राजस्थान का चौहान वंश
चौहान राजस्थान के सबसे प्राचीन और व्यापक राजपूत वंशों में से एक हैं। इनका मूल केंद्र सांभर (शाकंभरी) था, जिसे "सपादलक्ष" कहा जाता था। चौहानों की कई शाखाओं ने अजमेर, रणथंभौर, जालोर, नाडोल, सिरोही, बूंदी और कोटा पर शासन किया।
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उत्पत्ति के मत
| मत | स्रोत / इतिहासकार |
|---|---|
| अग्निकुंड से उत्पत्ति (आबू पर्वत पर वशिष्ठ के यज्ञ से — चौहान, परमार, प्रतिहार, चालुक्य) | चंदबरदाई — पृथ्वीराज रासो |
| वत्स गोत्रीय ब्राह्मण | बिजोलिया शिलालेख (1170); डॉ. दशरथ शर्मा |
| सूर्यवंशी | पृथ्वीराज विजय (जयानक), हम्मीर महाकाव्य; गौरीशंकर ओझा |
| विदेशी (शक-सीथियन) | कर्नल जेम्स टॉड, वी.ए. स्मिथ |
| चंद्रवंशी | हांसी शिलालेख, अचलेश्वर मंदिर लेख |
शाकंभरी-अजमेर के चौहान
| शासक | प्रमुख उपलब्धियां |
|---|---|
| वासुदेव | 551 ई. में सांभर में चौहान वंश की स्थापना; राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर); सांभर झील के निर्माण की मान्यता |
| गूवक प्रथम | प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय का सामंत; हर्षनाथ मंदिर |
| वाक्पतिराज प्रथम | प्रतिहारों से स्वतंत्रता की दिशा में |
| विग्रहराज द्वितीय | चौहानों को स्वतंत्र शक्ति बनाया; गुजरात के मूलराज सोलंकी को हराया; हर्षनाथ शिलालेख (973) |
| अजयराज | 1113 ई. में अजमेर (अजयमेरु) बसाया; अजयमेरु दुर्ग (तारागढ़); रानी सोमलवती के नाम के सिक्के |
| अर्णोराज (आनाजी) | तुर्कों को हराकर अजमेर में आनासागर झील; पुष्कर में वराह मंदिर; गुजरात के कुमारपाल चालुक्य से पराजित |
विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) — 1153-1163
चौहानों का स्वर्णकाल · "कवि बांधव"
- तोमरों से दिल्ली जीतकर चौहान राज्य में मिलाया; तुर्कों को पराजित किया।
- स्वयं विद्वान — "हरिकेलि" नाटक लिखा; दरबारी कवि सोमदेव ने "ललित विग्रहराज" नाटक लिखा।
- अजमेर में संस्कृत पाठशाला बनवाई, जिसे बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने तोड़कर "ढाई दिन का झोपड़ा" बना दिया।
- बीसलसर झील व बीसलपुर नगर (टोंक) बसाया। नरपति नाल्ह का "बीसलदेव रासो" इन्हीं पर।
पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177-1192)
राय पिथौरा · दल पुंगल
- आरंभ में माता कर्पूरी देवी ने संरक्षिका के रूप में शासन संभाला।
- भंडानकों का दमन (1182); महोबा के चंदेल शासक परमर्दिदेव को हराया — आल्हा-ऊदल लड़ते हुए मारे गए।
- कन्नौज के जयचंद गहड़वाल की पुत्री संयोगिता से विवाह की कथा (पृथ्वीराज रासो)।
- तराइन प्रथम (1191) में मुहम्मद गौरी को हराया; तराइन द्वितीय (1192) में पराजित।
- दरबारी विद्वान — चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो), जयानक (पृथ्वीराज विजय), विद्यापति गौड़, वागीश्वर जनार्दन।
- बाद में भाई हरिराज ने अजमेर में संघर्ष जारी रखा; पुत्र गोविंदराज ने रणथंभौर में नई शाखा स्थापित की।
रणथंभौर के चौहान
हम्मीर देव चौहान (1282-1301)
"हम्मीर हठ" · शरणागत की रक्षा का प्रतीक
- रणथंभौर शाखा के संस्थापक — गोविंदराज (पृथ्वीराज तृतीय के पुत्र); अन्य शासक — वाग्भट्ट, जैत्रसिंह।
- हम्मीर ने 17 में से 16 युद्ध जीते (हम्मीर महाकाव्य); "कोटियजन" यज्ञ किया।
- जलालुद्दीन खिलजी (1290-91) रणथंभौर नहीं जीत सका और लौटते हुए बोला — "ऐसे दस किलों को मैं मुसलमान के एक बाल के बराबर भी नहीं समझता।"
- अलाउद्दीन के विद्रोही मंगोल सेनापति मुहम्मद शाह को शरण दी — यही युद्ध का कारण बना।
- 1299 में नुसरत खां मारा गया; 1301 में अलाउद्दीन ने स्वयं आक्रमण किया; सेनापति रतिपाल व रणमल के विश्वासघात से दुर्ग हारा।
- हम्मीर ने केसरिया किया; रानी रंगदेवी ने पद्मला तालाब में जल जौहर किया — राजस्थान का प्रथम साका।
- स्रोत — नयनचंद्र सूरि का "हम्मीर महाकाव्य", जोधराज का "हम्मीर रासो", अमीर खुसरो का "खज़ाइन-उल-फुतूह"।
जालोर व नाडोल के चौहान
जालोर के सोनगरा चौहान
संस्थापक कीर्तिपाल (1181) · स्वर्णगिरि (सोनगढ़)
- कीर्तिपाल ("कीतू") ने परमारों से जालोर जीता; नैणसी ने उन्हें "कीतू — एक महान राजा" कहा। जालोर की स्वर्णगिरि पहाड़ी के कारण यह शाखा "सोनगरा" कहलाई।
- अन्य शासक — समरसिंह, उदयसिंह (इल्तुतमिश का सफल प्रतिरोध), चाचिगदेव।
- कान्हड़देव ने 1298 में अलाउद्दीन की सेना को गुजरात (सोमनाथ) जाने के लिए रास्ता नहीं दिया और लौटती सेना से सोमनाथ की मूर्ति के टुकड़े छीने।
- 1308 में सिवाणा (सातलदेव) और 1311-12 में जालोर का साका; बीका दहिया के विश्वासघात से दुर्ग हारा; कान्हड़देव व पुत्र वीरमदेव वीरगति को प्राप्त हुए।
- लोककथा — अलाउद्दीन की पुत्री फिरोज़ा का वीरमदेव से प्रेम; पद्मनाभ का "कान्हड़दे प्रबंध" व "वीरमदेव सोनगरा री वात"।
🏛️ नाडोल के चौहान
संस्थापक लक्ष्मण (लाखणसी) — 960 ई. के आसपास; कुलदेवी आशापुरा माता (नाडोल, पाली)। जालोर के सोनगरा इसी शाखा से निकले।
🗻 सिरोही के देवड़ा चौहान
देवड़ा शाखा; सहसमल ने 1425 में सिरोही नगर बसाया। राव सुरताण ने दत्ताणी युद्ध (1583) में अकबर की सेना को हराया।
हाड़ा चौहान (बूंदी व कोटा)
| शासक | रियासत | प्रमुख घटनाएं |
|---|---|---|
| देवा हाड़ा | बूंदी | 1241 में मीणाओं से बूंदी जीतकर हाड़ा राज्य की स्थापना |
| बरसिंह | बूंदी | 1354 में तारागढ़ दुर्ग |
| सुर्जन हाड़ा | बूंदी | 1569 में रणथंभौर की संधि से अकबर की अधीनता; शर्तें — बूंदी के राजा डोला (विवाह संबंध) नहीं भेजेंगे, सिजदा नहीं करेंगे आदि |
| राव रतनसिंह | बूंदी | जहांगीर के समय; पुत्र माधोसिंह को कोटा मिला |
| माधोसिंह | कोटा | 1631 में शाहजहां ने कोटा को बूंदी से अलग कर स्वतंत्र रियासत बनाया |
| उम्मेदसिंह | बूंदी | चित्रशाला; बूंदी चित्रकला का स्वर्णकाल |
| विष्णुसिंह | बूंदी | 1818 में अंग्रेज़ों से संधि; 1822 में सती प्रथा पर रोक (राजस्थान में प्रथम) |
| झाला ज़ालिमसिंह | कोटा | कोटा के फौजदार/संरक्षक; उनके वंशज मदनसिंह को 1838 में झालावाड़ रियासत दी गई |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) प्रारंभिक राजधानी — शाकंभरी (सांभर); संस्थापक — वासुदेव। (2) अजमेर की स्थापना — अजयराज (1113); आनासागर — अर्णोराज। (3) तराइन का प्रथम युद्ध (1191) — पृथ्वीराज विजयी; द्वितीय (1192) — पराजित।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- अग्निकुंड से उत्पत्ति — चंदबरदाई (पृथ्वीराज रासो); वत्स गोत्रीय ब्राह्मण — बिजोलिया शिलालेख।
- चौहान वंश के संस्थापक — वासुदेव (551, सांभर)।
- अजमेर — अजयराज (1113); आनासागर — अर्णोराज।
- "हरिकेलि", ढाई दिन का झोपड़ा, बीसलसर — विग्रहराज चतुर्थ।
- पृथ्वीराज तृतीय की संरक्षिका — माता कर्पूरी देवी; मंत्री — कदंबवास।
- "पृथ्वीराज विजय" — जयानक।
- रणथंभौर शाखा के संस्थापक — गोविंदराज; प्रथम साका — 1301, हम्मीर।
- हम्मीर के विश्वासघाती सेनापति — रतिपाल व रणमल।
- जालोर शाखा — कीर्तिपाल (कीतू); जालोर का विश्वासघाती — बीका दहिया।
- नाडोल शाखा — लक्ष्मण; कुलदेवी आशापुरा।
- बूंदी — देवा हाड़ा (1241); कोटा — माधोसिंह (1631)।
- रणथंभौर की संधि (1569) — सुर्जन हाड़ा व अकबर।
- “कवि बांधव”, हरकेलि नाटक — विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव)।
- ढाई दिन का झोपड़ा — मूलतः बीसलदेव की संस्कृत पाठशाला।
- “राय पिथौरा”, “दल पुंगल” — पृथ्वीराज तृतीय।
- रणथंभौर का प्रथम साका — हम्मीर, 1301 (रानी रंगदेवी का जौहर)।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 किस शिलालेख में चौहानों को वत्स गोत्रीय ब्राह्मण बताया गया है?
2 चौहान वंश के संस्थापक कौन थे?
3 आनासागर झील का निर्माण किसने करवाया?
4 "हरिकेलि" नाटक किस चौहान शासक ने लिखा?
5 पृथ्वीराज तृतीय की माता कौन थीं?
6 रणथंभौर शाखा की स्थापना किसने की?
7 हम्मीर ने किस विद्रोही सेनापति को शरण दी थी?
8 जालोर के सोनगरा चौहान वंश के संस्थापक कौन थे?
9 रणथंभौर की संधि (1569) किनके बीच हुई?
10 कोटा रियासत की स्थापना किस वर्ष हुई?