राजस्थान में 1857 की क्रांति

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1857 में जब देश भर में अंग्रेज़ों के विरुद्ध विद्रोह भड़का, तब राजस्थान (राजपूताना) में भी सैनिक छावनियों और कई ठिकानों में विद्रोह हुआ। अधिकांश राजा अंग्रेज़ों के साथ रहे, परंतु आऊवा, कोटा और सलूंबर जैसे क्षेत्रों में जनता और सामंतों ने वीरतापूर्वक संघर्ष किया।

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6
सैनिक छावनियां
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28 मई 1857
नसीराबाद — प्रथम विद्रोह
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आऊवा
ठाकुर कुशालसिंह चांपावत
🎖️
अमरचंद बांठिया
राजस्थान के प्रथम शहीद
📑 विषय सूची 11 टॉपिक

पृष्ठभूमि

राजस्थान की 6 सैनिक छावनियां

छावनीस्थानविद्रोह की तिथिविशेष
नसीराबादअजमेर28 मई 1857राजस्थान में सबसे पहले विद्रोह; 15वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री; सैनिक दिल्ली की ओर गए
नीमचमध्य प्रदेश3 जून 1857सैनिक देवली की ओर बढ़े; हीरासिंह व मोहम्मद अली बेग
देवलीटोंकजून 1857नीमच के विद्रोही सैनिकों ने छावनी लूटी
एरिनपुरापाली (जोधपुर लीजन)21 अगस्त 1857"चलो दिल्ली, मारो फिरंगी" का नारा; विद्रोही आऊवा पहुंचे
ब्यावरब्यावर—विद्रोह नहीं हुआ
खेरवाड़ाउदयपुर—विद्रोह नहीं हुआ (मेवाड़ भील कोर)
💡 ट्रिक: 6 छावनियों में से ब्यावर व खेरवाड़ा में विद्रोह नहीं हुआ। विद्रोह का क्रम — नसीराबाद → नीमच → देवली → एरिनपुरा।

आऊवा का संघर्ष

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ठाकुर कुशालसिंह चांपावत

आऊवा (पाली) · राजस्थान में 1857 का सबसे प्रमुख नायक

अति महत्वपूर्ण
ठिकानाआऊवा (पाली)
बिथौड़ा युद्ध8 सितंबर 1857 — विद्रोही विजयी
चेलावास युद्ध18 सितंबर 1857 — विद्रोही विजयी
आऊवा पर अधिकारजनवरी 1858, कर्नल होम्स
  • एरिनपुरा के विद्रोही सैनिकों ने आऊवा पहुंचकर कुशालसिंह का नेतृत्व स्वीकार किया; आसोप, गूलर, आलणियावास आदि ठिकानों के सामंत भी साथ आए।
  • बिथौड़ा युद्ध में जोधपुर की सेना (ओनाड़सिंह पंवार) और लेफ्टिनेंट हीथकोट पराजित हुए।
  • चेलावास युद्ध में A.G.G. लॉरेंस की सेना पराजित हुई और जोधपुर के पॉलिटिकल एजेंट मॉक मेसन मारा गया; उसका सिर आऊवा के किले के द्वार पर लटका दिया गया। इसे "काले-गोरों का युद्ध" भी कहा जाता है।
  • आऊवा की सुगाली माता (10 सिर, 54 हाथ वाली प्रतिमा) को "1857 की क्रांति की देवी" कहा जाता है; अंग्रेज़ इसे अजमेर ले गए, अब यह पाली के बांगड़ संग्रहालय में है।
  • 1860 में कुशालसिंह ने नीमच में आत्मसमर्पण किया; जांच आयोग ने उन्हें बरी कर दिया।

कोटा में विद्रोह

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कोटा का विद्रोह

15 अक्टूबर 1857 · राजस्थान में सबसे संगठित व लंबा विद्रोह

अति महत्वपूर्ण
  • नेतृत्व — लाला जयदयाल (वकील) और मेहराब खां (रिसालदार)।
  • कोटा के पॉलिटिकल एजेंट मेजर बर्टन व उसके दो पुत्रों की हत्या कर दी गई।
  • लगभग 6 महीने तक कोटा विद्रोहियों के नियंत्रण में रहा; महाराव रामसिंह द्वितीय महल में नज़रबंद रहे।
  • मार्च 1858 में जनरल रॉबर्ट्स ने कोटा पर पुनः अधिकार किया; जयदयाल और मेहराब खां को फांसी दी गई।

अन्य प्रमुख केंद्र व व्यक्तित्व

🏃 तात्या टोपे

1857-59 के बीच कई बार राजस्थान आए (भीलवाड़ा, टोंक, झालावाड़, बांसवाड़ा, सीकर आदि)। नरवर के मानसिंह के विश्वासघात से पकड़े गए और 18 अप्रैल 1859 को शिवपुरी (सिप्री) में फांसी दी गई।

🎖️ अमरचंद बांठिया

बीकानेर मूल के ग्वालियर के व्यापारी; क्रांतिकारियों को आर्थिक सहायता दी; राजस्थान के प्रथम शहीद (ग्वालियर में फांसी)। "1857 की क्रांति के भामाशाह"।

🏰 सलूंबर (मेवाड़)

सलूंबर के रावत केसरीसिंह व कोठारिया के रावत जोधसिंह ने क्रांतिकारियों को शरण दी; तात्या टोपे की सहायता की।

🕌 टोंक

नवाब वज़ीरुद्दौला अंग्रेज़ों के समर्थक थे, परंतु सेना व जनता (मीर आलम खां) ने विद्रोह किया।

🐫 बीकानेर

महाराजा सरदारसिंह राजस्थान के एकमात्र शासक थे जो स्वयं सेना लेकर राज्य से बाहर (हरियाणा के बाडलू) अंग्रेज़ों की सहायता को गए।

👑 जयपुर

महाराजा रामसिंह द्वितीय ने अंग्रेज़ों का साथ दिया; बदले में "सितार-ए-हिंद" की उपाधि व कोटकासिम परगना मिला।

1857 और राजस्थानी साहित्य

क्रांति के परिणाम

⚠️ परीक्षा में भ्रम वाले तथ्य: (1) राजस्थान में क्रांति का प्रारंभ — नसीराबाद (28 मई 1857)। (2) आउवा — ठाकुर कुशालसिंह चंपावत; सुगाली माता — “1857 की क्रांति की देवी”। (3) कोटा में मेजर बर्टन की हत्या — लाला जयदयाल व मेहराब खां के नेतृत्व में।

वन-लाइनर तथ्य (Quick Revision)

  1. 1857 में A.G.G. — जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस।
  2. राजस्थान में प्रथम विद्रोह — नसीराबाद, 28 मई 1857।
  3. विद्रोह न होने वाली छावनियां — ब्यावर व खेरवाड़ा।
  4. एरिनपुरा विद्रोह — 21 अगस्त 1857; नारा "चलो दिल्ली, मारो फिरंगी"।
  5. आऊवा — ठाकुर कुशालसिंह चांपावत; बिथौड़ा (8 सितंबर), चेलावास (18 सितंबर)।
  6. चेलावास में मारा गया — मॉक मेसन; "काले-गोरों का युद्ध"।
  7. "1857 की क्रांति की देवी" — सुगाली माता (आऊवा)।
  8. कोटा विद्रोह — 15 अक्टूबर 1857, जयदयाल-मेहराब खां; मेजर बर्टन की हत्या।
  9. राजस्थान के प्रथम शहीद — अमरचंद बांठिया।
  10. तात्या टोपे को फांसी — 18 अप्रैल 1859, शिवपुरी।
  11. राज्य से बाहर जाकर अंग्रेज़ों की मदद करने वाला शासक — बीकानेर के सरदारसिंह।
  12. राजस्थान की 6 सैनिक छावनियां — नसीराबाद, नीमच, देवली, ब्यावर, एरिनपुरा, खैरवाड़ा।
  13. एरिनपुरा के सैनिकों का नारा — “चलो दिल्ली, मारो फिरंगी”।
  14. तत्कालीन AGG — जॉर्ज पैट्रिक लॉरेंस।
  15. तात्या टोपे पकड़े गए — नरवर (1859)।

अभ्यास प्रश्न (MCQ)

विकल्प चुनें — सही उत्तर तुरंत दिखेगा।

1 राजस्थान में 1857 का विद्रोह सबसे पहले किस छावनी में हुआ?

2 1857 के समय राजपूताना के A.G.G. कौन थे?

3 आऊवा के ठाकुर कुशालसिंह किस शाखा के थे?

4 चेलावास युद्ध में कौन अंग्रेज़ अधिकारी मारा गया?

5 "1857 की क्रांति की देवी" किसे कहा जाता है?

6 कोटा में विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?

7 राजस्थान के प्रथम शहीद कौन माने जाते हैं?

8 किन छावनियों में 1857 में विद्रोह नहीं हुआ?

9 "वीर सतसई" के रचयिता कौन हैं?

10 तात्या टोपे को कहां फांसी दी गई?

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