राजस्थान की लोक देवियां

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राजस्थान में शक्ति उपासना की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। यहां की लोक देवियां किसी न किसी राजवंश या जाति की कुलदेवी हैं, तो कई देवियां लोक-कल्याण, रोग-निवारण और रक्षा के लिए पूजी जाती हैं। चैत्र और आश्विन नवरात्र में इनके मंदिरों पर विशाल मेले भरते हैं।

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करणी माता
चूहों वाली देवी
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जीण माता
सबसे लंबा लोकगीत
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शीतला माता
चेचक निवारक देवी
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तनोट माता
सैनिकों की देवी
📑 विषय सूची 11 टॉपिक

परिचय

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करणी माता

चूहों वाली देवी · जगदंबा का अवतार · बीकानेर के राठौड़ों की कुलदेवी

अति महत्वपूर्ण
जन्मसुवाप (फलोदी)
जन्म नामरिद्धि बाई
पितामेहाजी चारण
मुख्य मंदिरदेशनोक (बीकानेर)
इष्ट देवीतेमड़ाराय
मेलाचैत्र व आश्विन नवरात्र
  • देशनोक मंदिर में हज़ारों चूहे रहते हैं, जिन्हें "काबा" कहते हैं। सफेद चूहे के दर्शन अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
  • करणी माता ने राव जोधा के आग्रह पर मेहरानगढ़ (1459) और राव बीका के आग्रह पर बीकानेर दुर्ग की नींव रखी।
  • वर्तमान संगमरमर मंदिर का निर्माण बीकानेर महाराजा गंगासिंह के समय हुआ; चांदी के दरवाज़े भी उन्होंने चढ़ाए।
  • पास में नेहड़ी जी का स्थान है, जहां करणी माता ने तपस्या की थी। करणी माता का प्रतीक सफेद चील माना जाता है।
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जीण माता

चौहानों की कुलदेवी · मधुमक्खियों वाली देवी

अति महत्वपूर्ण
मंदिररैवासा (सीकर)
भाईहर्ष (हर्षनाथ)
प्रतिमाअष्टभुजी
मेलाचैत्र व आश्विन नवरात्र
  • जीण माता का गीत राजस्थान का सबसे लंबा लोकगीत है, जिसे कनफटे जोगी केसरिया वस्त्र पहन कर डमरू व सारंगी पर गाते हैं।
  • भाई हर्ष से मतभेद होने पर जीण ने तपस्या की; भाई का मंदिर हर्ष पर्वत (हर्षनाथ) पर है।
  • मान्यता है कि औरंगजेब की सेना ने मंदिर तोड़ने का प्रयास किया तो मधुमक्खियों ने आक्रमण कर दिया; बाद में औरंगजेब ने यहां अखंड ज्योति हेतु तेल भिजवाया।
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कैला देवी

यदुवंशियों की कुलदेवी · लांगुरिया गीतों वाली देवी

महत्वपूर्ण
मंदिरकरौली (त्रिकूट पर्वत)
नदीकालीसिल
मेलाचैत्र मास (लक्खी मेला)
  • करौली के यादव (यदुवंशी) राजवंश की कुलदेवी। मंदिर में कैला देवी के साथ चामुंडा की प्रतिमा भी है।
  • मेले में भक्त "लांगुरिया" गीत गाते हैं।
  • मंदिर के सामने बोहरा भक्त की छतरी है। आसपास कैलादेवी अभयारण्य है।
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शिला देवी

कछवाहों की आराध्य देवी · आमेर

महत्वपूर्ण
  • मंदिर आमेर दुर्ग (जयपुर) में स्थित है। प्रतिमा राजा मानसिंह प्रथम बंगाल के जसोर के राजा केदार को हराकर लाए थे।
  • यह अष्टभुजी महिषासुरमर्दिनी प्रतिमा है। मंदिर का मुख्य द्वार चांदी का बना है।
  • कछवाहों की कुलदेवी जमवाय माता (जमवारामगढ़) हैं, जबकि शिला देवी उनकी आराध्य (इष्ट) देवी हैं।
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शीतला माता

चेचक निवारक देवी · सैढ़ल माता · बच्चों की संरक्षिका

अति महत्वपूर्ण
मुख्य मंदिरचाकसू (जयपुर) — शील की डूंगरी
निर्मातासवाई माधोसिंह प्रथम
वाहनगधा
पुजारीकुम्हार
मेलाचैत्र कृष्ण अष्टमी
  • चैत्र कृष्ण अष्टमी को "बास्योड़ा" मनाया जाता है — इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलता और ठंडा (बासी) भोजन खाया जाता है।
  • शीतला माता एकमात्र देवी हैं जिनकी खंडित प्रतिमा की पूजा होती है।
  • बांझ स्त्रियां संतान प्राप्ति के लिए और माताएं बच्चों को चेचक से बचाने के लिए इनकी पूजा करती हैं।

राजवंशों व जातियों की कुलदेवियां

राजवंश / जातिकुलदेवीप्रमुख मंदिर
बीकानेर के राठौड़करणी मातादेशनोक (बीकानेर)
राठौड़ (मारवाड़)नागणेची मातानागाणा; जोधपुर व बीकानेर में भी मंदिर
कछवाहाजमवाय माताजमवारामगढ़ (जयपुर)
चौहानशाकंभरी / आशापुरा / जीण मातासांभर; नाडोल (पाली); रैवासा (सीकर)
सिसोदिया (मेवाड़)बाण माताचित्तौड़गढ़ / उदयपुर
भाटी (जैसलमेर)स्वांगिया (आवड़) माताजैसलमेर (तेमड़ेराय)
यादव (करौली)कैला देवीकरौली
ओसवालसच्चियाय माताओसियां (जोधपुर)
दहियाकैवाय माताकिणसरिया (डीडवाना-कुचामन)
दाधीच ब्राह्मणदधिमती मातागोठ-मांगलोद (नागौर)
सीरवीआई माताबिलाड़ा (जोधपुर)
नाईनारायणी माताराजगढ़ (अलवर)
खंडेलवालसकराय माताउदयपुरवाटी (झुंझुनूं)
पंचाल (लोहार)त्रिपुरा सुंदरीतलवाड़ा (बांसवाड़ा)

अन्य प्रमुख लोक देवियां

🦅 नागणेची माता

राठौड़ों की कुलदेवी। राव धूहड़ कर्नाटक से मूर्ति लाकर नागाणा में स्थापित की। 18 भुजाओं वाली प्रतिमा। राठौड़ नीम को नागणेची का वृक्ष मानकर इसकी लकड़ी का प्रयोग नहीं करते।

🪔 आई माता

मंदिर बिलाड़ा (जोधपुर); सीरवी जाति की कुलदेवी। मंदिर "बडेर" कहलाता है, जहां मूर्ति नहीं होती। दीपक की ज्योत से केसर टपकती है। रामदेवजी की शिष्या मानी जाती हैं।

🪖 तनोट माता

मंदिर तनोट (जैसलमेर); "थार की वैष्णो देवी" व सेना की देवी। 1965 के भारत-पाक युद्ध में यहां गिरे पाकिस्तानी बम नहीं फटे। मंदिर की पूजा व देखरेख सीमा सुरक्षा बल (BSF) करता है।

🔥 राणी सती

मूल नाम नारायणी; मंदिर झुंझुनूं; अग्रवाल समाज की आराध्य, "दादीजी"। सती (निवारण) अधिनियम 1987 के बाद यहां के सती मेले पर रोक लगी।

⛰️ सुंधा माता

मंदिर सुंधा पर्वत, भीनमाल (जालोर); चामुंडा का रूप। यहां राजस्थान का प्रथम रोप-वे (2006) शुरू हुआ। मंदिर में धड़ रहित सिर की पूजा होती है।

💍 चौथ माता

मंदिर चौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर)। सुहागिनें करवा चौथ पर अखंड सौभाग्य के लिए पूजा करती हैं। मेला माघ कृष्ण चतुर्थी।

🌸 त्रिपुरा सुंदरी

तलवाड़ा (बांसवाड़ा) में "तुरताई माता"; 18 भुजाओं वाली काले पत्थर की प्रतिमा। पंचाल (लोहार) समाज की कुलदेवी।

🔙 ब्रह्माणी माता

मंदिर सोरसन (बारां)। यहां देवी की पीठ की पूजा होती है — ऐसा एकमात्र मंदिर। माघ शुक्ल सप्तमी को गधों का मेला भरता है।

🐚 शाकंभरी माता

मंदिर सांभर (जयपुर); चौहानों की कुलदेवी। मान्यता है कि इन्होंने अकाल पड़ने पर शाक-सब्ज़ी उत्पन्न कर जनता की रक्षा की। एक अन्य मंदिर सकराय (झुंझुनूं) में।

🛕 अंबिका माता

मंदिर जगत (उदयपुर); 10वीं सदी का मंदिर। सुंदर मूर्तिकला के कारण इसे "मेवाड़ का खजुराहो" कहते हैं।

🌄 अर्बुदा देवी

माउंट आबू (सिरोही) में "अधर देवी"; पहाड़ी की गुफा में स्थित, देवी की प्रतिमा अधर (हवा) में लटकी मानी जाती है।

🌿 ज्वाला माता

मंदिर जोबनेर (जयपुर); खंगारोत कछवाहों की कुलदेवी। मेला चैत्र व आश्विन नवरात्र।

✋ भदाणा माता

मंदिर भदाणा (कोटा)। यहां "मूठ" (तंत्र-मंत्र) से पीड़ित व्यक्तियों का उपचार होने की मान्यता है।

🏞️ जिलाणी माता

मंदिर बहरोड़ (कोटपूतली-बहरोड़)। मेला वर्ष में दो बार भरता है।

🪷 सच्चियाय माता

मंदिर ओसियां (जोधपुर); प्रतिहारकालीन मंदिर। ओसवाल समाज की कुलदेवी; महिषासुरमर्दिनी स्वरूप।

🏹 आवड़ माता

भाटियों की कुलदेवी, स्वांगिया माता। तेमड़ी पर्वत (जैसलमेर) पर मंदिर; "सुगनचिड़ी" को आवड़ माता का रूप माना जाता है।

एक नज़र में — लोक देवियां व स्थान

देवीस्थान (जिला)विशेष पहचान
करणी मातादेशनोक (बीकानेर)चूहों (काबा) वाली देवी
जीण मातारैवासा (सीकर)सबसे लंबा लोकगीत
कैला देवीकरौलीलांगुरिया गीत
शिला देवीआमेर (जयपुर)मानसिंह जसोर से लाए
शीतला माताचाकसू (जयपुर)खंडित प्रतिमा, वाहन गधा
तनोट मातातनोट (जैसलमेर)BSF द्वारा पूजा
आई माताबिलाड़ा (जोधपुर)दीपक से केसर
सुंधा माताभीनमाल (जालोर)राज्य का प्रथम रोप-वे
ब्रह्माणी मातासोरसन (बारां)पीठ की पूजा, गधों का मेला
अंबिका माताजगत (उदयपुर)मेवाड़ का खजुराहो
त्रिपुरा सुंदरीतलवाड़ा (बांसवाड़ा)तुरताई माता
चौथ माताचौथ का बरवाड़ा (सवाई माधोपुर)करवा चौथ

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) करणी माता — देशनोक, “चूहों वाली देवी”, बीकानेर के राठौड़ों की कुलदेवी। (2) कैला देवी — करौली, यादवों की कुलदेवी; लांगुरिया गीत। (3) शिला देवी — आमेर, मानसिंह प्रथम बंगाल से लाए।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. चूहों वाली देवी — करणी माता (देशनोक); चूहों को काबा कहते हैं।
  2. राजस्थान का सबसे लंबा लोकगीत — जीण माता का गीत।
  3. खंडित प्रतिमा की पूजा — शीतला माता; वाहन — गधा।
  4. "थार की वैष्णो देवी" — तनोट माता।
  5. "मेवाड़ का खजुराहो" — जगत का अंबिका मंदिर।
  6. देवी की पीठ की पूजा — ब्रह्माणी माता (सोरसन, बारां)।
  7. राठौड़ों की कुलदेवी — नागणेची; कछवाहों की — जमवाय माता; सिसोदियों की — बाण माता।
  8. सीरवी जाति की कुलदेवी, दीपक से केसर — आई माता (बिलाड़ा)।
  9. राजस्थान का प्रथम रोप-वे — सुंधा माता (जालोर)।
  10. मेहरानगढ़ व बीकानेर दुर्ग की नींव — करणी माता ने रखी।
  11. लांगुरिया गीत — कैला देवी (करौली)।
  12. मारवाड़ के राठौड़ों की कुलदेवी — नागणेची।
  13. कछवाहों की कुलदेवी — जमवाय माता।
  14. जीण माता — रैवासा (सीकर); “ढाई प्याला” की मान्यता।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 "काबा" शब्द किस देवी के मंदिर से संबंधित है?

2 राजस्थान का सबसे लंबा लोकगीत किस देवी से संबंधित है?

3 किस देवी की खंडित प्रतिमा की पूजा होती है?

4 तनोट माता का मंदिर किस जिले में है?

5 "मेवाड़ का खजुराहो" किसे कहा जाता है?

6 कछवाहों की कुलदेवी कौन हैं?

7 सीरवी जाति की कुलदेवी कौन हैं?

8 किस मंदिर में देवी की पीठ की पूजा होती है?

9 राजस्थान का प्रथम रोप-वे किस मंदिर के लिए बना?

10 कैवाय माता का मंदिर किणसरिया वर्तमान में किस जिले में है?

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