राजस्थान लोकायुक्त
लोकायुक्त राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार व कुप्रशासन की शिकायतों की जांच करने वाली संस्था है। यह स्कैंडिनेवियाई देशों की "ओम्बुड्समैन" व्यवस्था पर आधारित है। राजस्थान में राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के अंतर्गत यह संस्था स्थापित हुई — लोकायुक्त बनाने वाले शुरुआती राज्यों में राजस्थान प्रमुख है।
📑 विषय सूची 7 टॉपिक
पृष्ठभूमि
- विश्व में ओम्बुड्समैन संस्था सबसे पहले स्वीडन (1809) में स्थापित हुई।
- भारत में प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966) ने, जिसके अध्यक्ष मोरारजी देसाई थे, केंद्र में लोकपाल व राज्यों में लोकायुक्त की सिफारिश की।
- महाराष्ट्र लोकायुक्त संस्था स्थापित करने वाला प्रथम राज्य बना (1971); इसके बाद राजस्थान (1973)।
- लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 ने सभी राज्यों के लिए एक वर्ष में लोकायुक्त स्थापित करना अनिवार्य किया।
📝 राजस्थान लोकायुक्त संवैधानिक नहीं, बल्कि राज्य विधानमंडल के कानून से बनी वैधानिक संस्था है। अधिनियम 3 फरवरी 1973 से लागू हुआ।
नियुक्ति, योग्यता व कार्यकाल
| विषय | प्रावधान |
|---|---|
| नियुक्ति | राज्यपाल द्वारा — राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से परामर्श के बाद |
| योग्यता | सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश / मुख्य न्यायाधीश रहे व्यक्ति |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (2018 में अध्यादेश से 8 वर्ष किया गया था, पर 2019 में पुनः 5 वर्ष) |
| शपथ | राज्यपाल के समक्ष |
| हटाना | विधानसभा द्वारा समावेदन पारित होने पर राज्यपाल द्वारा (कदाचार/अक्षमता सिद्ध होने पर) |
| पुनर्नियुक्ति | नहीं; कार्यकाल के बाद अन्य सरकारी पद के लिए अयोग्य |
क्षेत्राधिकार
✅ जांच के दायरे में
मंत्री (मुख्यमंत्री को छोड़कर), सचिव व सरकारी अधिकारी, जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच, नगरीय निकायों के अध्यक्ष, सरकारी निगमों व विश्वविद्यालयों के पदाधिकारी।
❌ जांच से बाहर
मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, महालेखाकार, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष-सदस्य, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, विधानसभा सचिवालय के अधिकारी।
⏳ समय सीमा
घटना के 5 वर्ष बाद की शिकायत पर सामान्यतः जांच नहीं।
🔍 स्वतः संज्ञान
लोकायुक्त भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत के अलावा स्वयं भी संज्ञान ले सकता है।
शक्तियां व प्रतिवेदन
- जांच के दौरान लोकायुक्त को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त हैं — गवाहों को बुलाना, दस्तावेज़ मंगाना।
- लोकायुक्त की सिफारिशें सलाहकारी हैं, सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं; इसलिए इसे "बिना दांत का शेर" भी कहा जाता है।
- लोकायुक्त अपना वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को देता है, जिसे विधानसभा में रखा जाता है।
- लोकायुक्त की सहायता हेतु उप-लोकायुक्त का प्रावधान है।
राजस्थान लोकायुक्त — प्रमुख तथ्य
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| प्रथम लोकायुक्त | न्यायमूर्ति आई.डी. दुआ (1973) |
| हाल के लोकायुक्त | न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा — 9 मार्च 2021 को शपथ |
| मुख्यालय | जयपुर |
⚠️ वर्तमान पदधारी समय के साथ बदल सकते हैं — परीक्षा से पहले नवीनतम जानकारी अवश्य जांच लें।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) लोकायुक्त बनाने वाला प्रथम राज्य — महाराष्ट्र (1971); राजस्थान — 1973। (2) मुख्यमंत्री लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। (3) कार्यकाल — 5 वर्ष (2018 में 8 किया, 2019 में पुनः 5)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- ओम्बुड्समैन — सर्वप्रथम स्वीडन (1809)।
- लोकपाल-लोकायुक्त की सिफारिश — प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966, मोरारजी देसाई)।
- प्रथम लोकायुक्त वाला राज्य — महाराष्ट्र (1971)।
- राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम — 1973 (लागू 3 फरवरी 1973)।
- प्रथम लोकायुक्त — न्यायमूर्ति आई.डी. दुआ।
- नियुक्ति — राज्यपाल (मुख्य न्यायाधीश व नेता प्रतिपक्ष से परामर्श)।
- कार्यकाल — 5 वर्ष।
- जांच से बाहर — मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आदि।
- वार्षिक प्रतिवेदन — राज्यपाल को।
- लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम — 2013।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम कब पारित हुआ?
2 लोकायुक्त संस्था किस देश की ओम्बुड्समैन व्यवस्था से प्रेरित है?
3 लोकपाल व लोकायुक्त की सिफारिश किसने की?
4 लोकायुक्त संस्था स्थापित करने वाला प्रथम राज्य कौन-सा है?
5 राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त कौन थे?
6 राजस्थान लोकायुक्त की नियुक्ति कौन करता है?
7 राजस्थान लोकायुक्त का कार्यकाल कितना है?
8 राजस्थान लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार से कौन बाहर है?
9 लोकायुक्त अपना वार्षिक प्रतिवेदन किसे सौंपता है?
10 लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम कब पारित हुआ?