राजस्थान के प्रमुख राजवंश
प्राचीन जनपदों के बाद 7वीं-8वीं सदी से राजस्थान में राजपूत राजवंशों का उदय हुआ। इन्होंने लगभग एक हज़ार वर्ष तक यहां शासन किया और विदेशी आक्रमणों का डटकर सामना किया। मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया, मारवाड़ के राठौड़ और आमेर के कछवाहा सबसे प्रमुख राजवंश रहे।
📑 विषय सूची 16 टॉपिक
- राजवंशों के विस्तृत पेज
- गुर्जर-प्रतिहार वंश
- गुर्जर-प्रतिहार
- चौहान वंश
- शाकंभरी-अजमेर के चौहान
- मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया
- गुहिल वंश (मेवाड़)
- राठौड़ वंश
- मारवाड़ (जोधपुर) के राठौड़
- बीकानेर के राठौड़
- कछवाहा वंश (आमेर-जयपुर)
- कछवाहा राजवंश
- अन्य प्रमुख राजवंश
- राजस्थान के नगरों की स्थापना
- वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- अभ्यास प्रश्न (MCQ)
राजवंशों के विस्तृत पेज
इस पेज पर सभी राजवंशों का सारांश है। हर राजवंश के विस्तृत नोट्स, तालिकाओं और MCQ के लिए नीचे दिए पेज खोलें:
🛡️ गुर्जर-प्रतिहार वंश
नागभट्ट, वत्सराज, मिहिरभोज, त्रिपक्षीय संघर्ष, मंडोर शाखा
🔥 परमार वंश
आबू (चंद्रावती), धारावर्ष, देलवाड़ा मंदिर, किराडू, वागड़ (अर्थूणा)
🦁 चौहान वंश
अजमेर, रणथंभौर, जालोर, नाडोल, सिरोही, बूंदी-कोटा के हाड़ा
⚔️ गुहिल-सिसोदिया (मेवाड़)
बप्पा रावल से कुंभा, सांगा, प्रताप, राजसिंह व भूपालसिंह तक
🦅 राठौड़ वंश (मारवाड़)
राव सीहा, जोधा, मालदेव, चंद्रसेन, दुर्गादास, मानसिंह
👑 कछवाहा वंश (आमेर-जयपुर)
दूल्हेराय, भारमल, मानसिंह, सवाई जयसिंह; अलवर के नरूका
🐫 राठौड़ वंश (बीकानेर)
राव बीका, लूणकरण, जैतसी, रायसिंह, अनूपसिंह, गंगासिंह
🏜️ भाटी वंश (जैसलमेर)
लोद्रवा, रावल जैसल, ढाई साके, हरराज, अखैसिंह
🛡️ जाट वंश (भरतपुर-धौलपुर)
गोकुला, चूड़ामन, बदनसिंह, सूरजमल, जवाहरसिंह, लोहागढ़
🏞️ अन्य राजवंश व रियासतें
झाला, यादव, टोंक, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, किशनगढ़; 19 रियासतों की तालिका
गुर्जर-प्रतिहार वंश
गुर्जर-प्रतिहार
मंडोर व भीनमाल (जालोर) से कन्नौज तक
- प्रतिहार स्वयं को लक्ष्मण का वंशज मानते थे (लक्ष्मण राम के प्रतिहार/द्वारपाल थे)। मंडोर शाखा के संस्थापक हरिश्चंद्र।
- नागभट्ट प्रथम ने 8वीं सदी में अरब आक्रमणों को रोका; राजधानी भीनमाल।
- वत्सराज — त्रिपक्षीय संघर्ष (कन्नौज के लिए प्रतिहार, पाल, राष्ट्रकूट) आरंभ; ओसियां के मंदिर।
- नागभट्ट द्वितीय ने कन्नौज को राजधानी बनाया।
- मिहिरभोज — सबसे प्रतापी शासक; उपाधि "आदिवराह"। अरब यात्री सुलेमान ने उसे इस्लाम का सबसे बड़ा शत्रु बताया।
- स्थापत्य की महामारू (गुर्जर-प्रतिहार) शैली इन्हीं के समय विकसित हुई।
चौहान वंश
शाकंभरी-अजमेर के चौहान
संस्थापक वासुदेव · मूल स्थान सांभर ("सपादलक्ष")
| शासक | प्रमुख उपलब्धि |
|---|---|
| वासुदेव | सांभर में चौहान वंश की स्थापना (लगभग 551 ई.); सांभर झील का निर्माता माना जाता है |
| अजयराज | 1113 ई. में अजमेर (अजयमेरु) बसाया; तारागढ़ (अजयमेरु दुर्ग) बनवाया |
| अर्णोराज (आनाजी) | अजमेर में आनासागर झील बनवाई; तुर्कों को हराया |
| विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) | चौहानों का स्वर्णकाल; दिल्ली पर अधिकार; "हरिकेलि" नाटक लिखा; अजमेर में संस्कृत पाठशाला (बाद में "ढाई दिन का झोपड़ा"); "कवि बांधव"; बीसलसर झील |
| पृथ्वीराज चौहान तृतीय | 1177-1192; "दल पुंगल", "राय पिथौरा"; तराइन प्रथम (1191) में मुहम्मद गौरी को हराया, तराइन द्वितीय (1192) में पराजित; मंत्री कदंबवास (कैमास); दरबारी कवि चंदबरदाई, जयानक |
🏰 रणथंभौर के चौहान
पृथ्वीराज तृतीय के पुत्र गोविंदराज ने स्थापना की। हम्मीर देव (1282-1301) — 17 युद्धों में से 16 जीते; 1301 में अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध में केसरिया, रानी रंगदेवी का जौहर।
⛰️ जालोर के चौहान (सोनगरा)
संस्थापक कीर्तिपाल ("कीतू — एक महान राजा", नैणसी)। कान्हड़देव ने 1311-12 में अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध किया; पुत्र वीरमदेव।
🐅 हाड़ा चौहान (बूंदी-कोटा)
बूंदी — देवा हाड़ा ने 1241 में स्थापना की। कोटा — 1631 में शाहजहां ने माधोसिंह को बूंदी से अलग कर कोटा रियासत दी। हाड़ा शासकों के क्षेत्र को "हाड़ौती" कहा गया।
🗻 सिरोही के चौहान (देवड़ा)
देवड़ा चौहान शाखा; सहसमल ने 1425 में सिरोही नगर बसाया। राव सुरताण ने अकबर से दत्ताणी का युद्ध (1583) जीता।
मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया
गुहिल वंश (मेवाड़)
संस्थापक गुहादित्य (566 ई.) · विश्व के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले राजवंशों में एक
| शासक | प्रमुख उपलब्धि |
|---|---|
| बप्पा रावल (कालभोज) | 734 ई. में मान मोरी से चित्तौड़ जीता; हारीत ऋषि के शिष्य; एकलिंगजी मंदिर; राजधानी नागदा; अरबों को हराया |
| रावल रतनसिंह | 1303 में अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण; रानी पद्मिनी का जौहर; गोरा-बादल |
| महाराणा हम्मीर | सिसोदा शाखा; 1326 में चित्तौड़ पुनः जीता; "मेवाड़ का उद्धारक", "विषम घाटी पंचानन"; सिंगोली युद्ध में मुहम्मद तुगलक को हराया |
| महाराणा लाखा | जावर में चांदी की खान; पिछोला झील (एक बंजारे द्वारा) बनी |
| महाराणा मोकल | शृंगी ऋषि शिलालेख; समिद्धेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार |
| महाराणा कुंभा (1433-68) | सारंगपुर युद्ध (1437) में महमूद खिलजी को हराया; विजय स्तंभ; 84 में से 32 दुर्ग बनवाए (कुंभलगढ़, अचलगढ़); संगीतराज; "हिंदू सुरताण", "अभिनव भरताचार्य"; पुत्र ऊदा ने हत्या की |
| राणा सांगा (1509-28) | खातोली (1517) व बाड़ी (1518) में इब्राहिम लोदी को, गागरोन (1519) में महमूद खिलजी द्वितीय को हराया; बयाना (1527) जीता, खानवा (1527) में बाबर से पराजित; शरीर पर 80 घाव; "हिंदूपत"; 1528 में कालपी में मृत्यु (विष) |
| महाराणा उदयसिंह | पन्नाधाय ने बचपन में बचाया; 1559 में उदयपुर की स्थापना; उदयसागर झील |
| महाराणा प्रताप (1572-97) | गोगुंदा में राज्याभिषेक (1572); हल्दीघाटी (1576); दिवेर (1582) की विजय; राजधानी चावंड; घोड़ा चेतक; भामाशाह का सहयोग |
| महाराणा अमरसिंह प्रथम | 1615 में जहांगीर (खुर्रम) से मुगल-मेवाड़ संधि |
| महाराणा राजसिंह | राजसमंद झील व राजप्रशस्ति; औरंगजेब के जज़िया का विरोध; किशनगढ़ की चारुमती से विवाह; श्रीनाथजी की स्थापना |
राठौड़ वंश
मारवाड़ (जोधपुर) के राठौड़
संस्थापक राव सीहा · कुलदेवी नागणेची
| शासक | प्रमुख उपलब्धि |
|---|---|
| राव सीहा | मारवाड़ में राठौड़ वंश के संस्थापक; पाली क्षेत्र |
| राव चूंडा | मंडोर को राजधानी बनाया |
| राव जोधा | 12 मई 1459 को जोधपुर बसाया; मेहरानगढ़ (चिड़ियाटूंक) |
| राव मालदेव (1532-62) | "हशमत वाला राजा"; पाहेबा (साहेबा) युद्ध (1541) में बीकानेर के जैतसी को हराया; गिरि-सुमेल (1544) में शेरशाह से पराजित — शेरशाह: "मुट्ठी भर बाजरे के लिए मैं हिंदुस्तान की बादशाहत खो देता"; जैता-कूंपा का बलिदान |
| राव चंद्रसेन | अकबर की अधीनता अस्वीकार; "मारवाड़ का प्रताप", "भूला-बिसरा राजा" |
| मोटा राजा उदयसिंह | अकबर की अधीनता स्वीकार; पुत्री मानीबाई (जगत गुसाईं) का विवाह जहांगीर से |
| जसवंतसिंह प्रथम | धरमत युद्ध (1658) में औरंगजेब से पराजित; दीवान मुहणोत नैणसी |
| अजीतसिंह | वीर दुर्गादास राठौड़ ने औरंगजेब से बचाकर पाला व गद्दी दिलाई |
| महाराजा मानसिंह | नाथ संप्रदाय के अनुयायी; महामंदिर |
| उम्मेदसिंह | उम्मेद भवन (1929-43) |
बीकानेर के राठौड़
संस्थापक राव बीका (1488) · करणी माता का आशीर्वाद
- राव बीका (राव जोधा के पुत्र) ने 1488 में बीकानेर बसाया (जांगल प्रदेश)।
- राव जैतसी ने 1534 में बाबर के पुत्र कामरान को हराया (राव जैतसी रो छंद); 1541 में मालदेव से पाहेबा युद्ध में मारे गए।
- राजा रायसिंह — जूनागढ़ दुर्ग; मुंशी देवीप्रसाद ने इन्हें "राजपूताने का कर्ण" कहा।
- अनूपसिंह — संस्कृत विद्वान; अनूप संस्कृत पुस्तकालय।
- महाराजा गंगासिंह — गंगनहर (1927); प्रथम विश्व युद्ध में "गंगा रिसाला"; तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग; "आधुनिक भारत का भगीरथ"।
कछवाहा वंश (आमेर-जयपुर)
कछवाहा राजवंश
संस्थापक दूल्हेराय (ढूंढाड़, 1137 के आसपास) · स्वयं को राम के पुत्र कुश का वंशज मानते
| शासक | प्रमुख उपलब्धि |
|---|---|
| दूल्हेराय | मीणाओं को हराकर दौसा में कछवाहा राज्य की स्थापना |
| कोकिलदेव | आमेर को राजधानी बनाया |
| भारमल | 1562 में अकबर की अधीनता स्वीकार करने वाले पहले राजपूत शासक; पुत्री हरखाबाई का विवाह अकबर से |
| मानसिंह प्रथम | अकबर के नवरत्नों में; 7000 का मनसब; हल्दीघाटी में मुगल सेनापति; शिला देवी की प्रतिमा लाए; आमेर महल |
| मिर्ज़ा राजा जयसिंह | पुरंदर की संधि (1665) — शिवाजी से |
| सवाई जयसिंह द्वितीय | 1727 में जयपुर की स्थापना (वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य); 5 जंतर-मंतर (जयपुर, दिल्ली, उज्जैन, मथुरा, वाराणसी); अश्वमेध यज्ञ; हुरड़ा सम्मेलन (1734) |
| ईश्वरीसिंह | राजमहल युद्ध (1747) में विजय; विजय स्मारक ईसरलाट (सरगासूली) |
| सवाई प्रतापसिंह | हवा महल (1799); "ब्रजनिधि" नाम से काव्य रचना; चित्रकला का स्वर्णकाल |
| सवाई रामसिंह द्वितीय | 1857 में अंग्रेज़ों का साथ; जयपुर को गुलाबी रंगवाया (1876); अल्बर्ट हॉल; मेयो अस्पताल |
अन्य प्रमुख राजवंश
🏜️ भाटी (जैसलमेर)
रावल जैसल ने 1155 में जैसलमेर बसाया (पहले राजधानी लोद्रवा)। भाटियों को "उत्तर भड़ किवाड़" (उत्तरी सीमा के रक्षक) कहा गया।
🛡️ जाट (भरतपुर-धौलपुर)
चूड़ामन, बदनसिंह, सूरजमल। सूरजमल — लोहागढ़ (1733) व डीग के महल; "जाटों का प्लेटो / अफलातून"। धौलपुर में भी जाट राजवंश।
🏞️ झाला (झालावाड़)
1838 में कोटा से अलग कर झाला मदनसिंह को झालावाड़ रियासत दी गई — राजस्थान की सबसे नवीन रियासत।
⚔️ नरूका (अलवर)
कछवाहों की नरूका शाखा; प्रतापसिंह ने 1775 में अलवर राज्य की स्थापना की।
🌿 यादव (करौली)
यदुवंशी राजवंश; कुलदेवी कैला देवी; राजा विजयपाल प्रसिद्ध शासक।
🏔️ परमार
आबू, जालोर, किराडू व बांसवाड़ा क्षेत्र में शासन; आबू के परमारों की राजधानी चंद्रावती।
🕌 नवाब (टोंक)
अमीर खां पिंडारी को 1817 में अंग्रेज़ों ने टोंक रियासत दी — राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत।
राजस्थान के नगरों की स्थापना
| नगर | संस्थापक | वर्ष |
|---|---|---|
| अजमेर | अजयराज चौहान | 1113 |
| जैसलमेर | रावल जैसल | 1155 |
| जोधपुर | राव जोधा | 1459 |
| बीकानेर | राव बीका | 1488 |
| उदयपुर | महाराणा उदयसिंह | 1559 |
| जयपुर | सवाई जयसिंह द्वितीय | 1727 |
| अलवर (राज्य) | प्रतापसिंह नरूका | 1775 |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) प्रतिहार — मंडोर, भीनमाल, कन्नौज; चौहान — सांभर, अजमेर। (2) गुहिल-सिसोदिया — मेवाड़; राठौड़ — मारवाड़ व बीकानेर; कछवाहा — आमेर-जयपुर। (3) भाटी — जैसलमेर; जाट — भरतपुर-धौलपुर; हाड़ा — बूंदी-कोटा।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- "आदिवराह" — मिहिरभोज (प्रतिहार)।
- अजमेर के संस्थापक — अजयराज (1113); आनासागर — अर्णोराज।
- "हरिकेलि" नाटक, ढाई दिन का झोपड़ा (पूर्व में संस्कृत पाठशाला) — विग्रहराज चतुर्थ।
- तराइन प्रथम (1191) विजय, द्वितीय (1192) पराजय — पृथ्वीराज चौहान तृतीय।
- "मेवाड़ का उद्धारक" — महाराणा हम्मीर।
- सारंगपुर (1437) व विजय स्तंभ — कुंभा; 84 में से 32 दुर्ग।
- खानवा (1527) — राणा सांगा vs बाबर।
- "मारवाड़ का प्रताप" — राव चंद्रसेन; "हशमत वाला राजा" — मालदेव।
- अकबर की अधीनता स्वीकारने वाला पहला शासक — भारमल (1562)।
- जयपुर के वास्तुकार — विद्याधर भट्टाचार्य; हुरड़ा सम्मेलन — 1734।
- "राजपूताने का कर्ण" — रायसिंह; "जाटों का प्लेटो" — सूरजमल।
- सबसे नवीन रियासत — झालावाड़ (1838); एकमात्र मुस्लिम रियासत — टोंक।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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1 अजमेर नगर की स्थापना किसने की?
2 "हरिकेलि" नाटक के रचयिता कौन थे?
3 "मेवाड़ का उद्धारक" किसे कहा जाता है?
4 सारंगपुर का युद्ध (1437) किनके बीच हुआ?
5 अकबर की अधीनता स्वीकार करने वाला पहला राजपूत शासक कौन था?
6 गिरि-सुमेल का युद्ध (1544) किनके बीच हुआ?
7 जयपुर नगर के वास्तुकार कौन थे?
8 "राजपूताने का कर्ण" किसे कहा जाता है?
9 राजस्थान की सबसे नवीन रियासत कौनसी थी?
10 "जाटों का प्लेटो" किसे कहा जाता है?