राजस्थान के जनजाति आंदोलन
दक्षिणी राजस्थान के भील, गरासिया और पूर्वी राजस्थान के मीणा समुदायों ने अंग्रेज़ों, रियासतों और जागीरदारों के शोषण, बेगार व भारी करों के विरुद्ध संघर्ष किया। इन आंदोलनों ने सामाजिक सुधार और राजनीतिक चेतना दोनों का संदेश दिया।
📑 विषय सूची 11 टॉपिक
प्रारंभिक भील व मेर विद्रोह
- भील विद्रोह (1818 के बाद): मेवाड़-अंग्रेज़ संधि (1818) के बाद भीलों पर नियंत्रण बढ़ा और उनके परंपरागत अधिकार (बोलाई, रखवाली) छीने गए; भीलों ने विद्रोह किया।
- भीलों को नियंत्रित करने हेतु 1841 में खेरवाड़ा में मेवाड़ भील कोर का गठन हुआ।
- मेर विद्रोह (1818-21): अजमेर-मेरवाड़ा क्षेत्र के मेरों ने अंग्रेज़ी नियंत्रण का विरोध किया; विद्रोह दबाकर मेरवाड़ा बटालियन बनाई गई; कर्नल डिक्सन ने ब्यावर नगर बसाया।
भगत आंदोलन
गोविंद गुरु व भगत आंदोलन
भीलों में सामाजिक-धार्मिक सुधार · मानगढ़ धाम
- गोविंद गुरु ने भीलों को शराब, मांस, चोरी छोड़ने, स्वच्छता और एकता का संदेश दिया; अनुयायी "भगत" कहलाए। उपासना के लिए "धूणी" स्थापित की गई।
- संप सभा (संप = एकता) के माध्यम से बेगार व शोषण का विरोध किया।
- 17 नवंबर 1913 (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) को मानगढ़ पहाड़ी (बांसवाड़ा) पर एकत्र हज़ारों भीलों पर अंग्रेज़ी सेना ने गोलीबारी की; लगभग 1500 लोग मारे गए। इसे "राजस्थान का जलियांवाला बाग" कहा जाता है।
- गोविंद गुरु को गिरफ्तार कर फांसी की सज़ा सुनाई गई, जो बाद में कारावास में बदल दी गई।
एकी आंदोलन
मोतीलाल तेजावत व एकी (भोमट) आंदोलन
"आदिवासियों का मसीहा" · "बावजी"
- मोतीलाल तेजावत का जन्म कोलियारी (उदयपुर) में हुआ; वे झाड़ोल ठिकाने में कामदार थे।
- 1921 में मातृकुंडिया (चित्तौड़गढ़) से एकी आंदोलन आरंभ किया — बेगार, लाग-बाग और जागीरदारों के शोषण के विरुद्ध भीलों को एक (संगठित) करना।
- यह आंदोलन मेवाड़ के भोमट क्षेत्र में फैला, इसलिए इसे "भोमट भील आंदोलन" भी कहते हैं।
- 7 मार्च 1922 को नीमड़ा (विजयनगर, गुजरात सीमा) में सभा पर गोलीबारी — सैकड़ों भील मारे गए (नीमड़ा हत्याकांड)।
- तेजावत भूमिगत रहे; 1929 में गांधीजी की सलाह पर आत्मसमर्पण किया।
मीणा आंदोलन
मीणा आंदोलन
जरायम पेशा कानून के विरुद्ध संघर्ष
- अंग्रेज़ी "क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट" (1924) व जयपुर रियासत के "जरायम पेशा कानून" (1930) के तहत मीणाओं को अपराधी जाति मानकर थाने में दैनिक हाज़िरी देनी पड़ती थी।
- 1933 में मीणा क्षत्रिय महासभा का गठन; 1944 में नीमकाथाना में मीणा सम्मेलन — नेतृत्व मुनि मगनसागर, बंशीधर शर्मा, लक्ष्मीनारायण झरवाल।
- 1946 में स्त्रियों व बच्चों को हाज़िरी से छूट मिली; स्वतंत्रता के बाद 1952 में यह कानून पूरी तरह समाप्त हुआ।
वागड़ में शिक्षा व जनजागृति
🎖️ काली बाई (रास्तापाल)
19 जून 1947 को रास्तापाल (डूंगरपुर) में पाठशाला बंद कराने आई पुलिस अपने शिक्षक सेंगाभाई को ट्रक से बांधकर ले जा रही थी; 13 वर्षीय भील बालिका काली बाई ने रस्सी काट दी और पुलिस की गोली से शहीद हुई। पाठशाला संचालक नानाभाई खांट भी शहीद हुए।
📚 भोगीलाल पंड्या
"वागड़ का गांधी"; सेवा संघ (1938) के माध्यम से डूंगरपुर में भीलों के लिए पाठशालाएं खोलीं; डूंगरपुर प्रजामंडल (1944) के संस्थापक।
🏫 माणिक्यलाल वर्मा
डूंगरपुर के खांडलाई में भील बच्चों के लिए आश्रम (1934)।
🌿 मामा बालेश्वर दयाल
बांसवाड़ा-कुशलगढ़ क्षेत्र में भीलों के बीच समाज सुधार व राजनीतिक जागरण।
एक नज़र में — जनजाति आंदोलन
| आंदोलन | नेता | क्षेत्र | प्रमुख घटना |
|---|---|---|---|
| भगत आंदोलन | गोविंद गुरु | डूंगरपुर-बांसवाड़ा | मानगढ़ हत्याकांड (1913) |
| एकी (भोमट) आंदोलन | मोतीलाल तेजावत | मेवाड़ का भोमट क्षेत्र | नीमड़ा हत्याकांड (1922) |
| मीणा आंदोलन | मुनि मगनसागर, बंशीधर शर्मा | जयपुर रियासत | नीमकाथाना सम्मेलन (1944) |
| मेर विद्रोह | — | अजमेर-मेरवाड़ा | 1818-21; मेरवाड़ा बटालियन |
| शिक्षा आंदोलन | भोगीलाल पंड्या | डूंगरपुर | रास्तापाल कांड (1947) |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) भगत आंदोलन — गोविंद गुरु; मानगढ़ धाम (बांसवाड़ा) नरसंहार — 17 नवंबर 1913। (2) एकी आंदोलन — मोतीलाल तेजावत (1921, मातृकुंडिया); नीमड़ा कांड — 7 मार्च 1922। (3) मीणा आंदोलन — जरायम पेशा कानून (1924) के विरोध में।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- भगत आंदोलन — गोविंद गुरु; संप सभा — 1883।
- "राजस्थान का जलियांवाला बाग" — मानगढ़ (17 नवंबर 1913)।
- एकी आंदोलन — मोतीलाल तेजावत, 1921, मातृकुंडिया।
- नीमड़ा हत्याकांड — 7 मार्च 1922।
- "आदिवासियों का मसीहा" — मोतीलाल तेजावत।
- मेवाड़ भील कोर — खेरवाड़ा (1841)।
- ब्यावर नगर के संस्थापक — कर्नल डिक्सन।
- जरायम पेशा कानून — 1930 (जयपुर); समाप्त — 1952।
- नीमकाथाना मीणा सम्मेलन — 1944, मुनि मगनसागर।
- रास्तापाल कांड — 19 जून 1947, काली बाई।
- "वागड़ का गांधी" — भोगीलाल पंड्या।
- सम्प सभा — गोविंद गुरु (1883)।
- मोतीलाल तेजावत — “आदिवासियों का मसीहा”, “बावजी”।
- मानगढ़ धाम — “राजस्थान का जलियांवाला बाग”।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
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1 भगत आंदोलन के प्रवर्तक कौन थे?
2 मानगढ़ हत्याकांड कब हुआ?
3 एकी आंदोलन किस स्थान से आरंभ हुआ?
4 "आदिवासियों का मसीहा" किसे कहा जाता है?
5 संप सभा की स्थापना किसने की?
6 जरायम पेशा कानून किस समुदाय से संबंधित था?
7 रास्तापाल कांड में शहीद होने वाली बालिका कौन थी?
8 "वागड़ का गांधी" किसे कहा जाता है?
9 मेवाड़ भील कोर का गठन किस वर्ष हुआ?
10 नीमकाथाना मीणा सम्मेलन (1944) का नेतृत्व किसने किया?