राजस्थान के किसान आंदोलन
राजस्थान की रियासतों में किसानों पर भारी लगान और अनेक लाग-बाग (अतिरिक्त कर) थे, साथ ही बेगार भी ली जाती थी। 20वीं सदी के आरंभ से किसानों ने संगठित होकर इसका विरोध किया। बिजौलिया का आंदोलन देश के सबसे लंबे और अहिंसक किसान आंदोलनों में गिना जाता है।
📑 विषय सूची 9 टॉपिक
किसान आंदोलनों के कारण
- जागीरदारी व्यवस्था: जागीरदार मनमाना लगान वसूलते थे; किसानों के पास भूमि पर स्थायी अधिकार नहीं थे।
- लाग-बाग: लगान के अलावा विवाह, त्योहार, युद्ध आदि के नाम पर दर्जनों अतिरिक्त कर।
- बेगार: बिना मज़दूरी के काम करवाना।
- राष्ट्रीय आंदोलन, समाचार पत्रों और प्रथम विश्व युद्ध के बाद बढ़ी जागरूकता।
बिजौलिया किसान आंदोलन
बिजौलिया किसान आंदोलन (1897-1941)
भारत का सबसे लंबा अहिंसक किसान आंदोलन
प्रथम चरण (1897-1916) — स्थानीय नेतृत्व
- 1897 में गिरधरपुरा गांव में मृत्युभोज के अवसर पर किसानों ने नानजी पटेल व ठाकरी पटेल को शिकायत लेकर उदयपुर भेजा।
- 1903 में राव कृष्णसिंह ने विवाह पर "चंवरी कर" लगाया; विरोध में किसानों ने बेटियों के विवाह रोक दिए।
- 1906 में राव पृथ्वीसिंह ने "तलवार बंधाई" (उत्तराधिकार) कर लगाया।
- नेता — साधु सीतारामदास, फतहकरण चारण, ब्रह्मदेव।
द्वितीय चरण (1916-1923) — विजयसिंह पथिक
- विजयसिंह पथिक ने नेतृत्व संभाला; "ऊपरमाल पंच बोर्ड" (1917) का गठन।
- कानपुर के "प्रताप" समाचार पत्र (गणेश शंकर विद्यार्थी) ने आंदोलन को देशभर में प्रचारित किया। माणिक्यलाल वर्मा के गीत "पंछीड़ा" ने किसानों में जोश भरा।
- गांधीजी ने महादेव देसाई को जांच हेतु भेजा।
- 1922 में A.G.G. रॉबर्ट हॉलैंड की मध्यस्थता से समझौता — 35 लागतें समाप्त; पर ठिकाने ने इसे पूरी तरह लागू नहीं किया।
तृतीय चरण (1923-1941)
- नेतृत्व — जमनालाल बजाज, हरिभाऊ उपाध्याय, माणिक्यलाल वर्मा।
- 1941 में मेवाड़ के प्रधानमंत्री टी. विजयराघवाचार्य व राजस्व मंत्री मोहनसिंह मेहता ने किसानों की मांगें मानकर आंदोलन समाप्त कराया।
अन्य प्रमुख किसान आंदोलन
🌾 बेगूं किसान आंदोलन (1921-23)
बेगूं (चित्तौड़गढ़); नेता रामनारायण चौधरी, बाद में विजयसिंह पथिक। ठाकुर अनूपसिंह के समझौते को "बोल्शेविक फैसला" कहा गया। 13 जुलाई 1923 को गोविंदपुरा में पुलिस गोलीबारी — रूपाजी व कृपाजी धाकड़ शहीद; ट्रेंच आयोग।
🩸 नीमूचणा हत्याकांड (अलवर)
14 मई 1925; लगान वृद्धि के विरोध में एकत्र किसानों पर गोलीबारी, सैकड़ों मारे गए। गांधीजी ने इसे "जलियांवाला बाग से भी अधिक वीभत्स" व "दोहरी डायरशाही" कहा।
🚩 बूंदी किसान आंदोलन (बरड़)
1922 से; नेता नैणूराम शर्मा। 2 अप्रैल 1923 को डाबी में सभा पर गोलीबारी — झंडा गीत गाते हुए नानक भील शहीद।
🕌 मेव किसान आंदोलन (1932)
अलवर-भरतपुर क्षेत्र; नेता मोहम्मद यासीन खां; लगान व करों के विरोध में।
🌵 दूधवा-खारा आंदोलन (1944-46)
चूरू (बीकानेर रियासत); जागीरदारों के अत्याचार के विरुद्ध; नेता हनुमानसिंह आर्य, रघुवरदयाल गोयल।
⚔️ डाबड़ा कांड (1947)
13 मार्च 1947, डाबड़ा (डीडवाना क्षेत्र, मारवाड़); मारवाड़ लोक परिषद व किसान सभा के सम्मेलन पर जागीरदारों का हमला; कई किसान मारे गए।
शेखावाटी (सीकर) जाट किसान आंदोलन
शेखावाटी किसान आंदोलन (1925-47)
सीकर ठिकाना (जयपुर रियासत) · जाट किसान
- 1931 में राजस्थान जाट क्षेत्रीय सभा का गठन; 1933 में पलथाना में जाट सम्मेलन।
- जनवरी 1934 — जाट प्रजापति महायज्ञ (सीकर); यज्ञ के बाद हाथी पर जुलूस निकालने को लेकर विवाद।
- 25 अप्रैल 1934 — कटराथल महिला सम्मेलन; नेतृत्व किशोरी देवी (सरदार हरलालसिंह की पत्नी); लगभग 10,000 महिलाएं शामिल।
- जयसिंहपुरा हत्याकांड (1934, डूंडलोद) — किसानों पर गोलीबारी; जयपुर रियासत में पहली बार दोषी जागीरदार पक्ष को सज़ा हुई।
- कूदन कांड (1935) — लगान वसूली के विरोध पर पुलिस गोलीबारी।
- प्रमुख नेता — सरदार हरलालसिंह, नेतराम, घासीराम, ठाकुर देशराज।
एक नज़र में — किसान आंदोलन
| आंदोलन | क्षेत्र | वर्ष | प्रमुख नेता / घटना |
|---|---|---|---|
| बिजौलिया | भीलवाड़ा | 1897-1941 | सीताराम दास, विजयसिंह पथिक, माणिक्यलाल वर्मा |
| बेगूं | चित्तौड़गढ़ | 1921-23 | रामनारायण चौधरी; गोविंदपुरा गोलीकांड |
| बूंदी (बरड़) | बूंदी | 1922 | नैणूराम शर्मा; डाबी कांड (नानक भील) |
| नीमूचणा | अलवर | 1925 | हत्याकांड — "दोहरी डायरशाही" |
| मेव | अलवर-भरतपुर | 1932 | मोहम्मद यासीन खां |
| शेखावाटी | सीकर-झुंझुनूं | 1925-47 | हरलालसिंह; कटराथल, कूदन |
| दूधवा-खारा | चूरू | 1944-46 | हनुमानसिंह आर्य |
| डाबड़ा | मारवाड़ | 1947 | किसान सम्मेलन पर हमला |
⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राजस्थान का प्रथम संगठित व सबसे लंबा किसान आंदोलन — बिजोलिया (1897 से, लगभग 44 वर्ष)। (2) बिजोलिया के नेता — साधु सीताराम दास, विजयसिंह पथिक, माणिक्यलाल वर्मा। (3) नीमूचणा कांड (अलवर) — 14 मई 1925; गांधीजी ने इसे “दोहरी डायरशाही” कहा।
वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)
- सबसे लंबा अहिंसक किसान आंदोलन — बिजौलिया (1897-1941)।
- चंवरी कर — राव कृष्णसिंह (1903); तलवार बंधाई — राव पृथ्वीसिंह (1906)।
- ऊपरमाल पंच बोर्ड — विजयसिंह पथिक (1917)।
- "प्रताप" समाचार पत्र — गणेश शंकर विद्यार्थी (कानपुर)।
- बिजौलिया आंदोलन समाप्त — 1941, टी. विजयराघवाचार्य।
- "बोल्शेविक फैसला" — बेगूं आंदोलन; गोविंदपुरा गोलीकांड — 13 जुलाई 1923।
- "दोहरी डायरशाही" — नीमूचणा (14 मई 1925)।
- डाबी कांड में शहीद — नानक भील।
- कटराथल महिला सम्मेलन — 25 अप्रैल 1934, किशोरी देवी।
- मेव आंदोलन — मोहम्मद यासीन खां।
- बेगूं किसान आंदोलन — रामनारायण चौधरी; जांच — ट्रेंच आयोग।
- बूंदी किसान आंदोलन — पं. नैनूराम शर्मा।
- कटराथल सम्मेलन (1934, सीकर) — किशोरी देवी के नेतृत्व में महिलाएं।
- डाबड़ा कांड — 1947, मारवाड़।
अभ्यास प्रश्न (MCQ)
विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।
1 बिजौलिया किसान आंदोलन किस वर्ष आरंभ हुआ?
2 "ऊपरमाल पंच बोर्ड" का गठन किसने किया?
3 चंवरी कर किससे संबंधित था?
4 बेगूं आंदोलन में ठाकुर अनूपसिंह के समझौते को क्या कहा गया?
5 गांधीजी ने किस हत्याकांड को "दोहरी डायरशाही" कहा?
6 डाबी कांड में कौन शहीद हुए?
7 कटराथल महिला सम्मेलन का नेतृत्व किसने किया?
8 मेव किसान आंदोलन के नेता कौन थे?
9 बिजौलिया आंदोलन को समाचार पत्र "प्रताप" के माध्यम से किसने प्रचारित किया?
10 दूधवा-खारा आंदोलन किस जिले से संबंधित है?