गुर्जर-प्रतिहार वंश

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7वीं से 11वीं सदी के बीच उत्तर भारत में गुर्जर-प्रतिहार सबसे शक्तिशाली राजवंश थे। इन्होंने लगभग तीन सदियों तक अरब आक्रमणों को रोके रखा और कन्नौज के लिए पाल व राष्ट्रकूटों से त्रिपक्षीय संघर्ष लड़ा। राजस्थान में इनकी प्रारंभिक शाखाएं मंडोर और भीनमाल में थीं।

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नागभट्ट प्रथम
अरबों के प्रतिरोधक
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मिहिरभोज
"आदिवराह"
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त्रिपक्षीय
कन्नौज के लिए संघर्ष
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महामारू
प्रतिहारकालीन मंदिर शैली
📑 विषय सूची 7 टॉपिक

उत्पत्ति

मंडोर शाखा

भीनमाल-कन्नौज की शाही शाखा

शासककालप्रमुख उपलब्धियां
नागभट्ट प्रथम730-760वंश के वास्तविक संस्थापक; अरब आक्रमणों को रोका — ग्वालियर प्रशस्ति में "नारायण रूप" व "म्लेच्छों का नाशक" कहा गया; राजधानी भीनमाल (बाद में उज्जैन)
कक्कुक व देवराज—नागभट्ट प्रथम के भतीजे; अल्पकालीन शासन
वत्सराज783-795"रणहस्तिन"; बंगाल के पाल शासक धर्मपाल को हराया, पर राष्ट्रकूट ध्रुव से पराजित — त्रिपक्षीय संघर्ष का आरंभ; ओसियां का महावीर मंदिर; इसी काल में जालोर में उद्योतन सूरि ने "कुवलयमाला" (778) लिखी
नागभट्ट द्वितीय795-833चक्रायुध को हराकर कन्नौज जीता और उसे राजधानी बनाया; मुंगेर में धर्मपाल को हराया; राष्ट्रकूट गोविंद तृतीय से पराजित; गंगा में जल समाधि
रामभद्र833-836अल्पकालीन, कमज़ोर शासन
मिहिरभोज प्रथम836-885प्रतिहारों का सबसे प्रतापी शासक; उपाधियां "आदिवराह" व "प्रभास"; आदिवराह शैली के सिक्के; ग्वालियर प्रशस्ति; अरब यात्री सुलेमान (851) ने उसकी सेना की प्रशंसा की और उसे इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु बताया
महेंद्रपाल प्रथम885-910गुरु राजशेखर — "कर्पूरमंजरी", "काव्यमीमांसा"; साम्राज्य का अधिकतम विस्तार
महिपाल प्रथम912-944अरब यात्री अल मसूदी (915) ने यात्रा की; राष्ट्रकूट इंद्र तृतीय ने कन्नौज लूटा
राज्यपाल—1018 में महमूद गज़नवी के आक्रमण के समय कन्नौज छोड़कर भागा
यशपाल—अंतिम प्रतिहार शासक; इसके बाद गहड़वालों ने कन्नौज पर अधिकार किया
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त्रिपक्षीय संघर्ष

कन्नौज पर अधिकार के लिए 8वीं-10वीं सदी का संघर्ष

महत्वपूर्ण
पक्ष 1गुर्जर-प्रतिहार (पश्चिम)
पक्ष 2पाल (बंगाल, पूर्व)
पक्ष 3राष्ट्रकूट (दक्षिण)
आरंभवत्सराज के समय
अंतिम विजेताप्रतिहार (कन्नौज पर अधिकार)

प्रतिहारकालीन स्थापत्य

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) “आदिवराह” — मिहिरभोज; अरबों को रोका — नागभट्ट प्रथम। (2) त्रिपक्षीय संघर्ष — प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट (कन्नौज के लिए)। (3) मंडोर शाखा के संस्थापक — हरिश्चंद्र।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. प्रतिहार स्वयं को — लक्ष्मण का वंशज मानते थे।
  2. मंडोर शाखा के संस्थापक — हरिश्चंद्र; घटियाला शिलालेख — कक्कुक (861)।
  3. अरबों को रोकने वाला — नागभट्ट प्रथम।
  4. त्रिपक्षीय संघर्ष का आरंभ — वत्सराज; पक्ष — प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट।
  5. कन्नौज को राजधानी बनाया — नागभट्ट द्वितीय।
  6. "आदिवराह" — मिहिरभोज; अरब यात्री — सुलेमान (851)।
  7. राजशेखर के शिष्य — महेंद्रपाल प्रथम।
  8. कुवलयमाला (778, जालोर) — उद्योतन सूरि, वत्सराज के काल में।
  9. प्रतिहारकालीन मंदिर शैली — महामारू।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 प्रतिहार स्वयं को किसका वंशज मानते थे?

2 मंडोर की प्रतिहार शाखा के संस्थापक कौन थे?

3 अरब आक्रमणों को रोकने वाला प्रतिहार शासक कौन था?

4 त्रिपक्षीय संघर्ष किसके लिए हुआ?

5 "आदिवराह" उपाधि किस प्रतिहार शासक की थी?

6 कन्नौज को राजधानी किसने बनाया?

7 अरब यात्री सुलेमान ने किस शासक के समय यात्रा की?

8 राजशेखर किस प्रतिहार शासक के गुरु थे?

9 "कुवलयमाला" की रचना किस प्रतिहार शासक के समय हुई?

10 प्रतिहारकालीन मंदिर स्थापत्य शैली कौन-सी है?

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