां)
राजस्थान का भुवनेश्वरओसियां (जोधपुर)
स्तंभों का अजायबघररणकपुर (पाली)
तीर्थों का भांजामचकुंड (धौलपुर)
तीर्थराजपुष्कर (अजमेर)
घंटियों का शहरझालरापाटन

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) रणकपुर जैन मंदिर — 1444 स्तंभ, धरणकशाह, शिल्पी देपाक। (2) “राजस्थान का खजुराहो” — किराडू; “राजस्थान का भुवनेश्वर” — ओसियां। (3) बाड़ौली के मंदिर — रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. "राजस्थान का खजुराहो" — किराडू (बाड़मेर), सोमेश्वर मंदिर।
  2. "राजस्थान का भुवनेश्वर" — ओसियां; प्राचीन नाम उपकेशपट्टन।
  3. रणकपुर — धरणकशाह ने बनवाया, शिल्पी देपाक, 1444 स्तंभ।
  4. विमलवसही (1031) — विमलशाह; लूणवसही (1230) — वस्तुपाल-तेजपाल।
  5. "देवरानी-जेठानी के आले" — लूणवसही, दिलवाड़ा।
  6. सास-बहू मंदिर वास्तव में — सहस्त्रबाहु मंदिर (नागदा)।
  7. दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान — सालासर (चूरू)।
  8. बर्बरीक का शीश — खाटू श्याम (सीकर)।
  9. "तीर्थों का भांजा" — मचकुंड (धौलपुर)।
  10. नींव में घी — भांडाशाह जैन मंदिर (बीकानेर)।
  11. "हाड़ौती का खजुराहो" — भंडदेवरा (बारां)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

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1 "राजस्थान का खजुराहो" किस मंदिर को कहा जाता है?

2 रणकपुर जैन मंदिर में कितने स्तंभ हैं?

3 रणकपुर मंदिर का शिल्पी कौन था?

4 दिलवाड़ा का विमलवसही मंदिर किसे समर्पित है?

5 "राजस्थान का भुवनेश्वर" किसे कहा जाता है?

6 दाढ़ी-मूंछ वाले हनुमान जी का मंदिर कहां है?

7 "तीर्थों का भांजा" किसे कहा जाता है?

8 हर्षत माता का मंदिर किस स्थान पर है?

9 भंडदेवरा मंदिर किस जिले में है?

10 खाटू श्याम जी को किसका रूप माना जाता है?

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