राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएं
राजस्थान में देश के कुल सतही जल का लगभग 1% ही उपलब्ध है, जबकि क्षेत्रफल 10% से अधिक है। इसलिए सिंचाई के लिए राज्य को भूजल और पड़ोसी राज्यों से आने वाली नदियों के जल पर बनी अंतरराज्यीय परियोजनाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। इंदिरा गांधी नहर को राजस्थान की "मरुगंगा" और "जीवन रेखा" कहा जाता है।
📑 विषय सूची 9 टॉपिक
सिंचाई के साधन
| साधन | स्थान | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|---|
| कुएं व नलकूप | प्रथम (सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र) | जयपुर, अलवर, भरतपुर, जोधपुर, नागौर — पूर्वी व मध्य राजस्थान |
| नहरें | द्वितीय | श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, कोटा, बूंदी |
| तालाब | तृतीय | भीलवाड़ा, उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ — दक्षिण-पूर्वी पठारी भाग |
- राज्य में नहरों से सर्वाधिक सिंचाई श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में होती है।
- भूजल के अत्यधिक दोहन से राज्य के अधिकांश ब्लॉक "अति-दोहित" (डार्क ज़ोन) श्रेणी में हैं।
- जल बचत हेतु बूंद-बूंद (ड्रिप) व फव्वारा (स्प्रिंकलर) सिंचाई को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इंदिरा गांधी नहर परियोजना
इंदिरा गांधी नहर
मरुगंगा · राजस्थान की जीवन रेखा · विश्व की बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में
- मुख्य नहर मोहनगढ़ (जैसलमेर) तक जाती है; अंतिम छोर पर गडरा रोड (बाड़मेर) तक शाखाएं।
- पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के बीच बहने वाले फीडर से पानी आता है; जल मुख्यतः रावी-व्यास नदियों का (पौंग बांध से)।
- दो चरणों में निर्मित — प्रथम चरण पूगल (बीकानेर) तक; द्वितीय चरण पूगल से मोहनगढ़ तक।
- इससे जुड़ी 7 लिफ्ट नहरें — चौधरी कुंभाराम आर्य, कंवरसेन, पन्नालाल बारूपाल, वीर तेजाजी, डॉ. करणीसिंह, गुरु जंभेश्वर, जयनारायण व्यास (लिफ्ट नहरों से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पानी पहुंचाया जाता है)।
- लाभ — मरुस्थल में हरियाली, पेयजल, कृषि विस्तार, मरुस्थल प्रसार पर रोक; समस्याएं — सेम (जलभराव), लवणीयता, मलेरिया।
प्रमुख अंतरराज्यीय परियोजनाएं
| परियोजना | नदी | साझेदार / हिस्सा | प्रमुख तथ्य |
|---|---|---|---|
| गंग नहर | सतलुज | बीकानेर रियासत | महाराजा गंगासिंह; 26 अक्टूबर 1927 को उद्घाटन; हुसैनीवाला (फिरोजपुर) से; राज्य की प्रथम नहर परियोजना; शिवपुर हैड (श्रीगंगानगर) में प्रवेश |
| भाखड़ा-नांगल | सतलुज | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान (राज. का हिस्सा 15.22%) | भाखड़ा बांध (हिमाचल) — गोविंद सागर जलाशय; नेहरू ने "पुनरुत्थित भारत का नवीन मंदिर" कहा |
| व्यास परियोजना | व्यास | पंजाब, हरियाणा, राजस्थान | पौंग बांध (हिमाचल) व पंडोह बांध; इंदिरा गांधी नहर को जल |
| चंबल परियोजना | चंबल | राजस्थान-मप्र 50 : 50 | तीन चरण — गांधी सागर (मप्र), राणा प्रताप सागर (रावतभाटा), जवाहर सागर (कोटा) व कोटा बैराज |
| माही बजाज सागर | माही | राजस्थान-गुजरात 45 : 55 | बोरखेड़ा (बांसवाड़ा) में बांध; जमनालाल बजाज के नाम पर; गुजरात में कडाना बांध; आदिवासी क्षेत्र की प्रमुख परियोजना |
| नर्मदा नहर | नर्मदा | गुजरात, मप्र, महाराष्ट्र, राजस्थान | सरदार सरोवर बांध (गुजरात) से; सीलू (जालोर) में प्रवेश; जालोर-बाड़मेर लाभान्वित; सिंचाई केवल फव्वारा/ड्रिप पद्धति से अनिवार्य करने वाली पहली परियोजना |
राज्य की अन्य प्रमुख परियोजनाएं
| परियोजना / बांध | नदी | जिला | विशेष |
|---|---|---|---|
| बीसलपुर | बनास | टोंक | जयपुर, अजमेर व टोंक को पेयजल; राज्य की प्रमुख पेयजल परियोजना |
| जवाई बांध | जवाई | पाली (सुमेरपुर) | "मारवाड़ का अमृत सरोवर"; पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बांध |
| जाखम | जाखम | प्रतापगढ़ | आदिवासी क्षेत्र में सिंचाई; राज्य का सबसे ऊंचा बांध माना जाता है |
| मेजा बांध | कोठारी | भीलवाड़ा | भीलवाड़ा शहर को पेयजल; "मेजा पार्क" |
| सोम-कमला-अंबा | सोम | डूंगरपुर | आदिवासी क्षेत्र |
| भीखाभाई सागवाड़ा नहर | माही | डूंगरपुर | वागड़ क्षेत्र में सिंचाई |
| सिद्धमुख-नोहर | रावी-व्यास का अतिरिक्त जल | हनुमानगढ़, चूरू | राजीव गांधी सिद्धमुख-नोहर सिंचाई परियोजना |
| ईसरदा | बनास | सवाई माधोपुर-टोंक | सवाई माधोपुर व दौसा को पेयजल |
संशोधित PKC-ERCP (राम जल सेतु लिंक परियोजना)
पार्वती-कालीसिंध-चंबल व पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना का एकीकरण
- पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को मध्यप्रदेश की पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से जोड़कर नदी जोड़ो परियोजना के रूप में विकसित किया गया।
- जनवरी 2024 में केंद्र, राजस्थान व मध्यप्रदेश के बीच समझौता (MoA) हुआ; 17 दिसंबर 2024 को जयपुर में प्रधानमंत्री ने शिलान्यास किया।
- उद्देश्य — पूर्वी राजस्थान के अनेक जिलों को पेयजल, सिंचाई व उद्योगों के लिए जल उपलब्ध कराना।
जल संरक्षण अभियान व नीति
💧 मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान
27 जनवरी 2016 से प्रारंभ; गांवों को जल आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य। 2024 से इसका दूसरा चरण (MJSA 2.0)।
📜 राज्य जल नीति
राजस्थान राज्य जल नीति — 2010।
🏺 परंपरागत जल स्रोत
टांका, कुंड, नाडी, जोहड़, बेरी, खड़ीन, बावड़ी — विस्तार से बावड़ियां व कुंड पेज पर।
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) IGNP का उद्गम — हरिके बैराज; राजस्थान में प्रवेश — मसीतावाली हैड। (2) चंबल — 50:50 (राज.-मप्र); माही — 45:55 (राज.-गुजरात)। (3) गंग नहर — 1927, गंगासिंह; भाखड़ा में राज. का हिस्सा — 15.22%।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- सिंचाई का प्रमुख साधन — कुएं व नलकूप; तालाब सिंचाई — भीलवाड़ा।
- इंदिरा गांधी नहर के जनक — कंवरसेन; शिलान्यास — 31 मार्च 1958।
- इंदिरा गांधी नहर का उद्गम — हरिके बैराज; प्रवेश — मसीतावाली हैड।
- राजस्थान नहर का नाम इंदिरा गांधी नहर — 2 नवंबर 1984।
- गंग नहर — महाराजा गंगासिंह, 1927; राज्य की प्रथम नहर परियोजना।
- भाखड़ा-नांगल में राजस्थान का हिस्सा — 15.22%।
- चंबल — 50:50 (राज.-मप्र); माही — 45:55 (राज.-गुजरात)।
- नर्मदा नहर का प्रवेश — सीलू (जालोर); ड्रिप/फव्वारा अनिवार्य।
- "मारवाड़ का अमृत सरोवर" — जवाई बांध; जयपुर का पेयजल — बीसलपुर।
- PKC-ERCP (राम जल सेतु) शिलान्यास — 17 दिसंबर 2024।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 राजस्थान में सिंचाई का प्रमुख साधन कौन-सा है?
2 इंदिरा गांधी नहर के जनक कौन माने जाते हैं?
3 इंदिरा गांधी नहर का उद्गम कहां से होता है?
4 इंदिरा गांधी नहर राजस्थान में कहां प्रवेश करती है?
5 गंग नहर का निर्माण किसने करवाया?
6 भाखड़ा-नांगल परियोजना में राजस्थान का हिस्सा कितना है?
7 चंबल परियोजना में राजस्थान व मध्यप्रदेश का हिस्सा किस अनुपात में है?
8 माही बजाज सागर बांध किस जिले में है?
9 नर्मदा नहर राजस्थान में कहां प्रवेश करती है?
10 "मारवाड़ का अमृत सरोवर" किसे कहा जाता है?