राजस्थान राज्य सूचना आयोग
सूचना का अधिकार लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही का सबसे प्रभावी साधन है, और इस आंदोलन की जन्मभूमि राजस्थान है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 के अंतर्गत गठित राजस्थान राज्य सूचना आयोग एक वैधानिक संस्था है, जो सूचना से संबंधित शिकायतों व द्वितीय अपीलों की सुनवाई करती है।
📑 विषय सूची 7 टॉपिक
सूचना के अधिकार का आंदोलन
मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS)
देवडूंगरी (राजसमंद) · अरुणा रॉय, निखिल डे, शंकर सिंह
- 1990 में देवडूंगरी (राजसमंद) में MKSS का गठन; मजदूरी भुगतान व सरकारी कार्यों के रिकॉर्ड की मांग से आंदोलन शुरू हुआ।
- MKSS ने जन सुनवाई के माध्यम से सरकारी योजनाओं के भ्रष्टाचार को उजागर किया; नारा — "हमारा पैसा, हमारा हिसाब"।
- 1996 में ब्यावर में लंबा धरना — सूचना के अधिकार की मांग का राष्ट्रीय केंद्र बना।
- इसी आंदोलन के परिणामस्वरूप राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 बना, जो 26 जनवरी 2001 से लागू हुआ।
- बाद में केंद्र ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 पारित किया (लागू — 12 अक्टूबर 2005)।
राज्य सूचना आयोग — गठन
| विषय | प्रावधान |
|---|---|
| गठन | 13 अप्रैल 2006 (RTI अधिनियम 2005 की धारा 15); 18 अप्रैल 2006 से क्रियाशील |
| संरचना | 1 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 राज्य सूचना आयुक्त |
| नियुक्ति | राज्यपाल द्वारा, समिति की सिफारिश पर |
| नियुक्ति समिति | मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री |
| कार्यकाल | केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित — RTI (संशोधन) अधिनियम 2019 के बाद 3 वर्ष; पुनर्नियुक्ति नहीं |
| हटाना | राज्यपाल द्वारा (कदाचार/अक्षमता पर सर्वोच्च न्यायालय की जांच के बाद, या दिवालिया, अपराध में दोषसिद्ध आदि पर) |
| प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त | एम.डी. कौरानी |
| मुख्यालय | जयपुर |
सूचना मांगने की प्रक्रिया
📝 आवेदन
लोक सूचना अधिकारी (PIO) को लिखित/ऑनलाइन आवेदन; कारण बताना आवश्यक नहीं; BPL आवेदक से शुल्क नहीं।
⏳ समय सीमा
सामान्यतः 30 दिन; जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना — 48 घंटे।
1️⃣ प्रथम अपील
सूचना न मिलने पर 30 दिन में विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी को।
2️⃣ द्वितीय अपील
प्रथम अपील के निर्णय के 90 दिन में राज्य सूचना आयोग को।
💸 दंड
दोषी PIO पर ₹250 प्रतिदिन, अधिकतम ₹25,000 का जुर्माना।
⚖️ शक्तियां
जांच के दौरान आयोग को सिविल न्यायालय की शक्तियां।
💻 जन सूचना पोर्टल (13 सितंबर 2019): राजस्थान देश का प्रथम राज्य बना जिसने सरकारी विभागों की सूचनाएं बिना आवेदन किए एक पोर्टल पर स्वतः उपलब्ध कराईं (RTI अधिनियम की धारा 4)।
वर्तमान आयोग
- राज्य मुख्य सूचना आयुक्त — मोहन लाल लाठर (पूर्व DGP)।
- सूचना आयुक्त — महेंद्र कुमार पारख, सुरेश चंद गुप्ता, टीका राम शर्मा, सुनील शर्मा (दिसंबर 2025 में नियुक्त)।
⚠️ वर्तमान पदधारी समय के साथ बदल सकते हैं — परीक्षा से पहले नवीनतम जानकारी अवश्य जांच लें।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) MKSS — देवडूंगरी (राजसमंद); ब्यावर धरना — 1996। (2) राजस्थान RTI अधिनियम — 2000; केंद्र — 2005। (3) जीवन-स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना — 48 घंटे; सामान्य — 30 दिन।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- RTI आंदोलन — MKSS (1990, देवडूंगरी, राजसमंद); प्रमुख — अरुणा रॉय।
- ब्यावर धरना — 1996।
- राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम — 2000 (लागू 26 जनवरी 2001)।
- केंद्रीय RTI अधिनियम — 2005 (लागू 12 अक्टूबर 2005)।
- राजस्थान सूचना आयोग का गठन — 13 अप्रैल 2006; प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त — एम.डी. कौरानी।
- संरचना — 1 मुख्य + अधिकतम 10 सूचना आयुक्त।
- नियुक्ति — राज्यपाल; हटाना — राज्यपाल।
- सूचना की समय सीमा — 30 दिन; जीवन-स्वतंत्रता — 48 घंटे।
- अधिकतम जुर्माना — ₹25,000।
- जन सूचना पोर्टल — 13 सितंबर 2019।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 सूचना के अधिकार आंदोलन से जुड़ा संगठन MKSS कहां गठित हुआ?
2 MKSS की प्रमुख नेता कौन थीं?
3 राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम कब बना?
4 राजस्थान राज्य सूचना आयोग का गठन कब हुआ?
5 राजस्थान के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त कौन थे?
6 राज्य सूचना आयोग में अधिकतम कितने सूचना आयुक्त हो सकते हैं?
7 राज्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कौन करता है?
8 जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना कितने समय में देनी होती है?
9 RTI अधिनियम के तहत दोषी अधिकारी पर अधिकतम कितना जुर्माना लग सकता है?
10 राजस्थान का जन सूचना पोर्टल कब शुरू हुआ?