मेवाड़ का गुहिल-सिसोदिया वंश

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मेवाड़ का गुहिल वंश विश्व के सबसे लंबे समय तक एक ही क्षेत्र पर शासन करने वाले राजवंशों में गिना जाता है — 566 ई. से 1949 तक लगभग 1400 वर्ष। इस वंश ने कभी मुगलों के सामने पूर्ण समर्पण नहीं किया और बप्पा रावल, कुंभा, सांगा, प्रताप जैसे महान शासक दिए। मेवाड़ के शासक स्वयं को एकलिंगजी का दीवान मानते थे।

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566 ई.
गुहादित्य द्वारा स्थापना
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एकलिंगजी
कुल देवता (राजा = दीवान)
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4
राजधानियां: नागदा, चित्तौड़, उदयपुर, चावंड
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बाण माता
कुलदेवी
📑 विषय सूची 11 टॉपिक

उत्पत्ति एवं शाखाएं

रावल शाखा

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बप्पा रावल (कालभोज)

मेवाड़ राज्य का वास्तविक संस्थापक · 734-753 ई.

अति महत्वपूर्ण
  • मूल नाम कालभोज; हारीत ऋषि के शिष्य, जिनके आशीर्वाद से राज्य मिला।
  • 734 ई. में मौर्य शासक मान मोरी से चित्तौड़ जीता।
  • अरब आक्रमणों को रोकने में योगदान; कैलाशपुरी में एकलिंगजी मंदिर बनवाया।
  • बप्पा रावल के सोने के सिक्के (115 ग्रेन) अजमेर से मिले।
  • रणकपुर प्रशस्ति (1439) में बप्पा और कालभोज को अलग-अलग व्यक्ति बताया गया है।

🐗 अल्लट (आलू रावल)

10वीं सदी; आहड़ को दूसरी राजधानी बनाया; आहड़ में वराह मंदिर; मेवाड़ में नौकरशाही (अधिकारी तंत्र) की शुरुआत; हूण राजकुमारी हरियादेवी से विवाह।

⚔️ जैत्रसिंह (1213-1250)

भूताला के युद्ध (1227) में दिल्ली सुल्तान इल्तुतमिश को हराया। इल्तुतमिश द्वारा नागदा नष्ट किए जाने के बाद चित्तौड़ को राजधानी बनाया। इनके काल को मेवाड़ का स्वर्णकाल माना जाता है।

🪷 रावल रतनसिंह (1302-03)

1303 में अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण; रानी पद्मिनी का जौहर; गोरा-बादल की वीरता; चित्तौड़ का नाम "खिज्राबाद"। मलिक मुहम्मद जायसी ने 1540 में "पद्मावत" लिखा। रतनसिंह के साथ रावल शाखा समाप्त।

राणा (सिसोदिया) शाखा

शासककालप्रमुख घटनाएं / उपलब्धियां
हम्मीर1326-64सिसोदा गांव के; खिलजी के सामंत मालदेव सोनगरा से चित्तौड़ पुनः जीता; सिंगोली युद्ध में मुहम्मद बिन तुगलक को हराया; "मेवाड़ का उद्धारक", "विषम घाटी पंचानन"; बरवड़ी (अन्नपूर्णा) माता का मंदिर
क्षेत्रसिंह (खेता)1364-82मालवा के अमीशाह को हराया
लाखा1382-1421जावर में चांदी की खान; छीतू बंजारे द्वारा पिछोला झील; मारवाड़ की हंसाबाई से विवाह — शर्त कि उसका पुत्र राजा बनेगा; बड़े पुत्र चूंडा ने राज्याधिकार त्यागा — "मेवाड़ का भीष्म"
मोकल1421-33समिद्धेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार; श्रृंगी ऋषि शिलालेख; चाचा व मेरा ने हत्या की
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महाराणा कुंभा (1433-1468)

स्थापत्य कला का जनक · हिंदू सुरताण · अभिनव भरताचार्य

अति महत्वपूर्ण
पिता / मातामोकल / सौभाग्यदेवी
प्रमुख विजयसारंगपुर (1437)
दुर्ग84 में से 32 बनवाए
मृत्यु1468, पुत्र ऊदा द्वारा हत्या
  • आरंभ में मारवाड़ के रणमल का प्रभाव रहा; 1438 में रणमल की हत्या हुई। बाद में कुंभा और राव जोधा के बीच "आवल-बावल की संधि" से मेवाड़-मारवाड़ की सीमा तय हुई।
  • सारंगपुर युद्ध (1437) में मालवा के महमूद खिलजी को हराया; इसकी याद में विजय स्तंभ (1440-48)।
  • 1456 में मालवा व गुजरात ने कुंभा के विरुद्ध चंपानेर की संधि की, पर कुंभा ने दोनों को परास्त किया।
  • दुर्ग — कुंभलगढ़ (शिल्पी मंडन), अचलगढ़ (पुनर्निर्माण), बसंतगढ़, मचान दुर्ग आदि।
  • ग्रंथ — संगीतराज, संगीत मीमांसा, सूड़ प्रबंध; गीत गोविंद पर "रसिकप्रिया" टीका। दरबार में मंडन, कान्ह व्यास, अत्रि-महेश भट्ट।
  • उपाधियां — महाराजाधिराज, हिंदू सुरताण, अभिनव भरताचार्य, हाल गुरु, छाप गुरु, राणो रासो।
  • कुंभलगढ़ में मामादेव कुंड पर पुत्र ऊदा ने हत्या की।

🗡️ ऊदा (उदयकरण)

पितृहंता होने के कारण मेवाड़ के सामंतों ने इसे स्वीकार नहीं किया; "हत्यारा" कहलाया।

🏹 रायमल (1473-1509)

पुत्र — पृथ्वीराज ("उड़णा राजकुमार"), जयमल, संग्रामसिंह (सांगा)। उत्तराधिकार संघर्ष में सांगा की एक आंख चली गई।

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राणा सांगा (संग्रामसिंह, 1509-1528)

हिंदूपत · अंतिम हिंदू शासक जिसने संगठित राजपूत शक्ति का नेतृत्व किया

अति महत्वपूर्ण
  • युद्धों में एक आंख, एक हाथ खोया, एक पैर से लंगड़े हुए और शरीर पर 80 घाव थे — "सैनिकों का भग्नावशेष"।
  • विजय — खातोली (1517) व बाड़ी (1518) में इब्राहिम लोदी; गागरोन (1519) में महमूद खिलजी द्वितीय (उसे बंदी बनाकर बाद में मुक्त किया); बयाना (16 फरवरी 1527) में बाबर की सेना।
  • खानवा (17 मार्च 1527) में बाबर से पराजय; युद्ध से पहले "पाती परवन" परंपरा से राजपूत राजाओं को आमंत्रित किया।
  • बाबर ने अपनी आत्मकथा में सांगा को भारत के सबसे शक्तिशाली शासकों में गिना।
  • 30 जनवरी 1528 को कालपी में अपने ही सामंतों द्वारा विष दिए जाने से मृत्यु; छतरी मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में।
शासककालप्रमुख घटनाएं
रतनसिंह द्वितीय1528-31बूंदी के सूरजमल हाड़ा से संघर्ष में दोनों की मृत्यु
विक्रमादित्य1531-36गुजरात के बहादुर शाह का आक्रमण — चित्तौड़ का दूसरा साका (1534-35); रानी कर्णावती का जौहर; बनवीर ने विक्रमादित्य की हत्या की
बनवीर1536-40दासी पुत्र; उदयसिंह को मारने का प्रयास — पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन का बलिदान दिया
उदयसिंह1540-72कुंभलगढ़ में राज्याभिषेक; 1559 में उदयपुर बसाया, उदयसागर झील; अकबर का चित्तौड़ आक्रमण — तीसरा साका (1567-68), जयमल-पत्ता; गोगुंदा में मृत्यु
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महाराणा प्रताप (1572-1597)

स्वतंत्रता के अमर प्रतीक · बचपन का नाम "कीका"

अति महत्वपूर्ण
जन्म9 मई 1540, कुंभलगढ़
माताजयवंताबाई
राज्याभिषेक28 फरवरी 1572, गोगुंदा
घोड़ाचेतक
राजधानीचावंड (1585 से)
मृत्यु19 जनवरी 1597, चावंड
  • उदयसिंह ने छोटे पुत्र जगमाल को उत्तराधिकारी बनाया था, पर सामंतों ने प्रताप को राणा बनाया।
  • अकबर ने अधीनता के लिए चार दूत भेजे — जलाल खां कोरची (1572), मानसिंह (1573), भगवंतदास (1573), टोडरमल (1573)।
  • हल्दीघाटी (18 जून 1576) — मुगल सेनापति मानसिंह; झाला मान का बलिदान; चेतक ने प्राण दिए।
  • 1578 में मुगल सेनापति शाहबाज़ खां ने कुंभलगढ़ जीता; भामाशाह ने आर्थिक सहायता दी।
  • दिवेर (1582) — "मेवाड़ का मैराथन"; इसके बाद चित्तौड़ व मांडलगढ़ को छोड़कर अधिकांश मेवाड़ वापस जीत लिया।
  • छतरी — बांडोली (सलूंबर), 8 खंभों वाली।

उत्तरकालीन शासक

शासककालप्रमुख घटनाएं / उपलब्धियां
अमरसिंह प्रथम1597-16201615 में मुगल-मेवाड़ संधि (जहांगीर, शाहज़ादा खुर्रम) — शर्तें: राणा स्वयं मुगल दरबार में नहीं जाएगा; युवराज कर्णसिंह दरबार में रहेगा; चित्तौड़ की मरम्मत नहीं होगी। चावंड में रागमाला (निसारदीन, 1605)
कर्णसिंह1620-28जग मंदिर का निर्माण आरंभ; विद्रोही शाहज़ादा खुर्रम को शरण
जगतसिंह प्रथम1628-52जगदीश (जगन्नाथराय) मंदिर (1652); चित्रकला का स्वर्णकाल — "चितेरों की ओवरी"
राजसिंह1652-80अकाल राहत हेतु राजसमंद झील व राजप्रशस्ति; किशनगढ़ की चारुमती से विवाह (औरंगजेब से टकराव); जज़िया का विरोध; श्रीनाथजी (सिहाड़) व द्वारकाधीश (कांकरोली) की प्रतिमाएं स्थापित; दुर्गादास राठौड़ की सहायता
जयसिंह1680-98जयसमंद (ढेबर) झील का निर्माण
संग्रामसिंह द्वितीय1710-34सहेलियों की बाड़ी; वैद्यनाथ मंदिर
जगतसिंह द्वितीय1734-51हुरड़ा सम्मेलन (17 जुलाई 1734) की अध्यक्षता — मराठों के विरुद्ध राजपूत एकता का प्रयास; जग निवास (लेक पैलेस)
भीमसिंह1778-1828पुत्री कृष्णा कुमारी को लेकर जयपुर-जोधपुर विवाद; 1810 में कृष्णा कुमारी को विष दिया गया; 1818 में अंग्रेज़ों से संधि
स्वरूपसिंह1842-61डाकन प्रथा पर रोक (1853); 1857 में अंग्रेज़ों का साथ; स्वरूपशाही सिक्के
सज्जनसिंह1874-84सज्जनगढ़ (मानसून पैलेस); श्यामलदास का "वीर विनोद"; देश हितैषिणी सभा (1877)
फतहसिंह1884-19301903 के दिल्ली दरबार में भाग नहीं लिया (केसरीसिंह बारहठ के "चेतावणी रा चूंगट्या"); बिजौलिया आंदोलन का काल
भूपालसिंह1930-55संयुक्त राजस्थान के राजप्रमुख; वृहत् राजस्थान के महाराजप्रमुख (1949)

मेवाड़ के साके

साकावर्षआक्रमणकारीकेसरिया / जौहर
चित्तौड़ का प्रथम1303अलाउद्दीन खिलजीरावल रतनसिंह / रानी पद्मिनी
चित्तौड़ का द्वितीय1534-35बहादुर शाह (गुजरात)बाघसिंह / रानी कर्णावती
चित्तौड़ का तृतीय1567-68अकबरजयमल-पत्ता / फूलकंवर

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) गुहिल वंश के संस्थापक — गुहादित्य (566 ई.); बप्पा रावल का मूल नाम — कालभोज। (2) खानवा (17 मार्च 1527) में सांगा बाबर से हारे, पर उससे पहले बयाना में जीते थे। (3) हल्दीघाटी — 18 जून 1576; मुगल सेनापति — मानसिंह; दिवेर (1582) — “मेवाड़ का मैराथन”।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. गुहिल वंश के संस्थापक — गुहादित्य (566 ई.); वास्तविक संस्थापक — बप्पा रावल।
  2. बप्पा रावल के गुरु — हारीत ऋषि; चित्तौड़ विजय — 734 ई.।
  3. भूताला युद्ध (1227) — जैत्रसिंह vs इल्तुतमिश।
  4. "पद्मावत" (1540) — मलिक मुहम्मद जायसी।
  5. "मेवाड़ का उद्धारक" — हम्मीर; "मेवाड़ का भीष्म" — चूंडा।
  6. चंपानेर की संधि (1456) — मालवा + गुजरात, कुंभा के विरुद्ध।
  7. "उड़णा राजकुमार" — पृथ्वीराज (रायमल का पुत्र)।
  8. सांगा की मृत्यु — 30 जनवरी 1528, कालपी; छतरी — मांडलगढ़।
  9. अकबर के चार दूत — जलाल खां, मानसिंह, भगवंतदास, टोडरमल।
  10. मुगल-मेवाड़ संधि — 1615, अमरसिंह प्रथम।
  11. हुरड़ा सम्मेलन (1734) की अध्यक्षता — जगतसिंह द्वितीय।
  12. कृष्णा कुमारी विवाद — भीमसिंह के समय; अंग्रेज़ों से संधि — 1818।
  13. विजय स्तंभ — कुंभा (सारंगपुर में मालवा पर विजय, 1437)।
  14. कुंभलगढ़ दुर्ग के वास्तुकार — मंडन।
  15. मेवाड़-मुगल संधि — 1615, अमरसिंह व जहांगीर।
  16. उदयपुर की स्थापना — उदयसिंह (1559)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 बप्पा रावल का मूल नाम क्या था?

2 भूताला युद्ध में किस मेवाड़ शासक ने इल्तुतमिश को हराया?

3 "मेवाड़ का भीष्म" किसे कहा जाता है?

4 चंपानेर की संधि किसके विरुद्ध हुई?

5 "उड़णा राजकुमार" किसे कहा गया?

6 राणा सांगा की मृत्यु कहां हुई?

7 उदयपुर नगर की स्थापना कब हुई?

8 महाराणा प्रताप के पास अकबर का पहला दूत कौन था?

9 मुगल-मेवाड़ संधि (1615) किस महाराणा ने की?

10 हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता किसने की?

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