राजस्थान की पशु संपदा (पशुधन)
शुष्क जलवायु व अनिश्चित वर्षा के कारण राजस्थान में पशुपालन कृषि का सबसे भरोसेमंद सहायक व्यवसाय है — अकाल के समय यही ग्रामीणों की आजीविका का आधार बनता है। पशुधन की संख्या में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है तथा ऊंट, बकरी व ऊन उत्पादन में प्रथम है।
📑 विषय सूची 12 टॉपिक
20वीं पशुगणना (2019) — मुख्य आंकड़े
| पशु | संख्या (लगभग) | देश में स्थान |
|---|---|---|
| कुल पशुधन | 5.68 करोड़ | द्वितीय (उत्तरप्रदेश के बाद) |
| बकरी | 2.08 करोड़ | प्रथम — राज्य में सर्वाधिक संख्या वाला पशु |
| गोवंश | 1.39 करोड़ | — |
| भैंस | 1.37 करोड़ | द्वितीय |
| भेड़ | 79 लाख | — |
| ऊंट | 2.13 लाख | प्रथम (देश के लगभग 85% ऊंट) |
- पशुगणना हर 5 वर्ष में होती है; राजस्थान में प्रथम पशुगणना 1951 में हुई।
- 2012 से 2019 के बीच राज्य में ऊंटों की संख्या में भारी गिरावट (लगभग 35%) दर्ज हुई।
- पशुधन में बकरी के बाद गोवंश व भैंस का स्थान है।
📝 नोट: 21वीं पशुगणना (2024-25) के अंतिम आंकड़े जारी होने पर कुछ संख्याएं बदल सकती हैं। परीक्षा में प्रायः 20वीं पशुगणना (2019) के आंकड़े ही पूछे जाते हैं।
गोवंश की प्रमुख नस्लें
| नस्ल | प्रमुख क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| गिर (अजमेरा, रेंडा) | अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बूंदी, किशनगढ़ | मूल स्थान — गिर वन (गुजरात); अधिक दूध |
| थारपारकर (मालाणी) | बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जोधपुर | दुधारू; मूल स्थान — मालाणी (बाड़मेर); सूरतगढ़ फार्म |
| राठी | बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ | "राजस्थान की कामधेनु"; अधिक दूध के लिए प्रसिद्ध |
| नागौरी | नागौर, डीडवाना-कुचामन | भारवाहक बैल — तेज़ दौड़ने के लिए प्रसिद्ध |
| कांकरेज | बाड़मेर, जालोर, सिरोही | द्विप्रयोजनी — दूध व भार दोनों |
| हरियाणवी | झुंझुनूं, सीकर, चूरू, अलवर, भरतपुर | द्विप्रयोजनी |
| मेवाती (कोठी) | अलवर, भरतपुर, डीग | भारवाहक |
| मालवी | झालावाड़, कोटा, बारां | भारवाहक बैल |
| सांचौरी | जालोर, सिरोही, उदयपुर | दूध व भार |
भैंस की प्रमुख नस्लें
🐃 मुर्रा
सर्वश्रेष्ठ दुधारू नस्ल ("खुंडी"); जयपुर, अलवर, भरतपुर, श्रीगंगानगर।
🐃 सूरती
उदयपुर, राजसमंद, डूंगरपुर — दक्षिणी राजस्थान।
🐃 जाफराबादी
सबसे भारी नस्ल; गुजरात से सटे क्षेत्र।
🐃 भदावरी
धौलपुर, भरतपुर — दूध में अधिक वसा।
भेड़ की प्रमुख नस्लें
| नस्ल | प्रमुख क्षेत्र | विशेषता |
|---|---|---|
| चोकला (शेखावाटी) | चूरू, झुंझुनूं, सीकर | "भारत की मेरिनो" — सर्वोत्तम ऊन |
| मारवाड़ी | जोधपुर, बाड़मेर, पाली, जालोर, नागौर | राज्य में सर्वाधिक संख्या वाली नस्ल |
| मगरा (बीकानेरी चोकला) | बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, नागौर | कालीन के लिए सफेद, चमकीली ऊन |
| जैसलमेरी | जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर | लंबे रेशे वाली कालीन ऊन; मरुस्थल के अनुकूल |
| नाली | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं | घग्घर क्षेत्र; मोटी व लंबी ऊन |
| मालपुरा | टोंक, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा | मोटी ऊन व मांस |
| सोनाड़ी (चनोथर) | उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ | लंबे लटकते कान |
| पूगल | बीकानेर (पूगल), जैसलमेर | — |
बकरी की प्रमुख नस्लें
🐐 जखराना
अलवर (जखराना गांव) — सर्वाधिक दूध देने वाली बकरी।
🐐 सिरोही
सिरोही, अजमेर, भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर — दूध व मांस।
🐐 मारवाड़ी (लोही)
जोधपुर, बाड़मेर, बीकानेर, नागौर — सर्वाधिक संख्या।
🐐 जमनापरी
कोटा, बूंदी, झालावाड़ — लंबे कान, दूध।
🐐 बारबरी
भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर — दूध व मांस।
🐐 बीटल
श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ — पंजाबी नस्ल।
ऊंट व घोड़े
ऊंट — राज्य पशु (पशुधन श्रेणी, 2014)
"रेगिस्तान का जहाज" · पाबूजी राठौड़ — ऊंटों के देवता
- राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC) — जोहड़बीड़, बीकानेर (1984); ऊंटनी के दूध की डेयरी व आइसक्रीम।
- राजस्थान ऊंट (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रव्रजन या निर्यात का विनियमन) अधिनियम, 2015 — ऊंट वध पर रोक।
- ऊंट को मारवाड़ में लाने का श्रेय लोकदेवता पाबूजी को दिया जाता है; ऊंट पालक रेबारी (राईका) जाति।
- सीमा सुरक्षा बल (BSF) में "ऊंट दस्ता"; बीकानेर में ऊंट उत्सव।
🐎 मालाणी घोड़ा
बाड़मेर-बालोतरा का मालाणी क्षेत्र; तिलवाड़ा पशु मेले में प्रसिद्ध।
🐎 मारवाड़ी घोड़ा
जोधपुर, बाड़मेर, जालोर — मुड़े हुए कान इसकी पहचान।
दुग्ध व ऊन उत्पादन
- दुग्ध उत्पादन में राजस्थान देश में द्वितीय (उत्तरप्रदेश के बाद) स्थान पर है।
- ऊन उत्पादन में राजस्थान प्रथम — देश के कुल ऊन उत्पादन का लगभग 45-47%।
- सहकारी डेयरी — राजस्थान सहकारी डेयरी फेडरेशन (RCDF), ब्रांड "सरस"; जयपुर में मुख्यालय।
- राज्य की प्रथम डेयरी — पद्मा डेयरी, अजमेर।
- ऊन मंडी — बीकानेर (एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी), ब्यावर।
पशु अनुसंधान संस्थान
| संस्थान | स्थान |
|---|---|
| केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI) | अविकानगर, मालपुरा (टोंक) — 1962 |
| राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (NRCC) | बीकानेर — 1984 |
| राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (क्षेत्रीय परिसर) | बीकानेर |
| राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (RAJUVAS) | बीकानेर — 2010 |
प्रमुख पशु मेले
| मेला | स्थान | प्रमुख नस्ल |
|---|---|---|
| पुष्कर मेला | पुष्कर (अजमेर) | ऊंट (गिर नस्ल भी) — विश्व प्रसिद्ध |
| मल्लिनाथ पशु मेला | तिलवाड़ा (बालोतरा) | थारपारकर, कांकरेज; मालाणी घोड़े |
| वीर तेजाजी पशु मेला | परबतसर (डीडवाना-कुचामन) | नागौरी |
| रामदेव पशु मेला | मानासर (नागौर) | नागौरी |
| बलदेव पशु मेला | मेड़ता (नागौर) | नागौरी |
| गोगामेड़ी पशु मेला | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) | हरियाणवी |
| चंद्रभागा पशु मेला | झालरापाटन (झालावाड़) | मालवी |
| जसवंत पशु मेला | भरतपुर | हरियाणवी |
| गोमतीसागर पशु मेला | झालरापाटन (झालावाड़) | मालवी |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राज्य में सर्वाधिक संख्या — बकरी (गाय नहीं)। (2) राठी — “राजस्थान की कामधेनु”; चोकला — “भारत की मेरिनो”। (3) ऊंट अनुसंधान — बीकानेर; भेड़-ऊन अनुसंधान — अविकानगर (टोंक)।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- कुल पशुधन — 5.68 करोड़ (2019); देश में द्वितीय।
- राज्य में सर्वाधिक संख्या — बकरी; ऊंट में देश में प्रथम।
- "राजस्थान की कामधेनु" — राठी गाय।
- "भारत की मेरिनो" — चोकला भेड़।
- राज्य में सर्वाधिक संख्या वाली भेड़ — मारवाड़ी।
- सर्वाधिक दूध देने वाली बकरी — जखराना (अलवर)।
- ऊंट — राज्य पशु (पशुधन) 2014; NRCC — बीकानेर (1984)।
- भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान — अविकानगर (टोंक)।
- ऊन उत्पादन — देश में प्रथम; दुग्ध उत्पादन — द्वितीय।
- तिलवाड़ा पशु मेला — मल्लिनाथ (बालोतरा); परबतसर — तेजाजी।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 20वीं पशुगणना (2019) के अनुसार पशुधन संख्या में राजस्थान का देश में कौन-सा स्थान है?
2 राजस्थान में सर्वाधिक संख्या किस पशु की है?
3 "राजस्थान की कामधेनु" किस गाय की नस्ल को कहा जाता है?
4 "भारत की मेरिनो" किस भेड़ को कहा जाता है?
5 जखराना बकरी किस जिले से संबंधित है?
6 राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र कहां स्थित है?
7 केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान कहां है?
8 ऊंट को राज्य पशु (पशुधन श्रेणी) कब घोषित किया गया?
9 मल्लिनाथ पशु मेला कहां लगता है?
10 थारपारकर गाय का मूल स्थान कौन-सा क्षेत्र है?