राजस्थान की प्राकृतिक वनस्पति (वन संपदा)
राजस्थान का अधिकांश भाग शुष्क व अर्द्ध-शुष्क होने के कारण यहां वन क्षेत्र देश के औसत से बहुत कम है। वनों का वितरण वर्षा पर निर्भर है — दक्षिण व दक्षिण-पूर्व के अधिक वर्षा वाले भागों में घने पतझड़ी वन और पश्चिम के मरुस्थल में कांटेदार झाड़ियां व घासें मिलती हैं।
📑 विषय सूची 12 टॉपिक
राजस्थान में वनों की स्थिति
- राष्ट्रीय वन नीति (1988) के अनुसार देश के 33% भाग पर वन होने चाहिए; राजस्थान इस लक्ष्य से बहुत पीछे है।
- वनों का सर्वाधिक जमाव अरावली व दक्षिण-पूर्वी पठार में — उदयपुर, प्रतापगढ़, सिरोही, चित्तौड़गढ़, बारां, बांसवाड़ा।
- भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI, देहरादून) हर दो वर्ष में भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) जारी करता है।
📝 ध्यान दें: ISFR के जिलेवार आंकड़े पुराने 33 जिलों के आधार पर हैं। परीक्षा में प्रायः उदयपुर (सर्वाधिक) व चूरू (न्यूनतम) पूछा जाता है। नवीनतम रिपोर्ट के सटीक आंकड़े परीक्षा से पहले अवश्य देख लें।
वनों के प्रकार
उष्ण कटिबंधीय कांटेदार वन
मरुस्थलीय वन · 50 सेमी से कम वर्षा वाले क्षेत्र
- क्षेत्र — जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, जोधपुर, चूरू, नागौर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़।
- प्रमुख वृक्ष-झाड़ियां — खेजड़ी, रोहिड़ा, बेर, कैर, बबूल, फोग, आक, थोर, कुमट।
- पत्तियां छोटी व कांटेदार, जड़ें गहरी — जल की कमी के अनुकूल।
उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन
राज्य में सर्वाधिक विस्तार वाले वन · 50-100 सेमी वर्षा
गर्मियों में पत्तियां गिरा देने वाले ये वन अरावली व हाड़ौती क्षेत्र में फैले हैं। इनके कई उप-प्रकार हैं —
| उप-प्रकार | क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| शुष्क सागवान वन | बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, दक्षिणी उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बारां | सागवान (टीक) — इमारती लकड़ी; सर्वाधिक बांसवाड़ा में |
| सालर वन | उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सिरोही, अजमेर | सालर की लकड़ी — पैकिंग के डिब्बे व प्लाईवुड |
| धोकड़ा वन | अरावली — अजमेर, अलवर, जयपुर, सवाई माधोपुर, कोटा, उदयपुर | शुष्क पतझड़ वनों में सर्वाधिक विस्तार; धोकड़ा — कोयला बनाने में उपयोगी |
| बांस वन | बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बारां, कोटा, सिरोही | बांस को "आदिवासियों का हरा सोना" कहते हैं |
| पलाश (ढाक) वन | अलवर, अजमेर, उदयपुर, राजसमंद, सिरोही | पलाश को "जंगल की आग" कहते हैं; पत्तियों से पत्तल-दोने |
| मिश्रित पतझड़ वन | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, सिरोही | आम, खैर, तेंदू, गूलर, बहेड़ा, महुआ |
उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वन
केवल माउंट आबू (सिरोही) क्षेत्र
- राज्य के सबसे सघन व सदाबहार प्रकृति के वन; 150 सेमी के लगभग वर्षा व अधिक ऊंचाई के कारण।
- प्रमुख वृक्ष — आम, बांस, नीम, सागवान, जामुन, बेल व अनेक औषधीय पौधे।
- माउंट आबू में डिकलिप्टेरा आबूएंसिस नामक दुर्लभ पौधा केवल यहीं पाया जाता है।
राज्य वृक्ष व राज्य पुष्प
🌿 खेजड़ी — राज्य वृक्ष (1983)
वैज्ञानिक नाम Prosopis cineraria; "थार का कल्पवृक्ष", "राजस्थान का गौरव"। फलियां — सांगरी; पत्तियां — लूंग (पशु चारा)। सर्वाधिक — शेखावाटी क्षेत्र।
🌸 रोहिड़ा — राज्य पुष्प (1983)
वैज्ञानिक नाम Tecomella undulata; "मरुस्थल का सागवान", "मारवाड़ टीक"। केसरिया-पीले फूल; पश्चिमी राजस्थान में।
खेजड़ली बलिदान (1730 ई.)
विश्व का अनूठा वृक्ष संरक्षण आंदोलन · खेजड़ली (जोधपुर)
- जोधपुर के महाराजा अभयसिंह के समय महल निर्माण हेतु खेजड़ी वृक्ष काटने के आदेश का विरोध।
- अमृता देवी बिश्नोई के नेतृत्व में 363 लोगों ने वृक्षों से लिपटकर बलिदान दिया।
- तिथि — भाद्रपद शुक्ल दशमी; प्रतिवर्ष यहां वृक्ष मेला लगता है।
- राज्य सरकार वन व वन्यजीव संरक्षण हेतु अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार देती है।
- बिश्नोई संप्रदाय के प्रवर्तक जांभोजी ने 29 नियमों में वृक्ष व जीव रक्षा पर बल दिया।
मरुस्थल की प्रमुख घासें
| घास | विशेषता |
|---|---|
| सेवण (लीलोण) | सर्वाधिक पौष्टिक घास; जैसलमेर की लाठी सीरीज़ क्षेत्र में; गोडावण का आवास |
| धामण | दुधारू पशुओं के लिए उपयोगी |
| करड़, बुर, मुरट, मोडा धामण | मरुस्थलीय चारागाहों की घासें |
| खस | सुगंधित घास — इत्र व शरबत; भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक |
वनों से प्राप्त उपज
🍃 तेंदू पत्ता
बीड़ी बनाने में; "टिमरू" भी कहते हैं — उदयपुर, चित्तौड़गढ़, बारां, झालावाड़।
🌼 महुआ
आदिवासियों का कल्पवृक्ष; फूलों से शराब व फलों से तेल — डूंगरपुर, बांसवाड़ा।
🪵 खैर
कत्था बनाने में; कत्था बनाने वाली जाति — "कथौड़ी"।
🍯 गोंद
खेजड़ी, बबूल, कुमट, धोकड़ा से; सर्वाधिक कुमट से।
🌿 आंवल (आवरा)
छाल से चमड़ा रंगने (टैनिंग) में।
🍂 बांस
टोकरियां, फर्नीचर, घर निर्माण — "आदिवासियों का हरा सोना"।
वन नीति व संस्थान
- राजस्थान राज्य वन नीति 2010 — राज्य की प्रथम वन नीति; राज्य के 20% क्षेत्र पर वन व वृक्ष आवरण का लक्ष्य।
- शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) — जोधपुर।
- केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) — जोधपुर (1959)।
- वन महोत्सव — देश में 1950 से (के.एम. मुंशी द्वारा प्रारंभ); प्रतिवर्ष जुलाई में।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राज्य वृक्ष खेजड़ी व राज्य पुष्प रोहिड़ा — दोनों 1983। (2) सर्वाधिक वन — उदयपुर; न्यूनतम — चूरू। (3) खेजड़ली बलिदान — 1730, अमृता देवी, 363 लोग।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- वन आवरण — लगभग 4.87% (ISFR 2021); अभिलिखित वन — ~9.6%।
- सर्वाधिक वन — उदयपुर; न्यूनतम — चूरू।
- सर्वाधिक विस्तार वाले वन — उष्ण कटिबंधीय शुष्क पतझड़ वन।
- शुष्क पतझड़ वनों में सर्वाधिक — धोकड़ा।
- सागवान वन सर्वाधिक — बांसवाड़ा।
- पर्वतीय (उपोष्ण) वन — केवल माउंट आबू।
- राज्य वृक्ष — खेजड़ी (1983); राज्य पुष्प — रोहिड़ा (1983)।
- खेजड़ली बलिदान — 1730, अमृता देवी, 363 लोग।
- सर्वाधिक पौष्टिक घास — सेवण।
- राज्य की प्रथम वन नीति — 2010।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 राजस्थान का राज्य वृक्ष कौन-सा है?
2 "मरुस्थल का सागवान" किसे कहा जाता है?
3 राजस्थान में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला जिला कौन-सा है?
4 राजस्थान में सर्वाधिक विस्तार वाले वन कौन-से हैं?
5 उपोष्ण कटिबंधीय पर्वतीय वन राजस्थान में कहां पाए जाते हैं?
6 खेजड़ली बलिदान का नेतृत्व किसने किया?
7 खेजड़ली बलिदान में कितने लोगों ने बलिदान दिया?
8 सर्वाधिक पौष्टिक मरुस्थलीय घास कौन-सी है?
9 "आदिवासियों का हरा सोना" किसे कहा जाता है?
10 खेजड़ी की फलियों को क्या कहते हैं?