राजस्थान की पशु संपदा (पशुधन)

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शुष्क जलवायु व अनिश्चित वर्षा के कारण राजस्थान में पशुपालन कृषि का सबसे भरोसेमंद सहायक व्यवसाय है — अकाल के समय यही ग्रामीणों की आजीविका का आधार बनता है। पशुधन की संख्या में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है तथा ऊंट, बकरी व ऊन उत्पादन में प्रथम है।

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5.68 करोड़
कुल पशुधन (2019)
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द्वितीय
देश में स्थान
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प्रथम
ऊंट व बकरी
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प्रथम
ऊन उत्पादन
📑 विषय सूची 12 टॉपिक

20वीं पशुगणना (2019) — मुख्य आंकड़े

पशुसंख्या (लगभग)देश में स्थान
कुल पशुधन5.68 करोड़द्वितीय (उत्तरप्रदेश के बाद)
बकरी2.08 करोड़प्रथम — राज्य में सर्वाधिक संख्या वाला पशु
गोवंश1.39 करोड़—
भैंस1.37 करोड़द्वितीय
भेड़79 लाख—
ऊंट2.13 लाखप्रथम (देश के लगभग 85% ऊंट)

📝 नोट: 21वीं पशुगणना (2024-25) के अंतिम आंकड़े जारी होने पर कुछ संख्याएं बदल सकती हैं। परीक्षा में प्रायः 20वीं पशुगणना (2019) के आंकड़े ही पूछे जाते हैं।

गोवंश की प्रमुख नस्लें

नस्लप्रमुख क्षेत्रविशेषता
गिर (अजमेरा, रेंडा)अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, किशनगढ़मूल स्थान — गिर वन (गुजरात); अधिक दूध
थारपारकर (मालाणी)बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जोधपुरदुधारू; मूल स्थान — मालाणी (बाड़मेर); सूरतगढ़ फार्म
राठीबीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़"राजस्थान की कामधेनु"; अधिक दूध के लिए प्रसिद्ध
नागौरीनागौर, डीडवाना-कुचामनभारवाहक बैल — तेज़ दौड़ने के लिए प्रसिद्ध
कांकरेजबाड़मेर, जालोर, सिरोहीद्विप्रयोजनी — दूध व भार दोनों
हरियाणवीझुंझुनूं, सीकर, चूरू, अलवर, भरतपुरद्विप्रयोजनी
मेवाती (कोठी)अलवर, भरतपुर, डीगभारवाहक
मालवीझालावाड़, कोटा, बारांभारवाहक बैल
सांचौरीजालोर, सिरोही, उदयपुरदूध व भार

भैंस की प्रमुख नस्लें

🐃 मुर्रा

सर्वश्रेष्ठ दुधारू नस्ल ("खुंडी"); जयपुर, अलवर, भरतपुर, श्रीगंगानगर।

🐃 सूरती

उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर — दक्षिणी राजस्थान।

🐃 जाफराबादी

सबसे भारी नस्ल; गुजरात से सटे क्षेत्र।

🐃 भदावरी

धौलपुर, भरतपुर — दूध में अधिक वसा।

भेड़ की प्रमुख नस्लें

नस्लप्रमुख क्षेत्रविशेषता
चोकला (शेखावाटी)चूरू, झुंझुनूं, सीकर"भारत की मेरिनो" — सर्वोत्तम ऊन
मारवाड़ीजोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालोर, नागौरराज्य में सर्वाधिक संख्या वाली नस्ल
मगरा (बीकानेरी चोकला)बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, नागौरकालीन के लिए सफेद, चमकीली ऊन
जैसलमेरीजैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुरलंबे रेशे वाली कालीन ऊन; मरुस्थल के अनुकूल
नालीश्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूंघग्घर क्षेत्र; मोटी व लंबी ऊन
मालपुराटोंक, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ामोटी ऊन व मांस
सोनाड़ी (चनोथर)उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़लंबे लटकते कान
पूगलबीकानेर (पूगल), जैसलमेर—

बकरी की प्रमुख नस्लें

🐐 जखराना

अलवर (जखराना गांव) — सर्वाधिक दूध देने वाली बकरी।

🐐 सिरोही

सिरोही, अजमेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर — दूध व मांस।

🐐 मारवाड़ी (लोही)

जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, नागौर — सर्वाधिक संख्या।

🐐 जमनापरी

कोटा, बूंदी, झालावाड़ — लंबे कान, दूध।

🐐 बारबरी

भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर — दूध व मांस।

🐐 बीटल

श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ — पंजाबी नस्ल।

ऊंट व घोड़े

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ऊंट — राज्य पशु (पशुधन श्रेणी, 2014)

"रेगिस्तान का जहाज" · पाबूजी राठौड़ — ऊंटों के देवता

अति महत्वपूर्ण
बीकानेरीसर्वश्रेष्ठ भारवाहक; सर्वाधिक संख्या
जैसलमेरीसवारी व तेज़ दौड़ के लिए प्रसिद्ध
गोमठफलोदी क्षेत्र — सवारी के लिए
मेवाड़ी / कच्छीउदयपुर क्षेत्र / गुजरात सीमा के जिले
  • राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC) — जोहड़बीड़, बीकानेर (1984); ऊंटनी के दूध की डेयरी व आइसक्रीम।
  • राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015 — ऊंट वध पर रोक।
  • ऊंट को मारवाड़ में लाने का श्रेय लोकदेवता पाबूजी को दिया जाता है; ऊंट पालक रेबारी (राईका) जाति।
  • सीमा सुरक्षा बल (BSF) में "ऊंट दस्ता"; बीकानेर में ऊंट उत्सव।

🐎 मालाणी घोड़ा

बाड़मेर-बालोतरा का मालाणी क्षेत्र; तिलवाड़ा पशु मेले में प्रसिद्ध।

🐎 मारवाड़ी घोड़ा

जोधपुर, बाड़मेर, जालोर — मुड़े हुए कान इसकी पहचान।

दुग्ध व ऊन उत्पादन

पशु अनुसंधान संस्थान

संस्थानस्थान
केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI)अविकानगर, मालपुरा (टोंक) — 1962
राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC)बीकानेर — 1984
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (क्षेत्रीय परिसर)बीकानेर
राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS)बीकानेर — 2010

प्रमुख पशु मेले

मेलास्थानप्रमुख नस्ल
पुष्कर मेलापुष्कर (अजमेर)ऊंट (गिर नस्ल भी) — विश्व प्रसिद्ध
मल्लिनाथ पशु मेलातिलवाड़ा (बालोतरा)थारपारकर, कांकरेज; मालाणी घोड़े
वीर तेजाजी पशु मेलापरबतसर (डीडवाना-कुचामन)नागौरी
रामदेव पशु मेलामानासर (नागौर)नागौरी
बलदेव पशु मेलामेड़ता (नागौर)नागौरी
गोगामेड़ी पशु मेलागोगामेड़ी (हनुमानगढ़)हरियाणवी
चंद्रभागा पशु मेलाझालरापाटन (झालावाड़)मालवी
जसवंत पशु मेलाभरतपुरहरियाणवी
गोमतीसागर पशु मेलाझालरापाटन (झालावाड़)मालवी

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राज्य में सर्वाधिक संख्या — बकरी (गाय नहीं)। (2) राठी — “राजस्थान की कामधेनु”; चोकला — “भारत की मेरिनो”। (3) ऊंट अनुसंधान — बीकानेर; भेड़-ऊन अनुसंधान — अविकानगर (टोंक)।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. कुल पशुधन — 5.68 करोड़ (2019); देश में द्वितीय।
  2. राज्य में सर्वाधिक संख्या — बकरी; ऊंट में देश में प्रथम।
  3. "राजस्थान की कामधेनु" — राठी गाय।
  4. "भारत की मेरिनो" — चोकला भेड़।
  5. राज्य में सर्वाधिक संख्या वाली भेड़ — मारवाड़ी।
  6. सर्वाधिक दूध देने वाली बकरी — जखराना (अलवर)।
  7. ऊंट — राज्य पशु (पशुधन) 2014; NRCC — बीकानेर (1984)।
  8. भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान — अविकानगर (टोंक)।
  9. ऊन उत्पादन — देश में प्रथम; दुग्ध उत्पादन — द्वितीय।
  10. तिलवाड़ा पशु मेला — मल्लिनाथ (बालोतरा); परबतसर — तेजाजी।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 20वीं पशुगणना (2019) के अनुसार पशुधन संख्या में राजस्थान का देश में कौन-सा स्थान है?

2 राजस्थान में सर्वाधिक संख्या किस पशु की है?

3 "राजस्थान की कामधेनु" किस गाय की नस्ल को कहा जाता है?

4 "भारत की मेरिनो" किस भेड़ को कहा जाता है?

5 जखराना बकरी किस जिले से संबंधित है?

6 राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र कहां स्थित है?

7 केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान कहां है?

8 ऊंट को राज्य पशु (पशुधन श्रेणी) कब घोषित किया गया?

9 मल्लिनाथ पशु मेला कहां लगता है?

10 थारपारकर गाय का मूल स्थान कौन-सा क्षेत्र है?

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