राजस्थान के रीति-रिवाज एवं प्रथाएं

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राजस्थान का सामाजिक जीवन जन्म से मृत्यु तक अनेक रीति-रिवाजों और संस्कारों से जुड़ा है। ये रीतियां परिवार और समाज को जोड़ने का काम करती हैं। साथ ही यहां सती, डाकन, कन्या वध जैसी कुप्रथाएं भी रहीं, जिन्हें 19वीं सदी से कानून और समाज सुधार के माध्यम से समाप्त किया गया।

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जन्म
जलवा पूजन, जड़ूला
💍
विवाह
मायरा, तोरण, हथलेवा
🕯️
मृत्यु
बैकुंठी, मोसर
⚖️
1822
बूंदी — सती प्रथा पर पहली रोक
📑 विषय सूची 9 टॉपिक

जन्म संबंधी रीति-रिवाज

रिवाजविवरण
आठवां पूजनगर्भावस्था के सातवें माह पूर्ण होने पर गर्भवती स्त्री का पूजन व भोज
जामणा / छूछकशिशु जन्म पर ननिहाल (पीहर) से भेजे जाने वाले वस्त्र, आभूषण व उपहार; पीला पोमचा
जलवा पूजन (कुआं पूजन)प्रसव के कुछ दिन बाद माता द्वारा पनघट/कुएं की पूजा, पहली बार पानी लाना
नामकरणशिशु का नाम रखना
जड़ूला (मुंडन)बच्चे के पहली बार बाल उतारना; प्रायः लोक देवता के थान पर
ढूंढशिशु के जन्म के बाद पहली होली पर ननिहाल से उपहार और "ढूंढना" रस्म

विवाह संबंधी रीति-रिवाज

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विवाह की रस्में — क्रम से

सगाई से मुकलावे तक

अति महत्वपूर्ण
1. सगाई (सगपण)वर-वधू के संबंध की पक्की बात
2. टीकावधू पक्ष द्वारा वर को तिलक
3. लगन पत्रिकाविवाह की तिथि लिखकर वर पक्ष को भेजना
4. बान बैठना / पीठीहल्दी-उबटन की रस्म
5. बत्तीसी नूतनावर/वधू की माता अपने पीहर वालों को मायरे के लिए न्योता देती है
6. मायरा (भात)ननिहाल पक्ष द्वारा वस्त्र-आभूषण आदि भेंट
7. बिंदोरी / निकासीवर-वधू की शोभायात्रा
8. सामेलावधू पक्ष द्वारा बारात का स्वागत
9. तोरण मारनावर द्वारा वधू के घर के द्वार पर लगे तोरण को छड़ी/तलवार से छूना
10. हथलेवा (पाणिग्रहण)वर-वधू का हाथ मिलाना
11. फेरेअग्नि के सात फेरे
12. कांकण डोरड़ावर-वधू के हाथ में बंधा धागा खोलना
13. जुआ-जुईविवाह के बाद वर-वधू के बीच अंगूठी ढूंढने का खेल
14. बढ़ारविवाह के दूसरे दिन का बड़ा भोज
15. मुकलावा (गौना)बाल विवाह में बाद में वधू को ससुराल भेजना

💰 ओझण (दहेज)

विवाह के समय वधू पक्ष द्वारा दिया जाने वाला सामान। दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 से दंडनीय।

🪢 डावरिया प्रथा

सामंत वर्ग में विवाह के समय वधू के साथ दासियां (डावरियां) भेजने की प्रथा।

🔁 नाता प्रथा

कुछ जातियों में पत्नी द्वारा पति को छोड़कर दूसरे पुरुष के साथ रहने की प्रथा; पूर्व पति को दी जाने वाली राशि "झगड़ा" कहलाती है।

👰 सामूहिक विवाह

आखा तीज पर बड़ी संख्या में विवाह ("अबूझ सावा"); राज्य सरकार सामूहिक विवाह को प्रोत्साहन देती है।

मृत्यु संबंधी रीति-रिवाज

रिवाजविवरण
बैकुंठीशव को श्मशान ले जाने के लिए बांस की अर्थी
आधेटाघर और श्मशान के बीच, जहां अर्थी की दिशा बदली जाती है
बखेरअर्थी पर से पैसे/अनाज उछालना
फूल चुननातीसरे दिन अस्थियां एकत्र करना (हरिद्वार/पुष्कर में प्रवाहित)
सांतरवाड़ामृत्यु के बाद 12 दिन तक रिश्तेदारों का संवेदना हेतु आना
पगड़ी रस्मबारहवें दिन मृतक के बड़े पुत्र को पगड़ी बांधकर घर का मुखिया बनाना
मोसर (नुक्ता / औसर)मृत्यु भोज; राजस्थान मृत्यु भोज निवारण अधिनियम 1960 से प्रतिबंधित
भदरशोक में सिर व दाढ़ी-मूंछ के बाल मुंडवाना

कुप्रथाएं एवं उन पर रोक

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सती प्रथा

पति की मृत्यु पर पत्नी का चिता पर जलना

अति महत्वपूर्ण
  • राजस्थान में सर्वप्रथम बूंदी राज्य में 1822 ई. में (महाराव विष्णुसिंह) सती प्रथा पर रोक लगी।
  • लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1829 में (राजा राममोहन राय के प्रयासों से) ब्रिटिश भारत में इसे अवैध घोषित किया।
  • 1987 में देवराला (सीकर) में रूप कंवर सती कांड के बाद राजस्थान सती (निवारण) अधिनियम 1987 बना, जिसमें सती का महिमामंडन भी अपराध है।
  • पति के साथ नहीं, बाद में उसकी किसी वस्तु के साथ जलने को "अनुमरण" तथा साथ जलने को "सहमरण" कहते थे।
कुप्रथाविवरणरोक (प्रथम)
सती प्रथाविधवा का पति की चिता पर जलनाबूंदी, 1822
कन्या वधजन्म के समय कन्या को मार देनाकोटा, 1833
त्याग प्रथाविवाह पर चारण-भाटों द्वारा मनमानी दान राशि ("त्याग") की मांगजोधपुर, 1841 (महाराजा मानसिंह)
समाधि प्रथासाधुओं द्वारा जीवित समाधि लेनाजयपुर, 1844
डाकन प्रथास्त्रियों को डायन बताकर प्रताड़ित करना/मारना (विशेषकर भील-मीणा क्षेत्र)उदयपुर, 1853 (महाराणा स्वरूपसिंह)
बाल विवाहकम आयु में विवाहशारदा अधिनियम 1929 (हरविलास शारदा, अजमेर)
दास प्रथादास-दासियों की खरीद-बिक्री1832 में हाड़ौती व 1847 में जयपुर में रोक
बेगार प्रथाबिना पारिश्रमिक के काम करवानास्वतंत्रता के बाद पूर्णतः समाप्त
💡 बाल विवाह: हरविलास शारदा (अजमेर) के प्रयासों से बाल विवाह निरोधक अधिनियम (शारदा एक्ट) 1929 बना, जिसमें लड़कों की विवाह आयु 18 व लड़कियों की 14 वर्ष तय हुई। वर्तमान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 लागू है (लड़कियां 18, लड़के 21 वर्ष)।

समाज सुधार संस्थाएं

🕉️ वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा

1889 में AGG वाल्टर के प्रयासों से; विवाह खर्च सीमित करना, बाल विवाह रोकना (लड़के 18, लड़की 14 वर्ष)।

📿 आर्य समाज

स्वामी दयानंद सरस्वती ने राजस्थान में समाज सुधार का प्रचार किया; परोपकारिणी सभा (अजमेर, 1883) की स्थापना। उदयपुर में "सत्यार्थ प्रकाश" लिखा।

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) सती प्रथा पर प्रथम रोक — बूंदी (1822)। (2) डाकन प्रथा पर प्रथम रोक — उदयपुर (1853)। (3) बाल विवाह निरोधक (शारदा) अधिनियम — 1929, हरविलास शारदा (अजमेर)।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. सती प्रथा पर सर्वप्रथम रोक — बूंदी (1822)।
  2. कन्या वध पर सर्वप्रथम रोक — कोटा (1833)।
  3. त्याग प्रथा पर रोक — जोधपुर (1841); समाधि प्रथा पर — जयपुर (1844)।
  4. डाकन प्रथा पर रोक — उदयपुर (1853), महाराणा स्वरूपसिंह।
  5. राजस्थान सती (निवारण) अधिनियम — 1987 (रूप कंवर कांड, देवराला)।
  6. शारदा एक्ट — 1929, हरविलास शारदा।
  7. मृत्यु भोज निवारण अधिनियम — 1960।
  8. वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा — 1889।
  9. ननिहाल से विवाह पर भेंट — मायरा (भात); बारात का स्वागत — सामेला।
  10. बाद में वधू को ससुराल भेजना — मुकलावा (गौना)।
  11. प्रसव के बाद कुएं की पूजा — जलवा पूजन।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 राजस्थान में सर्वप्रथम सती प्रथा पर रोक किस राज्य में लगी?

2 डाकन प्रथा पर सर्वप्रथम रोक किसने लगाई?

3 विवाह पर ननिहाल पक्ष द्वारा दी जाने वाली भेंट को क्या कहते हैं?

4 बारात के स्वागत की रस्म क्या कहलाती है?

5 त्याग प्रथा पर सर्वप्रथम रोक कहां लगी?

6 राजस्थान सती (निवारण) अधिनियम किस वर्ष बना?

7 शारदा एक्ट किससे संबंधित है?

8 मृत्यु भोज को और किस नाम से जाना जाता है?

9 वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा की स्थापना कब हुई?

10 प्रसव के बाद माता द्वारा कुएं की पूजा को क्या कहते हैं?

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