राजस्थान की जनजातियां
राजस्थान की जनजातियां मुख्यतः अरावली के दक्षिणी और पूर्वी भागों में निवास करती हैं। इनकी अपनी विशिष्ट संस्कृति, बोली, वेशभूषा, लोक नृत्य और सामाजिक व्यवस्था है। जनसंख्या की दृष्टि से मीणा और भील राज्य की सबसे बड़ी जनजातियां हैं।
📑 विषय सूची 10 टॉपिक
जनगणना 2011 — प्रमुख आंकड़े
प्रमुख जनजातियां
मीणा
राज्य की सबसे बड़ी जनजाति · मत्स्य से उत्पत्ति की मान्यता
- मीणा स्वयं को मत्स्य (मीन) भगवान का वंशज मानते हैं। कछवाहों से पहले ढूंढाड़ (आमेर क्षेत्र) पर मीणाओं का शासन था।
- खेती करने वाले "जमींदार मीणा" और पहले राज्यों में चौकीदारी करने वाले "चौकीदार मीणा" कहलाते हैं।
- मीणा गांव का मुखिया "पटेल" कहलाता है; विवाद पंचायत द्वारा सुलझाए जाते हैं।
- भूरिया बाबा मीणा जनजाति के इष्टदेव माने जाते हैं।
भील
राज्य की प्राचीनतम जनजाति · "वनपुत्र"
- कर्नल जेम्स टॉड ने भीलों को "वनपुत्र" कहा। मेवाड़ के राजचिह्न में एक ओर राजपूत और दूसरी ओर भील योद्धा अंकित है।
- पहाड़ी ढलानों पर वन जलाकर की जाने वाली खेती "चिमाता" और मैदानी भाग में "दजिया" कहलाती है (वालरा / झूमिंग)।
- विवाह के समय घर की दीवार पर बनाई जाने वाली देवी "भराड़ी" कहलाती है। संकट के समय युद्ध का संकेत — "फाइरे-फाइरे"।
- भीलों का प्रसिद्ध नृत्य-नाट्य गवरी; अन्य नृत्य — घूमरा, नेजा, हाथीमना, युद्ध नृत्य।
- 1841 में खेरवाड़ा में मेवाड़ भील कोर का गठन हुआ। भीलों में सुधार हेतु गोविंद गुरु (भगत आंदोलन, मानगढ़) और मोतीलाल तेजावत (एकी आंदोलन) ने कार्य किया।
गरासिया
तीसरी बड़ी जनजाति · सिरोही-उदयपुर क्षेत्र
- विवाह के प्रकार — मोर बंधिया (हिंदू रीति से, सबसे प्रचलित), पहरावना (नाममात्र फेरे), ताणना (वधू मूल्य देकर)।
- अनाज रखने की कोठी "सोहरी"; मृत्यु स्मारक "हुरे"।
- सामूहिक कृषि व सहयोग की परंपरा "हारी-भावरी"।
- प्रमुख नृत्य — वालर, लूर, कूद, मांदल; मनखारो मेला (सियावा, सिरोही) प्रसिद्ध।
सहरिया
राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति (PVTG)
- भारत सरकार द्वारा "विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूह" (PVTG) घोषित — राजस्थान में एकमात्र।
- राज्य की जनजातियों में सबसे पिछड़ी व सबसे कम साक्षरता वाली।
- सहरियों की सामुदायिक बैठक का स्थान "बंगला"; पेड़ पर बनी मचाननुमा झोपड़ी "टोपा"।
- सीताबाड़ी मेला (ज्येष्ठ अमावस्या) — "सहरियों का कुंभ"। प्रमुख नृत्य — शिकारी, लहंगी।
💎 डामोर
क्षेत्र — डूंगरपुर (सीमलवाड़ा), बांसवाड़ा; गुजरात से आए माने जाते हैं। मुखिया "मुखी"। पुरुष भी महिलाओं की तरह आभूषण पहनते हैं। होली पर "चाड़िया" उत्सव; छैला बावजी का मेला (पंचमहल, गुजरात) प्रसिद्ध।
🌳 कथौड़ी
क्षेत्र — उदयपुर (कोटड़ा, झाड़ोल); मूल रूप से महाराष्ट्र से कत्था बनाने के लिए लाए गए। घर "खोलरा"। नृत्य — मावलिया, होली। वाद्य — तारपी, पावरी, थालीसर।
🏞️ अन्य अनुसूचित जनजातियां
भील मीणा, धानका, कोकना, कोली ढोर, नायकड़ा, पटेलिया, सेहरिया आदि — राज्य में कुल 12 अधिसूचित जनजातियां।
जनजातीय शब्दावली
| शब्द | अर्थ | जनजाति |
|---|---|---|
| पाल / फला | बड़ा गांव / छोटा गांव | भील |
| पालवी / गमेती | पाल का मुखिया / सभी पालों का मुखिया | भील |
| कू / टापरा | घर | भील |
| भराड़ी | विवाह पर दीवार पर बनाई जाने वाली देवी | भील |
| सहलोत | मुखिया | गरासिया |
| घेर / सोहरी | घर / अनाज की कोठी | गरासिया |
| सहराना / कोतवाल | बस्ती / मुखिया | सहरिया |
| मुखी | मुखिया | डामोर |
| खोलरा | घर | कथौड़ी |
| पटेल | मुखिया | मीणा |
जनजाति विकास एवं संस्थान
🏛️ जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग
मुख्यालय उदयपुर; जनजातीय उपयोजना (TSP) क्षेत्र के विकास कार्य।
📚 माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान
उदयपुर (1964) — जनजातियों पर शोध व प्रशिक्षण।
🗺️ अनुसूचित क्षेत्र
संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत; बांसवाड़ा, डूंगरपुर व प्रतापगढ़ पूर्णतः तथा उदयपुर, सलूंबर, सिरोही, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली आदि के कुछ भाग शामिल।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) सर्वाधिक जनसंख्या वाली जनजाति — मीणा; दूसरी — भील। (2) सहरिया — राज्य की एकमात्र आदिम (PVTG) जनजाति; बारां (शाहबाद, किशनगंज)। (3) गरासिया — सिरोही (आबू रोड, पिंडवाड़ा); डामोर — डूंगरपुर (सीमलवाड़ा)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- राज्य की सबसे बड़ी जनजाति — मीणा; दूसरी — भील।
- एकमात्र आदिम जनजाति (PVTG) — सहरिया (बारां)।
- ST जनसंख्या (2011) — 92.38 लाख, 13.48%।
- सर्वाधिक ST प्रतिशत — बांसवाड़ा; सर्वाधिक संख्या — उदयपुर; न्यूनतम — बीकानेर।
- "वनपुत्र" — भील (कर्नल टॉड)।
- भीलों के गांव का मुखिया — पालवी / गमेती।
- गरासियों का सबसे प्रचलित विवाह — मोर बंधिया; मुखिया — सहलोत।
- "सहरियों का कुंभ" — सीताबाड़ी।
- कत्था बनाने हेतु महाराष्ट्र से लाई गई जनजाति — कथौड़ी।
- पुरुष भी आभूषण पहनते हैं — डामोर।
- मेवाड़ भील कोर — खेरवाड़ा (1841)।
- भीलों का घर — “कू”; छोटा गांव — “फला”; बड़ा गांव — “पाल”।
- सहरियों की बस्ती — “सहराना”; घर — “टापरी”।
- भील देवी-देवता व सामाजिक मुखिया — “गमेती” (पाल का मुखिया)।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 जनसंख्या की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी जनजाति कौनसी है?
2 राजस्थान की एकमात्र आदिम जनजाति (PVTG) कौनसी है?
3 कर्नल टॉड ने किस जनजाति को "वनपुत्र" कहा?
4 भीलों के गांव के मुखिया को क्या कहते हैं?
5 गरासियों में सबसे प्रचलित विवाह कौनसा है?
6 सहरिया जनजाति मुख्यतः किस जिले में निवास करती है?
7 जनगणना 2011 के अनुसार सर्वाधिक ST प्रतिशत वाला जिला कौनसा है?
8 कथौड़ी जनजाति को मूल रूप से कहां से लाया गया था?
9 किस जनजाति के पुरुष भी आभूषण पहनते हैं?
10 मेवाड़ भील कोर का गठन कहां हुआ?