राजस्थान लोकायुक्त

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लोकायुक्त राज्य स्तर पर भ्रष्टाचार व कुप्रशासन की शिकायतों की जांच करने वाली संस्था है। यह स्कैंडिनेवियाई देशों की "ओम्बुड्समैन" व्यवस्था पर आधारित है। राजस्थान में राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम, 1973 के अंतर्गत यह संस्था स्थापित हुई — लोकायुक्त बनाने वाले शुरुआती राज्यों में राजस्थान प्रमुख है।

📜
1973
लोकायुक्त अधिनियम
🇸🇪
ओम्बुड्समैन
स्वीडन से प्रेरित
⚖️
आई.डी. दुआ
प्रथम लोकायुक्त
⏳
5 वर्ष
कार्यकाल
📑 विषय सूची 7 टॉपिक

पृष्ठभूमि

📝 राजस्थान लोकायुक्त संवैधानिक नहीं, बल्कि राज्य विधानमंडल के कानून से बनी वैधानिक संस्था है। अधिनियम 3 फरवरी 1973 से लागू हुआ।

नियुक्ति, योग्यता व कार्यकाल

विषयप्रावधान
नियुक्तिराज्यपाल द्वारा — राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष से परामर्श के बाद
योग्यतासर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश / मुख्य न्यायाधीश रहे व्यक्ति
कार्यकाल5 वर्ष (2018 में अध्यादेश से 8 वर्ष किया गया था, पर 2019 में पुनः 5 वर्ष)
शपथराज्यपाल के समक्ष
हटानाविधानसभा द्वारा समावेदन पारित होने पर राज्यपाल द्वारा (कदाचार/अक्षमता सिद्ध होने पर)
पुनर्नियुक्तिनहीं; कार्यकाल के बाद अन्य सरकारी पद के लिए अयोग्य

क्षेत्राधिकार

✅ जांच के दायरे में

मंत्री (मुख्यमंत्री को छोड़कर), सचिव व सरकारी अधिकारी, जिला प्रमुख, प्रधान, सरपंच, नगरीय निकायों के अध्यक्ष, सरकारी निगमों व विश्वविद्यालयों के पदाधिकारी।

❌ जांच से बाहर

मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, महालेखाकार, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष-सदस्य, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, विधानसभा सचिवालय के अधिकारी।

⏳ समय सीमा

घटना के 5 वर्ष बाद की शिकायत पर सामान्यतः जांच नहीं।

🔍 स्वतः संज्ञान

लोकायुक्त भ्रष्टाचार के मामलों में शिकायत के अलावा स्वयं भी संज्ञान ले सकता है।

शक्तियां व प्रतिवेदन

राजस्थान लोकायुक्त — प्रमुख तथ्य

तथ्यविवरण
प्रथम लोकायुक्तन्यायमूर्ति आई.डी. दुआ (1973)
हाल के लोकायुक्तन्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा — 9 मार्च 2021 को शपथ
मुख्यालयजयपुर

⚠️ वर्तमान पदधारी समय के साथ बदल सकते हैं — परीक्षा से पहले नवीनतम जानकारी अवश्य जांच लें।

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) लोकायुक्त बनाने वाला प्रथम राज्य — महाराष्ट्र (1971); राजस्थान — 1973। (2) मुख्यमंत्री लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। (3) कार्यकाल — 5 वर्ष (2018 में 8 किया, 2019 में पुनः 5)।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. ओम्बुड्समैन — सर्वप्रथम स्वीडन (1809)।
  2. लोकपाल-लोकायुक्त की सिफारिश — प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966, मोरारजी देसाई)।
  3. प्रथम लोकायुक्त वाला राज्य — महाराष्ट्र (1971)।
  4. राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम — 1973 (लागू 3 फरवरी 1973)।
  5. प्रथम लोकायुक्त — न्यायमूर्ति आई.डी. दुआ।
  6. नियुक्ति — राज्यपाल (मुख्य न्यायाधीश व नेता प्रतिपक्ष से परामर्श)।
  7. कार्यकाल — 5 वर्ष।
  8. जांच से बाहर — मुख्यमंत्री, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आदि।
  9. वार्षिक प्रतिवेदन — राज्यपाल को।
  10. लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम — 2013।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 राजस्थान लोकायुक्त एवं उप-लोकायुक्त अधिनियम कब पारित हुआ?

2 लोकायुक्त संस्था किस देश की ओम्बुड्समैन व्यवस्था से प्रेरित है?

3 लोकपाल व लोकायुक्त की सिफारिश किसने की?

4 लोकायुक्त संस्था स्थापित करने वाला प्रथम राज्य कौन-सा है?

5 राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त कौन थे?

6 राजस्थान लोकायुक्त की नियुक्ति कौन करता है?

7 राजस्थान लोकायुक्त का कार्यकाल कितना है?

8 राजस्थान लोकायुक्त के क्षेत्राधिकार से कौन बाहर है?

9 लोकायुक्त अपना वार्षिक प्रतिवेदन किसे सौंपता है?

10 लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम कब पारित हुआ?

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