राजस्थान इतिहास के साहित्यिक स्रोत

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पुरातात्विक स्रोतों (शिलालेख, सिक्के, ताम्रपत्र) के साथ-साथ साहित्यिक स्रोत भी राजस्थान के इतिहास की महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। इनमें संस्कृत के ऐतिहासिक काव्य, सल्तनत व मुगल काल के फारसी इतिहास ग्रंथ, राजस्थानी भाषा की ख्यातें, वातें, वचनिकाएं व रासो तथा 19वीं-20वीं सदी के आधुनिक इतिहासकारों के ग्रंथ प्रमुख हैं। इन स्रोतों में कई बार अतिशयोक्ति भी मिलती है, इसलिए इतिहासकार इन्हें अन्य स्रोतों से मिलाकर पढ़ते हैं। अन्य स्रोतों के लिए शिलालेख व सिक्के पेज देखें।

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कर्नल टॉड
राजस्थान इतिहास के पितामह
📜
नैणसी
राजपूताने का अबुल फज़ल
📗
वंश भास्कर
सूर्यमल्ल मिश्रण (बूंदी)
📕
वीर विनोद
कविराजा श्यामलदास
📑 विषय सूची 10 टॉपिक

संस्कृत के ऐतिहासिक ग्रंथ

ग्रंथरचनाकारविषय / महत्व
पृथ्वीराज विजयजयानक (कश्मीरी पंडित)अजमेर के चौहानों का इतिहास व पृथ्वीराज तृतीय की उपलब्धियां — चौहान इतिहास का सबसे प्रामाणिक ग्रंथ PYQ
हम्मीर महाकाव्यनयनचंद्र सूरि (जैन मुनि)रणथंभौर के हम्मीर चौहान का जीवन व अलाउद्दीन खिलजी से संघर्ष
राजवल्लभमंडन (कुंभा के शिल्पी)वास्तुशास्त्र — भवन, दुर्ग व मंदिर निर्माण
एकलिंग माहात्म्यकान्ह व्यासमेवाड़ के गुहिलों की वंशावली व एकलिंगजी का महत्व
अमरकाव्य वंशावलीरणछोड़ भट्टमेवाड़ के महाराणाओं (विशेषकर अमरसिंह) का इतिहास
राजविनोदसदाशिव भट्टबीकानेर के राव कल्याणमल के समय की जानकारी
कर्मचंद्र वंशोत्कीर्तनकम्जयसोमबीकानेर के राठौड़ शासकों व मंत्री कर्मचंद का वर्णन
अजितोदयजगजीवन भट्टमारवाड़ के अजीतसिंह व दुर्गादास का मुगलों से संघर्ष

फारसी के ऐतिहासिक ग्रंथ

ग्रंथलेखकराजस्थान से संबंधित जानकारी
ताजुल मासिरहसन निज़ामीतराइन के युद्ध व मुहम्मद गौरी-कुतुबुद्दीन ऐबक के अभियान
तबकात-ए-नासिरीमिनहाज-उस-सिराजतराइन युद्ध व प्रारंभिक सल्तनत
खज़ाइन-उल-फुतूहअमीर खुसरोअलाउद्दीन खिलजी के रणथंभौर (1301) व चित्तौड़ (1303) अभियान — खुसरो चित्तौड़ अभियान में साथ था PYQ
तुज़ुक-ए-बाबरी (बाबरनामा)बाबर (तुर्की भाषा)खानवा युद्ध (1527) व राणा सांगा का वर्णन
अकबरनामा व आईन-ए-अकबरीअबुल फज़लअकबर की राजपूत नीति, हल्दीघाटी व राजपूत राज्यों का विवरण
मुंतखब-उत-तवारीखअब्दुल कादिर बदायूंनीहल्दीघाटी युद्ध (1576) का प्रत्यक्षदर्शी वर्णन PYQ
तुज़ुक-ए-जहांगीरीजहांगीरमेवाड़-मुगल संधि (1615) व अमरसिंह का वर्णन

ऐतिहासिक राजस्थानी साहित्य की विधाएं

विधाअर्थउदाहरण
ख्यातकिसी वंश या राज्य का क्रमबद्ध गद्य इतिहासनैणसी री ख्यात, दयालदास री ख्यात
बात (वात)ऐतिहासिक या पौराणिक घटना का कथा रूप में वर्णनराजपूत वीरों की बातें
विगतकिसी विषय का विस्तृत आंकड़ों सहित विवरणमारवाड़ रा परगना री विगत
वचनिकागद्य-पद्य मिश्रित तुकांत रचनाअचलदास खींची री वचनिका
रासोराजाओं के युद्ध व वीरता का काव्यपृथ्वीराज रासो, बीसलदेव रासो
वंशावली / पीढ़ियावलीराजवंशों की पीढ़ी-दर-पीढ़ी सूचीराठौड़ वंशावली

प्रमुख ख्यातें

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मुहणोत नैणसी

जोधपुर के महाराजा जसवंतसिंह प्रथम के दीवान · "राजपूताने का अबुल फज़ल"

PYQ
  • नैणसी री ख्यात — राजस्थान व आसपास के राजपूत वंशों का क्रमबद्ध इतिहास; राजस्थानी गद्य की श्रेष्ठ रचना।
  • मारवाड़ रा परगना री विगत — मारवाड़ के परगनों की जनसंख्या, जातियां, फसल, भू-राजस्व का विवरण — "राजस्थान का गजेटियर"।
  • मुंशी देवीप्रसाद ने नैणसी को "राजपूताने का अबुल फज़ल" कहा।
  • जसवंतसिंह प्रथम से मतभेद के कारण कैद में रखे गए; बाद में आत्महत्या कर ली।
ख्यातरचनाकारविशेष
दयालदास री ख्यातदयालदास सिंढायचबीकानेर के राठौड़ों का इतिहास (महाराजा रतनसिंह के समय)
बांकीदास री ख्यातबांकीदासजोधपुर के महाराजा मानसिंह के समय; राजस्थान के इतिहास पर लगभग 2000 टिप्पणियां
मुंडियार री ख्यातअज्ञातमारवाड़ के राठौड़ों का इतिहास
जोधपुर राज्य की ख्यात—मारवाड़ के शासकों का क्रमबद्ध विवरण

ऐतिहासिक काव्य, वचनिका व रासो

ग्रंथरचनाकारविषय
पृथ्वीराज रासोचंदबरदाईपृथ्वीराज चौहान का जीवन; अग्निकुंड से राजपूतों की उत्पत्ति; पिंगल शैली
बीसलदेव रासोनरपति नाल्हबीसलदेव (विग्रहराज चतुर्थ) व रानी राजमती की प्रेम कथा
अचलदास खींची री वचनिकाशिवदास गाडणगागरोन के अचलदास खींची व मांडू के सुल्तान होशंगशाह का युद्ध (1423)
राठौड़ रतनसिंह री वचनिकाजग्गा खिड़ियाधरमत युद्ध (1658) में रतलाम के रतनसिंह राठौड़ का बलिदान
कान्हड़दे प्रबंधपद्मनाभजालोर के कान्हड़देव व अलाउद्दीन खिलजी का संघर्ष
वंश भास्करसूर्यमल्ल मिश्रणबूंदी के हाड़ा राजवंश का इतिहास (महाराव रामसिंह के समय); अधूरे ग्रंथ को दत्तक पुत्र मुरारीदान ने पूरा किया
वीर सतसईसूर्यमल्ल मिश्रण1857 के संदर्भ में वीर रस के दोहे

आधुनिक इतिहासकार

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कर्नल जेम्स टॉड

"राजस्थान इतिहास के पितामह" · मेवाड़ के पॉलिटिकल एजेंट (1818-1822)

अति महत्वपूर्ण
  • प्रसिद्ध ग्रंथ — "एनल्स एंड एंटिक्विटीज़ ऑफ राजस्थान" (दो खंड — 1829 व 1832, लंदन से प्रकाशित)।
  • दूसरा ग्रंथ — "ट्रैवल्स इन वेस्टर्न इंडिया"।
  • इनके गुरु — यति ज्ञानचंद्र (जैन यति), जिन्होंने प्राचीन ग्रंथ व शिलालेख पढ़ने में सहायता की।
  • "राजस्थान" शब्द को लोकप्रिय बनाया; अपने ग्रंथ में इस क्षेत्र को "रायथान" भी कहा।
  • उन्होंने मानमोरी शिलालेख को इंग्लैंड ले जाते समय भारी होने के कारण समुद्र में फेंक दिया था।

📕 कविराजा श्यामलदास

"वीर विनोद" — मेवाड़ का विस्तृत इतिहास; महाराणा सज्जनसिंह के समय लिखा गया; अंग्रेज़ों ने "कैसर-ए-हिंद" की उपाधि दी।

📗 गौरीशंकर हीराचंद ओझा

जन्म — रोहिड़ा (सिरोही); "राजपूताने का इतिहास"; "भारतीय प्राचीन लिपिमाला" — लिपि विज्ञान का प्रसिद्ध ग्रंथ।

📙 मुंशी देवीप्रसाद

मुगल व राजपूत इतिहास पर अनेक ग्रंथ; नैणसी को "राजपूताने का अबुल फज़ल" कहा।

📒 दशरथ शर्मा

"अर्ली चौहान डायनेस्टीज़" — चौहान इतिहास पर प्रसिद्ध ग्रंथ।

📓 जी.एन. शर्मा

राजस्थान के सामाजिक-सांस्कृतिक इतिहास के प्रमुख इतिहासकार; "मेवाड़ एंड द मुगल एम्परर्स"।

📔 विश्वेश्वरनाथ रेऊ

"मारवाड़ का इतिहास" — जोधपुर राज्य का विस्तृत इतिहास।

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) पृथ्वीराज विजय (जयानक, संस्कृत) व पृथ्वीराज रासो (चंदबरदाई, पिंगल) अलग ग्रंथ हैं। (2) हल्दीघाटी का प्रत्यक्षदर्शी — बदायूंनी, अबुल फज़ल नहीं। (3) "राजस्थान का गजेटियर" — मारवाड़ रा परगना री विगत, नैणसी री ख्यात नहीं। (4) "वीर विनोद" — श्यामलदास; "वीर सतसई" — सूर्यमल्ल मिश्रण।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. पृथ्वीराज विजय — जयानक; हम्मीर महाकाव्य — नयनचंद्र सूरि।
  2. राजवल्लभ — मंडन; एकलिंग माहात्म्य — कान्ह व्यास।
  3. अमरकाव्य वंशावली — रणछोड़ भट्ट; अजितोदय — जगजीवन भट्ट।
  4. ताजुल मासिर — हसन निज़ामी; तबकात-ए-नासिरी — मिनहाज।
  5. खज़ाइन-उल-फुतूह — अमीर खुसरो (रणथंभौर व चित्तौड़ अभियान)।
  6. खानवा युद्ध का वर्णन — तुज़ुक-ए-बाबरी।
  7. हल्दीघाटी का प्रत्यक्षदर्शी — बदायूंनी (मुंतखब-उत-तवारीख)।
  8. "राजपूताने का अबुल फज़ल" — मुहणोत नैणसी (मुंशी देवीप्रसाद द्वारा)।
  9. "राजस्थान का गजेटियर" — मारवाड़ रा परगना री विगत।
  10. दयालदास री ख्यात — बीकानेर; बांकीदास री ख्यात — मानसिंह (जोधपुर)।
  11. अचलदास खींची री वचनिका — शिवदास गाडण; राठौड़ रतनसिंह री वचनिका — जग्गा खिड़िया।
  12. कान्हड़दे प्रबंध — पद्मनाभ; बीसलदेव रासो — नरपति नाल्ह।
  13. वंश भास्कर — सूर्यमल्ल मिश्रण (बूंदी); पूर्ण किया — मुरारीदान।
  14. "राजस्थान इतिहास के पितामह" — कर्नल जेम्स टॉड; गुरु — यति ज्ञानचंद्र।
  15. "वीर विनोद" — श्यामलदास; "राजपूताने का इतिहास" — गौरीशंकर हीराचंद ओझा।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 "पृथ्वीराज विजय" के रचयिता कौन हैं?

2 "हम्मीर महाकाव्य" के रचयिता कौन हैं?

3 "राजवल्लभ" ग्रंथ किस विषय से संबंधित है?

4 "खज़ाइन-उल-फुतूह" के लेखक कौन हैं?

5 हल्दीघाटी युद्ध का प्रत्यक्षदर्शी इतिहासकार कौन था?

6 खानवा युद्ध का वर्णन किस ग्रंथ में मिलता है?

7 "राजपूताने का अबुल फज़ल" किसे कहा गया?

8 "राजस्थान का गजेटियर" किस ग्रंथ को कहा जाता है?

9 "अचलदास खींची री वचनिका" के रचयिता कौन हैं?

10 "कान्हड़दे प्रबंध" किस शासक से संबंधित है?

11 "बीसलदेव रासो" के रचयिता कौन हैं?

12 "वंश भास्कर" के रचयिता कौन हैं?

13 "एनल्स एंड एंटिक्विटीज़ ऑफ राजस्थान" के लेखक कौन हैं?

14 "वीर विनोद" किस महाराणा के समय लिखा गया?

15 "राजपूताने का इतिहास" के लेखक कौन हैं?

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